पूर्व विधायकों की अंताक्षरी

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बीते कुछ समय से राज्य के तमाम पूर्व विधायक संगठित होकर एक मंच पर आने के प्रयासों में जुटे हैं। इन पूर्व विधायकों द्वारा जो संगठन बनाया गया है जब उसके उद्देश्यों की बात होती है तो वह कहते हैं कि राज्य के लोगों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने और जनहित के मुद्दों पर एकजुट होकर संघर्ष करने का तर्क उनके द्वारा दिया जाता है। साथ ही उनका यह भी कहना है कि उनके अनुभवों का लाभ सरकार और जनता को मिल सके तथा सरकार और जनता के बीच समन्वय बनाने का प्रयास भी उनका यह संगठन दलगत राजनीति से ऊपर उठकर करेंगे। यह संगठन क्या करेगा? यह तो समय ही बताएगा लेकिन अभी ऐसा लगता है कि इन पूर्व विधायकों को अपनी अतृप्त राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं ने संगठित होने के लिए प्रेरित किया है। सक्रिय राजनीति में रहते हुए वह जो करना चाहते थे नहीं कर सके और नहीं कर पाए उसे अब वह निष्क्रिय राजनीति में आकर करना चाहते हैं। इन पूर्व विधायकों को अपने दिल पर हाथ रख कर खुद से यह जरूर पूछना चाहिए कि उन्होंने विधायक रहते हुए कितने जनहित के कार्य किए और कितने निजी हित के? इनमें से कुछ पूर्व विधायक ऐसे भी हो सकते हैं कि वह वास्तव में अपने बचे कुचे जीवन को समाज के लिए समर्पित करने की इच्छा रखते हो लेकिन अब जब यह नेता अपनी स्वयं की सेवा करने में भी असमर्थ हैं तब फिर वह समाज की क्या सेवा करेंगे। आपने यह जरूर सुना होगा कि ट्टसमय बिताने के लिए करना है कुछ काम, शुरु करो अंताक्षरी लेकर प्रभु का नाम’। पूर्व विधायकों के इस संगठन के बारे में यही कहा जा सकता है कि वह अपना समय व्यतीत करने के लिए अंताक्षरी खेल रहे हैं इन पूर्व विधायकों के संगठन का नेतृत्व वयोवृद्ध पूर्व विधायक लाखीराम जोशी कर रहे हैं। तथा उनके इस संगठन में जहां एक दो बार बाय लक विधायक बनने वाले नेता शामिल है तो कई नेता कई कई बार विधायक बनने के साथ कई कई बार मंत्री भी रह चुके हैं पूर्व विधायकों के इस संगठन को लेकर इससे जुड़े नेता क्या कहते हैं अलग बात है लेकिन ऐसे भी कुछ पूर्व विधायक हैं जो इस संगठन के उद्देश्यों को ही ठीक नहीं मानते हैं और अपना पल्ला झाड़ कर अलग हो गए हैं। किच्छा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ऐसे विधायकों में से एक हैं उनका साफ कहना है कि इस संगठन का उद्देश्य सरकार की कमियां ढूंढना है और उसकी आलोचना करना है। उधर हरीश रावत जैसे पुराने नेता इस संगठन के गठन के प्रयास की सराहना कर रहे हैं खास बात यह है कि जो इस संगठन का है वह बड़े दिग्गज नेताओं में शुमार रहे हैं जो आज के दिग्गज नेताओं में शुमार हैं वह भी आने वाले समय में पूर्व नेताओं में शुमार होंगे लेकिन जो आज का वर्तमान है उन्हे चाहिए कि अपने विधायक या मंत्री रहते ही कुछ जनहित के काम कर ले और उन्हें पूर्व विधायक बनने के बाद किसी संगठन को खड़ा करने और जन सेवा करने की जरूरत न पड़े।

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