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” आरोपों से हिल गई पुलिस की छवि “

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  • केशव के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए
  • पुलिस पर लगाए गए आरोप अमानवीयता की पराकाष्ठा
  • आईजी गढ़वाल ने दिए जिले से बाहर के अधिकारी को जांच के निर्देश

देहरादून। नाम केशव थलवाल निवासी लमगांव टिहरी गढ़वाल जिसको पुलिस द्वारा चार माह पूर्व जेल भेज दिया गया था, जेल से बाहर आकर उसने सूबे की मित्र पुलिस पर जिस तरह की अमानवीयता के आरोप लगाए हैं। भले ही पुलिस अधिकारियों द्वारा उसके आरोपों का खंडन किया जा रहा हो लेकिन वायरल वीडियो में जिस तरह के आरोप लगाए गए हैं वह पुलिस की कार्यश्ौली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाले हैं। इसलिए इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। अगर केशव के आरोप सच साबित होते हैं तो इस मामले के दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई होनी ही चाहिए और अगर वह झूठे हैं तो केशव को इसकी सख्त सजा भी मिलनी चाहिए। क्योंकि यह राज्य की पुलिस की साख और प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ मुद्दा है।
केशव का कहना है कि उसने अपनी बहन के साथ छेड़छाड़ की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई थी और इसी मामले में वार्ता करने के लिए एसएसपी द्वारा बुलाये जाने की बात कहकर उसे रास्ते से दो पुरुषकर्मी अपने साथ ले गए तथा उसे कोटी कॉलोनी पुलिस चौकी लेकर जाया गया जहां उसके साथ मारपीट की गई उसका कहना है कि उसे पेशाब पिलाया गया तथा थूक कर पानी पिलाया गया। पुलिस कर्मियों के जूते चटवाए गए। केशव के अनुसार पुलिस कर्मियों द्वारा उसे जब पीटा जा रहा था तब कुछ अन्य पुलिस कर्मियों को फोन मिलाकर उसकी चीखने की आवाजें भी सुनाई गई थी।
हालांकि पुलिस केशव के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है तथा वह केशव के कुकृत्यों की एक अलग ही स्टोरी सुना रही है। प्रताप नगर विधायक विक्रम सिंह नेगी ने केशव के आरोपों को लेकर पुलिस पर गंभीर सवाल उठाते हुए न सिर्फ आंदोलन की चेतावनी दी है बल्कि इसकी जांच सीबीसीआईडी से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि केशव द्वारा पुलिस के कई कारनामों का खुलासा सोशल मीडिया के माध्यम से किया गया था, जिसके परिणाम स्वरूप पुलिस ने इस तरह के घिनौने व जघन्य अपराध को अंजाम दिया है। वीडियो में केशव ने राज्य के आला पुलिस अधिकारियों से इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
मामला तूल पकड़ता देख अब आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप द्वारा इस मामले की जांच टिहरी जिले के अधिकारियों से न करा कर पौड़ी जिले के अधिकारी से कराने के आदेश दिए गए हैं। जबकि पूर्व में इस मामले की जांच टिहरी के एसएसपी के स्तर पर ही कराने के निर्देश दिए गए थे। इन आरोपों की सत्यता कब सामने आएगी, अलग बात है। लेकिन केशव की वायरल हो रही वीडियो ने मित्र पुलिस की प्रतिष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शासन स्तर पर इसका जवाब मिलना जरूरी हो गया है।

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