कोरोना बनाम इन्फ्लूएंजा—ए

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कोरोना काल की उन त्रासद यादों को देश के लोग भुलाए भी नहीं भूल सकते हैं जो उन्होंने लॉकडाउन के दौर में देखी व सहन की। भले ही अब भारत सहित तमाम विश्व राष्ट्र इस आपदा काल से उबर चुके हो लेकिन कोरोना की प्रतिछाया का साया आज भी उनका पीछा नहीं छोड़ रहा है। इन्फ्लूएंजा—ए यानि एच3एंन2 जिसे कोरोना का ही एक रूप माना जा रहा है अब भारत में तेजी से अपने पैर पसार रहा है। डॉक्टर गुलेरिया के अनुसार भले ही एच3एन2 मौतों के मामले में कोरोना से घातक न सही लेकिन इसमें मरीज में वही सब लक्षण दिखाई देते हैं जो कोरोना के तमाम वैरीयंट में देखे गए थे। देश में अब तक एच3एन2 के 3 हजार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। तथा 2 लोगों की इससे मौत की पुष्टि भी सरकारी आंकड़ों में की जा चुकी है। बीते कल उत्तराखंड में भी 2 मरीजों मैं एच3एन2 वायरस की पुष्टि हो चुकी है। यही नहीं बीते एक दिन में अकेले राजधानी दून में दून व कोरोनेशन अस्पताल में 37 ऐसे मरीजों को भर्ती किया गया है जिनमें एच3एन2 जैसे ही लक्षण पाए गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस वायरस के इस लक्षणों में मरीज को सर्दी—जुखाम, बुखार जैसे ही सामान्य लक्षण होते हैं। सांस फूलना या सांस लेने में दिक्कत होना, सीने में दर्द, चक्कर आना, बुखार, गले में खराश और घबराहट होना। डॉक्टरों का कहना है कि इस वायरस का सीधा अटैक आदमी के फेफड़ों पर होता है। एक अन्य खास बात यह है कि जिन लोगों को पहले कोरोना हुआ है उन पर यह वायरस अधिक प्रभावी हो रहा है क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले ही कमजोर हो चुकी है। जहां तक इससे बचाव के उपायों के बारे में डाक्टरों द्वारा बताया जा रहा है वह भी कोरोना से कुछ अलग नहीं है क्योंकि एच3एन2 एक संक्रामक बीमारी है जो कोरोना से भी तेज गति से फैल रही है इसलिए भी भीड़ भाड़ वाली जगह से दूर रहने, मास्क पहनने, हाथ धोने और सैनिटाइजर का प्रयोग करने की सलाह डॉक्टरों द्वारा दी जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि हाथ मिलाने तथा एंटीबाइटिक दवा लेने से बचें तथा अधिक से अधिक तरल पदार्थों का उपयोग करें। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा न ले तथा खुद हकीम न बने। एक तरह से यह माना जा सकता है कि एच3एच2 एक मिनी कोरोना ही है। कोरोना की पहली लहर में सख्त पाबंदियों के कारण भारत में इसका प्रभाव बहुत कम रहा है लेकिन पहली लहर के बाद जब पाबंदियों में थोड़ी सी ढील दी गई थी तो हमने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान भारी कोहराम की स्थिति देखी थी। सड़कों पर और अस्पतालों के बाहर दम तोड़ते लोगों को हमने देखा और श्मशान घाटों के बाहर लंबी कतारें और सैकड़ों एक साथ धधकती चिताओं के मंजर भी हमने देखे। निश्चित ही कोई भी नहीं चाहता कि ऐसी कोई स्थिति दोबारा से देखने को मिले। भले ही अभी एच3एन2 से मौतें कम होने की बात कही जा रही हो लेकिन कोरोना के साइड इफेक्ट किसी न किसी रूप में आज भी आम आदमी के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहे हैं इसलिए इस बात की जरूरत है कि इस एच3एन2 से सतर्क रहें और अपनी सेहत को लेकर कोई लापरवाही न बरतें।

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