मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने पहले टर्म और दूसरे टर्म को मिलाकर 4 साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है। सीएम धामी अपनी दूसरी राजनीतिक कामयाबी से बेहद खुश हैं। उन्हें खुश होना भी चाहिए क्योंकि एनडी तिवारी के बाद वह दूसरे नंबर के मुख्यमंत्री हैं जिन्हें लगातार इतने लंबे समय तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने रहने का मौका मिला है। 25 सालों में जिस राज्य में मुख्यमंत्री कपड़ों की तरह बदले जाते रहे हो और अब तक एक दर्जन के करीब नेता सीएम बन चुके हो वैसे अस्थिर राजनीतिक हालात में इस पद पर बने रहना किसी चुनौती से कम नहीं है। एनडी तिवारी जो अभी तक ऐसे एकमात्र मुख्यमंत्री हैं जो अपने पूरे कार्यकाल 5 साल तक मुख्यमंत्री बने रहे हालांकि उन्हें हटाने के प्रयासों में उन्हीं की पार्टी के लोगों ने कोई कमी उठाकर नहीं रखी थी लेकिन उनके राजनीतिक अनुभव के सामने उन्हें सफलता नहीं मिल सकी। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने त्रिवेंद्र सिंह रावत को सीएम पद से हटाकर तीरथ सिंह रावत को यह कुर्सी सौंपी गई लेकिन दो—तीन महीने ही इस पर वह टिक पाए इसके बाद पुष्कर सिंह धामी के नाम लॉटरी खुली और वह सीएम की कुर्सी पर आसीन हो गए। आया राम, गया राम के इस दौर में उनका कार्यकाल चुनाव के नतीजों के साथ ही समाप्त हो गया था क्योंकि पार्टी की जीत के साथ वह खुद चुनाव हार गए थे लेकिन इस बार वैसा कुछ नहीं हुआ जैसे पूर्व सीएम बी.सी. खंडूरी के समय में उनके साथ हुआ था। चुनाव हारने के बाद भी प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने पुष्कर सिंह धामी को ही फिर मुख्यमंत्री बनाने का आदेश दे दिये जाने से वह फिर से मुख्यमंत्री बनने का अवसर पा गए। बीते इन चार सालों में मुख्यमंत्री धामी की जो भी उपलब्धियां रही हो लेकिन उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वह हाई कमान की नजरों में अब नंबर वन नेता जरूर बन चुके हैं। वह भाजपा के स्टार प्रचारकों में शुमार किए जाते हैं तथा हाई कमान के हर आदेश का सर झुका कर सम्मान करने वाले नेता है। यह बात अलग है कि अब तक कई बार इस तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म रह चुका है कि उन्हें बदले जाने की तैयारी चल रही है लेकिन यह कयास बाजी ही साबित हुआ है। सीएम धामी का कहना है कि उनके कार्यकाल में अनेक ऐसे ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं जो पूरे देश के लिए नजीर बने हैं। जैसे यूसीसी लागू किया जाना उन्होंने नकलरोधी तथा हिंसारोधी कानून लाकर तथा धर्मांतरण व सख्त भू कानून लाकर बहुत कुछ काम किया है। वह मानते हैं कि उनके शासनकाल में राज्य लगातार विकास की ओर अग्रसर है। लेकिन इन तमाम उपलब्धियों की सूची के बीच भी भ्रष्टाचार और शासन—प्रशासन से जुड़ी तमाम ऐसी बातें भी हैं जिन्हें लेकर लोगों द्वारा गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। राज्य में सांप्रदायिकता का घुलता जहर भी उनकी देन बताया जाता है। रोजगार के मुद्दे पर युवा उनसे खुश नहीं है लेकिन हाईकमान खुश तो सब खुश। देखना होगा कि क्या इस बार धामी अपना कार्यकाल पूरा कर नया इतिहास बना पाएंगे या फिर इससे पहले ही उनकी यह पाली समाप्त हो जाएगी।




