बबूल के बाग

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भले ही नेताओं को तल्ख और भड़काऊ सांप्रदायिक भाषणों से कोई फर्क न पड़ता हो तथा उनके लिए हिंदू और मुस्लिम करने से उनका कुछ न जा रहा हो लेकिन उनके द्वारा समाज में फैलाये जाने वाले उन्माद का खामियाजा देश और समाज को भोगने से बचा पाना संभव नहीं है। इसकी प्रतिक्रियाएं कब और कहां किस रूप में पेश आ सकती हैं? इसका अनुमान लगाना संभव नहीं है। उत्तराखंड में बीते तीन दिन में घटित होने वाली अगर कुछ घटनाओं पर गौर किया जाए तो शायद आपको भी समझ आ जाएगा कि अपने राजनीतिक हितों के लिए जो बबूल के बाग बीते सालों में बोय गए हैं उनके कांटे अब कितने तीखे हो चुके हैं और वह किस तरह जनता के पैरों को लहू लुहान कर रहे हैं। मंगलौर में सड़क चलते एक कार ने कावड़ को छू लिया। इस घटना को लेकर कांवड़ियों ने कार में सवार लोगों को इस कदर पीटा कि वह लहूलुहान हो गए कार में सवार एक महिला और बच्ची भी इसमें घायल हो गई। कार सवार लोगों ने फोन कर अपने परिचितों को बुला लिया तो मामला इतना अधिक गंभीर हो गया कि कई थानों की पुलिस को बुलाना पड़ा। तब जाकर कहीं मामला शांत हो सका। अभी तो कावड़ मेला शुरू भी नहीं हुआ है। 11 जुलाई से शुरू होने वाले इस मेले से पहले ही बवाल की शुरुआत हो गई है। दूसरी ओर कावड़ यात्रा मार्गों पर खाने का काम करने वाले होटल, ढाबों रेस्टोरेंटों, रेड़ी ठेली लगाने वालों को अपनी पहचान उजागर करने को लेकर भारी विवाद छिड़ा हुआ है। यह मामला बीते साल भी सुर्खियों में रहा था वही इस साल यह मामला देश की सर्वाेच्च अदालत तक पहुंच गया है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड में व्यापक स्तर पर मजार और मदरसोंंंं पर जो बुलडोजर और सीलिंग की कार्रवाई हो रही है वह तो हो ही रही है बीते तीन दिनों में देहरादून में तीन बच्चियों के साथ रेप और हत्या जैसी वारदातें सामने आ चुकी हैं। तीन दिन पहले ऋषिकेश में एक सार्वजनिक शौचालय में एक 13 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म का मामला सामने आया था इसके बाद बीते कल डोईवाला में एक कूड़ा बीनने वाली बच्ची को एक क्रेशर के कर्मचारियों द्वारा बंधक बनाने और कमरे में उसका शव फांसी पर लटका मिलने के मामले ने लोगों को सड़कों पर उतरने पर मजबूर कर दिया। डोईवाला कोतवाली पर प्रदर्शन करने वालों में से एक महिला चींख—चींख कर कह रही थी कि इन मुसलमान को यहां से मार—मार कर भगाओ। आरोपियों में दूसरे समुदाय के लोगों के होने की बात कही जा रही है इस लड़की के साथ क्या हुआ क्यों हुआ इसका खुलासा जांच और मेडिकल रिपोर्ट से ही होगा। लेकिन यह पहली मर्तबा नहीं है। जिस लव जेहाद और थूक जेहाद की बात बीते कई सालों से हो रही है उसे लेकर पहाड़ लंबे समय से सुलग रहा है। किसी भी एक समुदाय के साथ कोई अन्य समुदाय अगर बदले और नफरत की भावना से अगर ऐसी घटनाओं को अंजाम देता है तो यह समाज के लिए एक अत्यंत चिंतनीय व विनाशकारी सोच ही कहीं जा सकती है।

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