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चुनाव परिणामों से मची खलबली

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पंचायतों के चुनावी नतीजों ने सूबे के सियासी हलकों में खलबली मचा दी है। लोकसभा, विधानसभा और शहरी निकायों के चुनावों में लगातार जीत दर्ज करने वाली भाजपा इन चुनावी नतीजों को लेकर ज्यादा हैरान परेशान है वही लगातार पराजय का दंश झेल रही कांग्रेस के लिए यह नतीजे एक नई उम्मीद जगाते दिख रहे हैं। सियासी हलकों में खलबली के पीछे दो अहम कारण है। पहला कारण है राजनीतिक दलों के उन समर्थित प्रत्याशियों का हार जाना जिनके जीतने की संभावनाएं थी और उन प्रत्याशियों का चुनाव जीत जाना जिनके हारने की संभावनाएं जताई जा रही थी। दूसरा कारण है इस छोटी सरकार के चुनाव में पढ़े लिखे और युवा लड़के लड़कियों का चुनाव जीतकर आना जो पहली बार सार्वजनिक सेवा के इस मैदान में उतरे हैं। खास तौर पर बहुतायत में महिला प्रत्याशियों की जीत ने सियासी समीकरण बदल दिए हैं। इस संदर्भ में एक बात साफ है कि उत्तराखंड अब युवा सियासत की ओर अग्रसर होता दिख रहा है और खांटी पुराने और बुजुर्ग नेताओं से मुक्ति चाहता है। इस चुनाव में जीत दर्ज करने वाले इन युवाओं ने प्रदेश की राजनीति को एक नई दिशा देने की उम्मीद जगाई है। ऐसे कुछ चेहरों की बात की जाए तो इसे सूबे की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण से ही करना ठीक होगा जिस पर जन भावनाओं की राजनीति हावी रही है। गैरसैंण के क्षेत्र के गांव आदर्श गांव सरकोट की प्रियंका नेगी (22) जो सबसे कम उम्र की महिला प्रत्याशी है प्रधान पद का चुनाव जीत गई हैं। खास बात यह है कि इस गांव को मुख्यमंत्री धामी ने गोद लिया था। नैनीताल से एक बड़ी खबर आई है पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बेला तौलिया जिला पंचायत सदस्य तक का चुनाव भी हार गई। नैनीताल से एक और खास खबर है कि विधायक राम सिंह कैड़ा जो वर्तमान में भीमताल से भाजपा के विधायक हैं उनकी बहू की भी हार हुई है वही सल्ट से भाजपा के विधायक महेश जीना का पुत्र भी बीडीसी का चुनाव हार गया है। टिहरी क्षेत्र की एक सीट से सीता देवी जिनका नामांकन पत्र रद्द कर दिया गया था जिसे लेकर वह हाईकोर्ट तक गई और आयोग सुप्रीम कोर्ट तक गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले को बदलने से मना कर दिया था अब वह चुनाव जीत गई हैं। उन्होंने भाजपा समर्थित प्रत्याशी सरिता देवी को हराया है। उधर कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह के बेटे जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीत गए हैं उधर एक और कांग्रेस नेता शूरवीर सजवाण के बेटे ने भी इस चुनाव में जीत दर्ज की है। युवा नेत्रियों में सबसे कम उम्र की प्रियंका नेगी ही ग्राम प्रधान नहीं चुनी गई है उनके अलावा पिथौरागढ़ के मुंसियारी में ईशा जिन्होंने बीएड तक पढ़ाई की इसके अलावा साक्षी (23) का नाम चर्चाओं में है। चमोली के नितिन जो टॉस से हार जीत का फैसला होने पर प्रधानी का चुनाव जीते हैं महज 23 साल के है तथा पढ़े—लिखे युवा हैं। इस युवा जोश और युवा उम्मीदों के साथ राजनीति की सीढ़ियां चढ़ने को तैयार सूबे का यह युवा शक्ति सूबे की राजनीति में कितना सकारात्मक बदलाव लाएगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा। अब असल महासंग्राम तो जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लाक प्रमुख के होने वाले चुनावों में होना है जिनमें इन जीते हुए प्रत्याशियों को मत देना है। देखना होगा कि भाजपा जिसका पिछले चुनावों में दबदबा रहा था इस बार उसे बरकरार रख पाती है या नहीं। क्योंकि यह चुनाव कांग्रेस के लिए एक नई उम्मीद लेकर आए हैं इस छोटी सरकार के चयन में वह मजबूती से आगे बढ़ती दिख रही है। लेकिन यह चुनाव सूबे की भावी राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत जरूर दे रहे हैं।

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