हिजाब पर स्वागत योग्य फैसला

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कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा हिजाब पर आज जो फैसला सुनाया गया है वह स्वागत योग्य है। यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आजादी के 75 साल बाद भी अगर देश का समाज धर्म और जातिवाद की जिन संर्कीणताओंं में उलझा हुआ है उन्हें देश की एकता और अखंडता के लिए उचित नहीं कहा जा सकता है। देश के विकास के लिए और सामाजिक समरसता को बनाए रखने के लिए संर्कीणताओं के दायरे से बाहर आने की जरूरत है। इस विवाद को लेकर अदालत में हिजाब को मौलिक अधिकार बता कर उन पर हमले का आरोप लगाते हुए जो याचिका दायर की गई थी उसे अदालत ने खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में साफ कर दिया है कि हिजाब पहनना मुस्लिम धर्म की अनिवार्यता नहीं है। वहीं अदालत द्वारा शिक्षण संस्थान द्वारा निर्धारित यूनिफॉर्म पहनने की व्यवस्था को जायज ठहराया गया है। यह ठीक है कि हमारा संविधान व उसमें उल्लेखित मौलिक अधिकार हर व्यक्ति को अपनी मनपसंद ड्रेस (कपडे़) पहनने का अधिकार देते हैं लेकिन अगर कोई महिला यह कहे कि उसका धर्म हिजाब पहनने के अतिरिक्त अन्य कुछ पहनने की इजाजत नहीं देता है तो यह गलत ही है। क्या मुस्लिम महिलाएं हिजाब के अलावा कुर्ता सलवार व अन्य कपड़े नहीं पहनती हैं। तो फिर कॉलेज या स्कूल जाने के लिए हिजाब पहनने की जिद ही क्यों? दरअसल यह पूरा हिजाब विवाद पांचों राज्यों के चुनाव से पूर्व कुछ शरारती तत्वों के दिमाग की सोची समझी साजिश थी जिसकी शुरुआत कर्नाटक के एक कालेज से हुई जब छात्राएं हिजाब पहनकर पहुंची। कालेज प्रबंधन ने जब उन्हें हिजाब में कालेज आने से रोका गया तो इसे अपने मौलिक अधिकारों का हनन बता कर बवाल खड़ा कर दिया गया। दिसंबर 2021 में कर्नाटक से शुरू हुआ यह विवाद चुनाव आते—आते तमाम राज्यों तक पहुंच गया। कर्नाटक सरकार द्वारा इस बीच एक शासनादेश लाकर शिक्षण संस्थाओं में तय यूनिफॉर्म पहनने को जरूरी कर दिया गया। आज हाईकोर्ट ने भी सरकार की इस व्यवस्था को उचित ठहरा दिया। हर शिक्षण संस्थान की अपनी एक यूनिफार्म होती है। जिसका अनुपालन हर छात्र को करना होता है क्या एएमयू अलीगढ़ के छात्र शेरवानी नहीं पहनते, जो भी छात्र यहां पढ़ते हैं क्या शेरवानी पहन कर यूनिवर्सिटी जाने से वह मुस्लिम हो जाते हैं या उनके मौलिक अधिकारों को उनसे छीन लिया जाता है? शिक्षण संस्थान में यह हिजाब पहनकर जाने वाली छात्राएं शौक से हिजाब पहने उन्हें भला कौन रोक रहा है और क्यों रोकेगा यहां यह भी समझा जाना जरूरी है कि आप के मौलिक अधिकारों की भी कुछ सीमाएं हैं सड़क पर चलने का अधिकार अगर कोई इस तरह से ले कि वह तो बीच सड़क पर चलेगा तो क्या उसे उचित ठहराया जा सकता है। दरअसल यह विवाद या इस तरह के विवाद कुछ होते ही नहीं उन्हें विवाद बनाया जाता है आपके हिजाब पहनकर स्कूल जाने न जाने से ज्यादा जरूरी है आपका शिक्षित होना। अगर आपको हिजाब पहनकर स्कूल आने से रोका जाता है और आप इसलिए स्कूल छोड़ कर घर बैठ जाते हैं तो आप अपना ही नुकसान कर रहे हैं। इन छात्राओं को हिजाब की बजाय अपने शिक्षण को लेकर चिंता करने की जरूरत है। हाईकोर्ट ने शिक्षण संस्थानों में अनुशासन बनाए रखने के लिहाज से जो फैसला दिया है वह स्वागत योग्य है किसी भी शिक्षण संस्थान में आप सिर्फ छात्र बन कर रहे हिंदू—मुस्लिम—सिख—ईसाई बनकर नहीं।

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