- आयोग व सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल
- एसआईटी फिर पहुंची मुख्य आरोपी के घर
देहरादून। पेपर लीक मामले को लेकर युवा बेरोजगारों और शासन—प्रशासन के बीच तकरार बजाए कम होने के और भी अधिक बढ़ती जा रही है। सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं द्वारा आंदोलनकारी युवाओं पर न सिर्फ तरह—तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं बल्कि उनके आंदोलन को खत्म करने के लिए अनुचित हथकंडे अपनाए जाने से युवाओं का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सत्ता में बैठे नेताओं और युवाओं के बीच तू डाल—डाल मैं पात—पात का खेल चल रहा है।
एसआईटी जांच की निगरानी के लिए नियुक्त जज बीएस वर्मा पर छात्रों ने सवाल उठाए थे जिन्हें अब स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर हटा दिया गया है और उनकी जगह यूसी ध्यानी को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई है। भाजपा के कुछ नेताओं द्वारा मुख्यमंत्री धामी के स्वर में स्वर मिलाते हुए न सिर्फ पेपर लीक की बात को नकारा जा रहा है बल्कि छात्रों को किसी राजनीतिक षडयंत्र में न फंसने की सलाह देते हुए अपने भविष्य पर ध्यान देने की बात समझाई जा रही है और सरकार उनके हितों का पूरा संरक्षण करेगी इसका भी आश्वासन दिया जा रहा है। वहीं कुछ नेता व विधायक तथा सांसद छात्रों की सीबीआई जांच की मांग का समर्थन भी कर रहे हैं उनका तर्क है कि परीक्षाओं की पारदर्शिता पर जो अविश्वास के बादल छाए हुए हैं इससे वह छंट जाएंगे।
युवा बेरोजगार भी सुन तो सभी की रहे हैं लेकिन कर अपने मन की रहे हैं वह सीबीआई से जांच और परीक्षा रद्द करने की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। भले ही एसआईटी ने अपनी जांच शुरू कर दी हो लेकिन वह टस से मस होने को तैयार नहीं है। एसआईटी की टीम आज एक बार फिर लक्सर के सुल्तानपुर गांव पहुंची है और वह खालिद के परिजनों से पूछताछ कर रही है। एसपी जय बलूनी ने इस बाबत बताया है कि बीते कल मुख्य आरोपी खालिद के कुछ परिजन घर पर मौजूद नहीं मिले थे जिनसे पूछताछ नहीं की जा सकी थी इसलिए उनकी टीम फिर से मुख्य आरोपी खालिद के घर आई है कि उनसे पूछताछ की जा सके।
युवा बेरोजगारों का आंदोलन जल्द खत्म होने वाला है शासन—प्रशासन के रूख से ऐसे कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। इस आंदोलन का भविष्य क्या होगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन सरकार की जो कुर्ता घसीटन इस मामले में हो रही है वह सरकार के लिए हितकर रहने वाला नहीं है।




