नई दिल्ली। उत्तराखंड में मदरसों पर हो रही कार्रवाई के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। राज्य सरकार बिना किसी मान्यता के चल रहे मदरसों को बंद कर रही है। इसके खिलाफ जमीयत उलेमा ए हिंद ने आवेदन दाखिल किया है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे देश भर के मदरसों को लेकर पहले से लंबित याचिका के साथ जोड़ लिया है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस राजेश बिंदल की बेंच ने शुरू में कहा कि मदरसों में दी जा रही शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षा के अधिकार कानून की स्थिति या उनकी फंडिंग को लेकर जानकारी मांगने में कुछ गलत नहीं दिखता। अगर याचिकाकर्ता को कोई समस्या है, तो वह हाई कोर्ट जा सकता है। जमीयत के लिए पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने इसका विरोध करते हुए पिछले साल आए सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला दिया।
कपिल सिब्बल ने जिस आदेश की बात कही, उसे 21 अक्टूबर 2024 को तत्कालीन चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने जमीयत उलेमा ए हिंद की ही याचिका पर दिया था। उस आदेश में कोर्ट ने यूपी के गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सभी छात्रों को स्कूलों में ट्रांसफर करने की कार्रवाई पर रोक लगाई थी। कोर्ट ने सरकारी अनुदान वाले मदरसों से गैर मुस्लिम छात्रों को हटाने के राज्य सरकार के फैसले पर भी रोक लगाई थी। यूपी सरकार की इस कार्रवाई का आधार राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की तरफ से जून, 2024 में सभी राज्यों के लिए आया एक निर्देश था। कोर्ट ने उस निर्देश पर भी रोक लगा दी थी। कपिल सिब्बल ने जजों को बताया कि इस मामले में सभी राज्यों को नोटिस भेजा गया था। इस पर आगे सुनवाई होनी है। अब उत्तराखंड के मामले के लिए हाई कोर्ट जाने के लिए कहना सही नहीं होगा। कपिल सिब्बल की इस दलील को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि वह इस आवेदन को मुख्य मामले के साथ सुनेंगे।




