- अंकिता भंडारी केस: किरदार बदले, सवाल वही
- माता-पिता वादी नहीं, क्यों?
देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में अब राज्य सरकार द्वारा सीबीआई जांच के आदेश तो दे दिये गये है। लेकिन मामला अब भी सवालों के घेरे में खड़ा नजर आ रहा है। सीबीआई जांच से पहले एक मुकदमा अज्ञात वीआईपी के खिलाफ दर्ज किया जाता है जो कि अंकिता के परिजनों के बजाय किसी अन्य के द्वारा? पहले अचानक इस मामले में स्वामी दर्शन भारती का आना और अब जोशी का मुकदमा दर्ज कराना मामले को संदिग्ध बनाने के लिए काफी है? लोगों का कहना है कि आखिर हत्याकांड के तीन साल बाद इन लोगों को अंकिता भंडारी हत्याकांड की याद कैसे आयी?
राज्य का बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में पिछले कई दिनों से एक बार फिर चर्चाआें में है। पिछले दिनो अभिनेत्री उर्मिला सनावर द्वारा अंकिता हत्याकांड से सम्बन्धित कई आडियो—वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किये जाने के बाद राज्य के राजनीतिक व गैर राजनीतिक दल आंदोलनों पर उतर आये। अंकिता के परिजनों व लोगों की मांग थी कि मामले के पूर्ण रूप से खुलासे के लिए सीबीआई जांच करायी जाये। आखिरकार मामले को बढ़ता देखकर राज्य सरकार द्वारा इस मामले की सीबीआई जांच कराने की बात बीते रोज कही गयी।
मामले में तब सवाल खड़े होना शुरू हुए जब सीबीआई की जाँच से पहले एक एफआईआर बंसत विहार थाने में दी जाती है वो भी पद्मश्री अनिल जोशी की तहरीर पर। जोशी अंकिता भंडारी के किसी रिश्ते में नहीं है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि जहंा सीएम धामी एक तरफ कह रहे है कि सीबीआई जाँच अंकिता के माता पिता के कहने पर हुई। अगर यह सही है तो फिर तहरीर अंकिता के माता—पिता से क्यों नहीं ली गयी? इसके साइड इफेक्ट्स सामने आयेंगे, अगर अंकिता के माता पिता की तहरीर पर मुकदमा होता तो केस उनके हाथ में रहता, अब तो न केस उनका है, न वो पैरवी उनकी?, हाँ दुर्भाग्य से मरने वाली बेटी उन्हीं की है। हां मामला अब भी संदिग्ध जरूर बना हुआ है।




