Home News Posts उत्तराखंड मनमानी फीस वसूली

मनमानी फीस वसूली

0
384


निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूली पर रोक लगाने के लिए अब शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन द्वारा सख्त कदम उठाने का फैसला लिए जाने से अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है। जिला प्रशासन द्वारा गठित की गई जांच समिति की जांच में कई चौंकाने वाले सत्य सामने आए हैं। भले ही सरकार द्वारा इन स्कूलों के लिए फीस स्ट्रेक्चर को लेकर कोई कानून नहीं बनाया गया है लेकिन नियमों के अनुसार इन स्कूलों द्वारा 3 साल में 10 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि नहीं की जानी चाहिए। जबकि समिति की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि लगभग सभी स्कूलों द्वारा बीते 5 सालों में इससे अधिक फीस वृद्धि की गई है बहुत सारे स्कूलों ने इन 5 सालों में 40 फीसदी तक फीस बढ़ाई है। यहंा यह भी उल्लेखनीय है की फीस वृद्धि का यह मामला सिर्फ ट्यूशन फीस बढ़ाये जाने तक ही सीमित नहीं है अभी तो एडमिशन फीस में भी भारी बढ़ोतरी की गई है। एडमिशन फीस में तमाम अलग—अलग मदाें जोड़कर यह वसूली हो रही है। जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर शासन स्तर पर क्या कार्रवाई की जाती है यह अभी तय नहीं है लेकिन तमाम स्तरों पर इन स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग जरूर हो रही है। माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूली की शिकायत करने के लिए टोल फ्री नंबर के साथ—साथ वेबसाइट भी लॉन्च कर दी गई है जिस पर कोई भी अभिभावक इसकी शिकायत कर सकता है। सवाल सिर्फ इन स्कूलों द्वारा वसूल की जाने वाली मनमानी फीस का नहीं है। इन निजी स्कूलों द्वारा शिक्षा का जिस तरह से व्यवसायीकरण किया जा रहा है उसका है। इन निजी स्कूलों द्वारा स्कूलों की किताबों से लेकर ड्रेस तक तथा ट्रांसपोर्ट आदि सभी को अपनी आय के जरिए में शामिल कर लिया गया है। किसी भी स्कूल में किस पब्लिशर की किताबें पढ़ाई जाएगी, किस किताब की दुकान से किताबें और स्कूल की ड्रेस खरीदनी है इस पर भी उनकी मोनोपोली चलती है। अभी बीते दिनों इसकी शिकायत पर गौर करते हुए डीएम दून के निर्देशन पर कुछ पुस्तक विक्रेताओं की दुकानों पर छापेमारी की गई थी। हद तो यह है कि बीते साल की किताबों को सिर्फ उनका कवर बदलकर नये एडिशन की बनाकर बेचा जा रहा है। बच्चों को स्कूल भेजना और उन्हें अच्छी शिक्षा दिलाने की चाहत रखने वाले तमाम लोगों का किस स्तर पर उत्पीड़न और दोहन इन निजी स्कूलों द्वारा किया जाता रहा है। निश्चित तौर पर यह आम आदमी की एक बड़ी समस्या है खास तौर पर उन लोगों को जिनकी आय के सीमित साधन है। उनका अपने बच्चों को पढ़ा पाना अत्यंत मुश्किल हो रहा है। अच्छा होता कि सरकार सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों से बेहतर शिक्षा दिलाने की व्यवस्था कर पाती अगर यह संभव नहीं है तो इन निजी स्कूलों के लिए सरकार फीस का स्टे्रक्चर तय करने वाले नियम व कानून तो बनाने ही चाहिए और उनका पालन न करने वाले स्कूलों की मान्यता समाप्त करने जैसे कठोर कदम उठाने चाहिए जिससे इन स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाई जा सके।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here