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पाक फिर फंसा संकट में

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पड़ोसी देश पाकिस्तान के लिए भले ही राजनीतिक अस्थिरता कोई नई बात न हो लेकिन इस राजनीतिक अस्थिरता का कहीं न कहीं प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष असर भारत पर भी पड़ता है। पाक प्रधानमंत्री इमरान खान की सत्ता जा चुकी है, पाक एसेंबली को भंग किया जा चुका है और इमरान खान को उनके पद से हटा दिया गया है। देश में अब जल्द चुनाव कराए जाने की संभावना है। बीते कुछ महीनों से पाकिस्तानी राजनीति में जिस तरह की उठापटक चल रही थी उनसे बहुत पहले ही इस बात के संकेत मिल चुके थे कि इमरान खान की सत्ता जाने वाली है। संसद में उनके सहयोगी दल उनका साथ छोड़ चुके थे तथा सेना के साथ इमरान की तकरार की खबरें भी लंबे समय से आ रही है। बाजवा के साथ उनके खराब होते रिश्ते और विपक्ष की लामबंदी से घिरे इमरान ने इस स्थिति को टालने और बचने की लाख कोशिशें की लेकिन वह इसमें कामयाब नहीं रहे। विपक्ष द्वारा उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग से बचने के लिए और सत्ता में बने रहने के लिए संसद को भंग करने का जो पैंतरा चला था वह भी उनके काम नहीं आ सका। खैर पाकिस्तानी हुकूमत से अब उनकी विदाई हो चुकी है और आगे क्या होगा यह अदालत तय करेगी या सेना तय करेगी। पाकिस्तान का 75 सालों का इतिहास बताता है कि वहंा अब तक बने 22 प्रधान मंत्रियों में से कोई भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सका है। इमरान का नाम भी उसी सूची में दर्ज हो चुका है। पीएम पद से हटाए जाने से पूर्व इमरान ने देश के वर्तमान हालात को विदेशी ताकतों की साजिश तक बताया जाना तथा कश्मीर का राग अलापा जाना तथा भारत की विदेश नीति की सराहना किया जाना, जैसी बातें यह बताने के लिए बहुत काफी है कि भारत पर पाक की राजनीतिक अस्थिरता का क्या प्रभाव पड़ता है। भारत के साथ पाकिस्तान के रिश्ते कभी अच्छा न रहने के पीछे उसकी आतंकी सोच के अलावा जो मुख्य कारण रहा है वह हुक्मरानों का अपनी सत्ता बचाने के लिए किए जाने वाले प्रोपेगेंडा भी रहे हैं। भारत विरोध पाक नेता अपने बचाव का एक आसान जरिया मानते हैं जिसके कारण पाकिस्तानियों कि जहनियत में भारत का विरोध रच—बस गया है और वह भारत को अपना दुश्मन नंबर वन मानते हैं। इमरान की सत्ता जाने का कारण विपक्ष का विरोध ही जिम्मेवार नहीं है बल्कि इमरान सरकार की वह नाकामिया है जो वर्तमान में आम जनता की परेशानी बनी हुई है। पाकिस्तानी आवाम से इमरान ने जो वादे किए थे वह पूरे नहीं किए गए। देश में महंगाई के कारण आम आदमी का जीवन संकट में फंसा हुआ है। देश पर विदेशी कर्ज का बोझ इतना बढ़ चुका है कि उसे कर्ज मिलना भी मुश्किल हो रहा है। चीन की गोद में जा बैठने से अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और रूस जैसे देश नाराज हैं। पाक कंगाल होने की कगार पर है, उसका हाल भी आने वाले दिनों में श्रीलंका जैसा हो सकता है। देखना यह है कि आने वाले दिनों में पाक इस आर्थिक संकट और सामाजिक आक्रोश व राजनीतिक अस्थिरता से कैसे निपटता है।

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