ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के लिए निरंतर कर रही हैं कार्य
देहरादून। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मुमकिन है डेवलपमेंट फाउंडेशन की संस्थापक एवं निदेशिका तथा “उत्तराखंड की बेटी” प्रगति सडाना के सामाजिक योगदान और उपलब्धियों को सराहा गया। पिछले छह वर्षों से वे उत्तराखंड के ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही हैं।
वर्ष 2020 में स्थापित मुमकिन है डेवलपमेंट फाउंडेशन के माध्यम से प्रगति सडाना ने सीमित संसाधनों के बावजूद कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू कीं। उनके नेतृत्व में स्कूलों में पुस्तकालय स्थापित करना, बच्चों को श्ौक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराना, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना तथा सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी उनके प्रयास उल्लेखनीय रहे हैं। ग्रामीण और जनजातीय महिलाओं तथा किशोरियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता जागरूकता अभियान, कौशल विकास प्रशिक्षण और आजीविका उन्मुख कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही देहरादून के दृष्टिबाधित छात्रों को श्ौक्षणिक और प्रेरणात्मक सहयोग प्रदान कर उन्हें नई तकनीकों से जोड़ने और शिक्षा की मुख्यधारा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस अवसर पर प्रगति सडाना ने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव तभी संभव है जब महिलाएँ और युवा आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएँ। उन्होंने सभी से मिलकर एक सशक्त, जागरूक और समावेशी समाज के निर्माण में योगदान देने की अपील की।




