यात्रियों की मौत चिंता का विषय

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चारधाम यात्रा के दौरान होने वाली श्रद्धालुओं की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते कल भी केदारनाथ धाम में चार और गंगोत्री धाम में तीन यात्रियों की मौत हो गई, सरकारी आंकड़ों के हिसाब से स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण अब तक 70 लोगों की मौत होने की बात कही जा रही है जबकि गैर सरकारी आंकड़ों के हिसाब से यह संख्या कुछ ज्यादा भी हो सकती है। यात्रा के प्रारंभिक दौर में जब 23 यात्रियों की मौत का समाचार प्रकाश में आया था तब प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा इस पर खुद संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया गया था। तब इन मौतों को चारधाम यात्रा के कुप्रबंधन से जोड़कर देखा जा रहा था। यही कारण था कि प्रधानमंत्री कार्यालय से की गई पूछताछ के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री द्वारा इस पर कई तरह की सफाईयां पेश की गई थी सीएम ने यह कहकर इन मौतों से पल्ला झाड़ लिया था कि चार धाम में भगदड़ से कोई मौत नहीं हुई है वहीं स्वास्थ्य महानिदेशक ने अस्पताल में किसी चारधाम यात्री की मौत न होने की बात कही गई थी। शासन—प्रशासन में सर्वाेच्च पदों पर बैठे लोगों के इस तरह के बयान उनकी संवेदनहीनता को ही दिखाते हैं। एक तरफ उनके द्वारा यात्रियों के जानमाल की सुरक्षा की गारंटी दी जाती है वहीं दूसरी ओर इस तरह के बयान दिए जाते हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि अगर केंद्र सरकार ने इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान न लिया होता, एनडीआरएफ तथा आइटीबीपी की तैनाती न की गई होती तो राज्य का शासन प्रशासन भी चौकन्ना न हुआ होता। स्वास्थ्य विभाग द्वारा यात्रा शुरू होने के एक सप्ताह बाद स्वास्थ्य गाइडलाइन जारी की गई और जब मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है तो 50 वर्ष से अधिक आयु वाले सभी यात्रियों के लिए अनिवार्य रूप से मेडिकल चेकअप की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य बिगड़ने पर अब लोगों को हैली सेवाओं और एयर एंबुलेंस भी मुहैया कराई जा रही है। वही चार धाम यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जा रहा है। अब तक सबसे अधिक मौतें केदारधाम में हुई हैं यहां अब तक 34 लोगों की जान जा चुकी है जो कुल मौतों की संख्या के लगभग आधा है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि धामों का मौसम एकदम अलग है देश के मैदानी क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों को ऑक्सीजन की कमी और हाड कंपा देने वाली सर्दी को सहन करना मुश्किल हो जाता है ऐसे में अगर कोई व्यक्ति पहले से ही दमा या अन्य किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हो तो उसकी मुश्किलें तो स्वाभाविक तौर पर बढ़ जाती है। मुख्यमंत्री धामी ने अब ऐसे व्यक्तियों से जो कमजोर हैं तथा किसी अन्य बीमारी से ग्रसित है यात्रा पर न आने की अपील की है। चार धाम यात्रा पर आने वाले हर यात्री का स्वास्थ्य परीक्षण संभव नहीं है। ऐसे में यात्रियों की अपनी कुछ जिम्मेदारियां है कि वह अपने स्वास्थ्य का खुद भी ख्याल रखें। क्योंकि जान है तभी जहान भी है।

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