दिहाड़ी पर शिक्षिका रखने वाली प्रधानाध्यापिका निलंबित

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ढाई हजार की पगार में अपनी जगह रखी थी शिक्षिका

श्रीनगर। राज्य में शिक्षा, शिक्षक और शिक्षा के स्तर तथा स्कूलों की स्थिति को लेकर आने वाले कई तरह के समाचार आपने पढ़े और सुने होंगें। लेकिन जनपद पौड़ी की थ्ौलीसैंण तहसील क्षेत्र के एक स्कूल से ऐसा मामला प्रकाश में आया है जिसमें स्कूल की प्रधानाध्यापिका दिहाड़ी मजदूरी पर शिक्षक रखकर स्कूल चला रही थी। जिन्हें अब मामले का खुलासा होने पर निलंबित कर दिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मामला जनपद पौड़ी की तहसील थ्ौलीसैंण अंतर्गत बाग्वाड़ी के सरकारी प्राइमरी स्कूल का है, जहां श्रीमती शीतल रावत बतौर प्रधानाध्यापिका तैनात है। इस मामले का खुलासा उस समय हुआ जब जिला शिक्षा अधिकारी (प्रा.शि.) स्कूल के निरीक्षण पर पहुंचे। निरीक्षण के दौरान स्कूल में प्रधानाध्यापिका शीतल रावत गैरहाजिर मिली। स्कूल में उनकी जगह शिक्षण कार्य करने वाली युवती जिसका नाम कुमारी मधु रावत है से जब पूछताछ की गई तो पता चला कि प्रधानाध्यापिका द्वारा उन्हें ढाई हजार रूपये प्रतिमाह वेतन पर पढ़ाने के लिए रखा गया है।
प्रधानाध्यापिका श्रीमती शीतल रावत के खिलाफ जब जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि वह तो स्कूल सिर्फ अपनी हाजिरी लगाने के लिए ही आती है। शिक्षा अधिकारी द्वारा प्रधानाध्यापिका का वेतन रोकने के आदेश दे दिए गए हैं। इस मामले की विस्तृत जांच कराई गई तो पता चला कि सेवा शर्तों को ताक पर रखकर प्रधानाध्यापिका अपनी ड्यूटी की औपचारिकता भर पूरी कर रही थी। उनके द्वारा एक स्थानीय युवती को ढाई हजार रूपये महीने के वेतन पर रखा हुआ था जो बच्चों को पढ़ाने का काम कर रही थी। जिला शिक्षा अधिकारी मोहम्मद साबिर द्वारा उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया है तथा कार्यालय उप शिक्षा अधिकारी (प्रा.शि) शिक्षा खंड थ्ौलीसैंण से संबद्ध कर दिया गया है।
उत्तराखंड राज्य की शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर को उजागर करने वाली इस घटना से यह सहज सोचा जा सकता है कि राज्य में नौनिहालों की शिक्षा से कैसा खिलवाड़ हो रहा है। फर्जी प्रमाणपत्रों से शिक्षक नौकरी पाने से लेकर बिना स्कूल जाए हाजिरी लगाकर वेतन लेने वाले शिक्षकों के भरोसे राज्य की प्राथमिक शिक्षा को कौन सुधारेगा? यह एक बड़ा सवाल है।

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