- कांग्रेसी बोले, सीबीआई जांच से ही सच आयेगा सामने
- कांग्रेस धामों को बदनाम करने में जुटी हैः भट्ट
देहरादून। केदारनाथ मन्दिर को दानदाता ने कितना सोना दिया और मन्दिर में कितना सोना लगा हैं? क्या दान में मिले सोने की चोरी की गयी? अगर सोना चोरी किया गया तो कितना सोना चोरी किया गया और किसने सोना चोरी किया? जब तक इन सभी सवालों के ठोस जवाब नहीं मिलते तब तक यह मामला शांत होने वाला नहीं है।
बीते कल नेता विपक्ष यशपाल आर्य ने इसे लेकर तमाम सवाल उठाये। उन्होने कहा कि दानदाता ने अगर 23 किलो सोना दिया था तो उस समय 228 किलो सोना मिलने की बात क्यों प्रचारित की गयी। क्यों पर्यटन मंत्री और बद्रीकेदार समिति ने स्पष्ठीकरण नहीं दिया गया। उन्होने कहा कि समिति अध्यक्ष ने केन्द्रीय गृहमंत्री से पत्र लिखकर मन्दिर में इस सोने की सुरक्षा के लिए मांग क्याें की गयी थी? क्योंकि खुद समिति ने ही मुख्यमंत्री से सोना चोरी की शिकायत की थी? और जांच की मांग की थी। सवाल यह भी है कि सरकार ने अगर जांच करायी थी तो उसे अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। कांग्रेस नेता गणेश गोदियाल का कहना है कि जब तक ईडी या सीबीआई इसकी जांच नहीं करेगी तब तक दूध का दूध पानी का पानी नहीं हो सकता है।
23 किलो सोना और 228 किलो सोने में दो सौ किलो से भी अधिक का अंतर है। इतने बड़े स्तर पर चोरी या घोटाला हुआ है तो उसकी जांच होनी ही चाहिए? भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट जिनका कहना है कि कांग्रेस धामों को बदनाम कर रही है, जैसे तर्को के आधार पर इन बड़े आरोपो से नहीं बचा जा सकता है। पर्यटन मंत्री और सरकार को ठोस साक्ष्यों के साथ सामने आना चाहिए या फिर इस मामले की सीबीआई जांच करानी चाहिए। गणेश गोदियाल का तो यहंा तक कहना है कि उनके समिति में रहते समय भी उनके पास इस तरह के आफर आये थे। किसकी देख रेख में सोना आया और किसकी देख रेख में सोने की परतें चढ़ायी गयी इसमें कितना पीतल मिला है या तांबा मिला है और कितना सोना लगाया गया है इस सब की जांच जरूरी है। यही नहीं अगर सोने की चोरी हुई ते चोर कौन है? इसका पता लगाना तो जरूरी है उससे वसूलरी और उसे इस अधर्म की सजा भी मिलनी ही चाहिए।




