मौसम की मार

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जून माह में पूरा देश जिस तरह से भीषण गर्मी की मार झेल रहा था और निरंतर चढ़ता पारा रिकॉर्ड तोड़ता जा रहा था तथा हीट वेव से लोग मर रहे थे वह हैरान करने वाला था, लेकिन जुलाई माह शुरू होने के पहले ही प्री मानसूनी बारिश के बाद मानसूनी बारिश अब कहर बनकर टूट रही है व जनजीवन पर भारी पड़ती जा रही है। एक और जहां उत्तराखंड सहित पूरे देश में झमाझम बारिश से तबाही का मंजर बना हुआ है वहीं अब नेपाल में हुई बारिश का पानी बिहार और उत्तर प्रदेश में बड़ी तबाही मचाने को तैयार है। भू वैज्ञानिक और मौसम विशेषज्ञों द्वारा सालों से जिस ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन को लेकर विश्व के सभी राष्ट्रों को अलर्ट किया जा रहा था अब उसके नतीजे रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और अतिवृष्टि के रूप में मुंह बाएं खड़े हैं। हमने आमतौर पर देखा है कि जब भी किसी तरह की प्राकृतिक आपदा का किसी भी देश को सामना करना पड़ता है तो शासन—प्रशासन भी यह कहकर हाथ झाड़ लेता है कि यह तो एक प्राकृतिक आपदा है इसमें कोई क्या कर सकता है भले ही यह एक बड़ी सच्चाई सही, लेकिन क्या इन प्राकृतिक आपदाओं को हम मनुष्यों द्वारा ही अपने कृत्यों से आमंत्रित नहीं किया जाता? हम अगर बात उत्तराखंड और हिमाचल जैसे हिमालयी राज्यों की करें जहां हर साल 2 साल के अंतराल पर अब हमें बड़ी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है तो क्या हम इस बात को नकार सकते हैं कि इन राज्यों में होने वाला अनियोजित विकास इसके लिए जिम्मेदार नहीं है? बीते साल हिमाचल में मानसूनी आपदा के कारण जो भारी नुकसान हुआ था उसकी भरपाई अभी तक नहीं हो सकी है। बीते साल उत्तराखंड में मानसून काल में जो सड़के पुल व पुलिया टूट गए थे वह अभी तक नहीं बन सके हैं। मालन नदी पर कोटद्वार में बना पुल इसका उदाहरण है यहंा जो वैकल्पिक पुल बनाया गया था वह भी अब टूट गया है जिससे भाबर घाटी का संपर्क टूट गया है। बीते साल नैनीताल के जिस जिस क्षेत्र में भूस्खलन से कुछ मकान ढह गए थे उनका ट्रीटमेंट न हो पाने के कारण आज 40 परिवारों को अपने घर छोड़ने पर विवश होना पड़ा है। अभी तो मानसून की शुरुआत ही है। अल्मोड़ा—रामनगर को जोड़ने वाला पुल पानी की भेंट चढ़ चुका है। पिथौरागढ़ में बनी 9 झीलों सहित 13 ऐसी झीले बन चुकी है जो बड़े खतरे की घंटी है। राज्य की 200 से अधिक सड़कों पर भूस्खलन के कारण आवाजाही ठप हो चुकी है। स्कूल—कॉलेज बंद है चारधाम यात्रा को भी फिलहाल रोक दिया गया है। लोगों को सलाह दी जा रही है कि जहां है वहीं रहे ऋषिकेश से ऊपर तो कदाचित भी न जाए। राज्य के 9 जिलों में अभी भी भारी बारिश होने की संभावना है। पहाड़ दरक रहे हैं, लोग मर रहे हैं। जनजीवन अस्त—व्यस्त है और आदमी इसके बीच लाचार व मजबूर है।

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