लोकसभा चुनाव के बाद दो राज्यों जम्मू—कश्मीर और हरियाणा के विधानसभा चुनावों पर देशवासियों की नजरे लगी हुई है। क्योंकि राजनीति के जानकार यह मानकर चल रहे हैं कि अब इन दो राज्यों के चुनाव परिणाम देश की भावी राजनीति की दिशा और दशा को तय करने जा रहे हैं। पहले यह माना जा रहा था कि इन दो राज्यों के साथ ही महाराष्ट्र और झारखंड के चुनाव भी होंगे लेकिन चुनाव आयोग ने दो राज्यों में एक साथ चुनाव कराने का कार्यक्रम बनाकर सभी को चौंका दिया था। जम्मू कश्मीर जहां 10 साल बाद चुनाव हुए हैं तीसरे चरण और अंतिम चरण का मतदान कल संपन्न हो गया है। जम्मू कश्मीर के विधानसभा चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गए हैं यह वास्तव में एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि आतंकवाद और अलगाववाद प्रभावित इस सीमावर्ती राज्य के आंतरिक हालात कभी सामान्य नहीं रहते हैं। इस चुनाव का शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होना बड़ी राहत की बात होने के साथ—साथ इस मायने में भी एक बड़ी सफलता मानी जा सकती है कि जम्मू कश्मीर के लोगों ने इस चुनाव में बढ़—चढ़कर हिस्सा लिया है। पहले दो चरण के मतदान प्रतिशत से ही इस बात के संकेत मिल चुके थे कि इस बार अच्छा मतदान होगा 57 व 61 फीसदी मतदान के बाद तीसरे चरण के मतदान में रिकार्ड मतदान देखा गया जो 68 फीसदी से भी अधिक बताया जा रहा है अगर औसत मतदान की बात करें तो वह 64—65 फीसदी के बीच रहा है जो कि बदले हुए कश्मीर के लिए एक सुखद संदेश जैसा है। कौन जीतेगा और किसकी सरकार बनेगी यह अब 8 अक्टूबर को मतगणना के बाद ही पता चल सकेगा। हरियाणा में क्याेंकि 5 अक्टूबर को मतदान एक ही चरण में कराया जा रहा है इसलिए 8 अक्टूबर को ही दोनों राज्यों के नतीजे आएंगे जहां तक जम्मू कश्मीर के चुनाव की बात है तो इस चुनाव के परिणाम यह भी बताने वाले हैं कि फरवरी 2019 में केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त करने और राज्य को दो हिस्सों में बांटने का जो फैसला लिया गया उसके बारे में खुद जम्मू कश्मीर की आम आवाम क्या सोचती है। वह सरकार के फैसले से कितनी खुश है या नाखुश है इस सवाल का जवाब भी इन चुनाव परिणामों से मिलने वाला है। जहां तक चुनाव पर किए जाने वाले सर्वे और एग्जिट पोल तथा अनुमानों की बात है तो उस पर अब किसी को भी कोई भरोसा नहीं रह गया है। लोकसभा चुनाव के दौरान जब से यह साबित हुआ है कि यह सब कुछ प्रायोजित ही होता है इसका कोई खास ध्यान नहीं दे रहा है। जम्मू और कश्मीर दोनों ही जिनकी राजनीतिक और भौगोलिक परिस्थितियां भी अलग—अलग हैं कांग्रेस यहां नेशनल कांफ्रेंस के साथ मिलकर चुनाव लड़ी है तो भाजपा और उसकी पूर्व सहयोगी पीडीपी अलग—अलग चुनाव लड़ी हैं। लेकिन चुनाव परिणामों के बाद गठजोड़ों के क्या समीकरण बनेंगे यह किसी को भी पता नहीं है। वही हरियाणा के चुनाव के बारे में जरूर यह लग रहा है कि यहां चुनाव एक तरफा हो सकता है। भाजपा जिसने बीते 10 साल यहां सरकार चलाई उसको सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ रहा है। इन चुनावों के नतीजे 8 अक्टूबर को आने के बाद महाराष्ट्र और झारखंड के चुनाव होने वाले हैं। इन सभी चार राज्यों के नतीजों से देश की भावी राजनीति का रुख स्पष्ट हो सकेगा। कांग्रेस जो केंद्र में एक सशक्त विपक्ष की भूमिका में है तथा भाजपा जो केंद्रीय सत्ता में है किसका विजय रथ आगे निकलने वाला है और किसका पिछड़ने वाला है यह स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल तो जम्मू कश्मीर का शांतिपूर्ण मतदान संपन्न होना ही सबसे बड़े संतोष की बात है



