आग का गोला बनी धरती

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भले ही विश्व भर के पर्यावरण विशेषज्ञ लंबे समय से ग्लोबल वार्मिंग को लेकर सभी को सतर्क करते रहे हो और इसके विनाशकारी परिणामों को लेकर चिंता जताते रहे हो लेकिन उनकी आवाज को अनसुना करना अब मानवीय जीवन पर ही नहीं तमाम जीव—जंतुओं के अस्तित्व का भी सवाल बन चुका है। धरती का तापमान जिस तेजी से बढ़ रहा है अगर उस पर प्रभावी ढंग से अंकुश नहीं लगाया जा सका तो आने वाले कुछ ही सालों में यह विश्व की सबसे बड़ी समस्या बन जाएगा। बात अगर अपने देश की की जाए तो देश के कई हिस्सों में मई और जून के महीनो में तापमान ने तमाम पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए लंबी छलांग लगाई है। कई राज्यों में इस दौरान पारा 48 से 50 डिग्री सेल्सियस के इर्द—गिर्द घूमता दिखाई दे रहा है। यूपी में लंबे समय से पारा 48 के आस—पास है उत्तर प्रदेश में हीट वेव के कारण अब तक 150 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है अकेले बुंदेलखंड में 90 से अधिक लोग मर चुके हैं। देश का कोई भी हिस्सा इस बार भीषण गर्मी और लू की जद से बाहर नहीं है। मैदानों से सुकून की तलाश में पहाड़ों का रुख करने वाले लोग इस बार पहाड़ों का तापमान देखकर दंग है। उत्तराखंड की राजधानी दून का ऑल टाइम रिकॉर्ड 31 मई को टूट चुका है जब पारा 43.30 सेल्सियस के पार चला गया। बीते 5 दिनों से राजधानी दून में तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है तथा 42 से 43 डिग्री के बीच बना हुआ है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दो—चार दिनों में अगर यह पारा 44 तक पहुंच जाता है तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। दिन में तेज धूप और तेज गर्म हवाओं के थपेड़ों के कारण लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। खास बात यह है कि पूर्व समय में रात के तापमान में भारी कमी देखी जाती थी लेकिन इस साल रात का तापमान भी 28—29 सेल्सियस से नीचे नहीं आ रहा है पहाड़ के लोगों ने शायद इससे पूर्व मौसम का यह मिजाज कभी नहीं देखा था। पर्यावरण के विनाश की कीमत पर किए जाने वाले विकास को लोग भले ही अब कोस रहे हो लेकिन इन कोसने वालों को अब पीने के लिए पानी भी नसीब नहीं हो पा रहा है। राज्य के प्राकृतिक जल स्रोत सूखते जा रहे हैं अब तक 277 से अधिक जल स्रोतों के सूखने से पूरे प्रदेश में पेयजल संकट खड़ा हो गया है। बात अगर दून की करें तो यहां का सबसे प्रमुख जल स्रोत शिखर फॉल भी सूखने जा रहा है। दून में 92 और अल्मोड़ा के 72 जल स्रोतों सहित तमाम जल स्रोतों के सूखने से लोगों में हाहाकार मचा हुआ है। उत्तरकाशी के लोग पेयजल के लिए सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। दून में टैंकरों से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। एक तरफ भीषण गर्मी की मार और दूसरी तरफ पीने के लिए पानी की किल्लत और बाकी रही सही कमी को बिजली की कटौती पूरा कर रही है। पहाड़ से मैदान तक इस भीषण गर्मी के कारण हाहाकार मचा हुआ है। जहां मानसून के आने की बात है तो मध्य जून तक पहुंचने वाला मानसून भी इस बार जून के अंत तक ही आने की बात कही जा रही है।

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