बदलती मतदान व्यवस्था

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जिन देशों में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था है उन तमाम देशों में मतदान की निष्पक्षता और मतदान का प्रतिशत दो अत्यधिक महत्व के कारक हैं। भारत विश्व का सबसे पुराना और बड़ा गणतांत्रिक देश है। लेकिन आजादी के 75 साल बाद भी देश की निर्वाचन प्रणाली में सुधारों की प्रक्रिया अनवरत रूप से जारी है इसका सीधा मतलब है कि अभी तक हम इस निर्वाचन प्रणाली को 100 प्रतिशत शुद्ध नहीं बना सके हैं तथा अभी भी इस प्रणाली में कुछ न कुछ छेद बाकी हैं जिनके जरिए चुनाव में धांधली की गुंजाइश बनी रहती हैं, जिन्हें रोकना जरूरी है। वही दूसरा कारण है मतदान का कम प्रतिशत जो अभी भी औसतन 50—60 फीसदी पर ही अटका है। हम और आप दशकों से यह सुनते चले आ रहे हैं कि सिर्फ आधी आबादी ही सरकारों का चयन करती है। हमें और आपको 75 साल में भी अपने वोट की कीमत की अहमियत नहीं समझ आ सकी है जो एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। आमतौर पर लोग अभी भी यह सोचकर मतदान करने नहीं जाती कि हमारे एक वोट से क्या फर्क पड़ने वाला है? कई बार यह सोच लिया जाता है कि कौन अपना समय बर्बाद करें और लाइनों में जाकर खड़ा हो। वही बहुत सारे लोग जो अपनी नौकरी या व्यवसाय के कारण अपने मतदेय स्थलों से बहुत दूर होते हैं जिसके कारण वह अपना वोट कास्ट नहीं कर पाते हैं। लेकिन यह सच है कि मतदान का प्रतिशत अच्छी सरकार और अच्छे जनप्रतिनिधि चयन में सबसे बड़ी बाधा है। सरकार द्वारा मतदान प्रतिशत को बढ़ाने के लिए अब एक और नया प्रयोग किया जा रहा है वह है रिमोट इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का प्रयोग। जिसके जरिए मतदाता जहां है वहीं से अपना वोट कास्ट कर सकते हैं इसका मतलब यह कतई भी नहीं है कि अब हर मतदाता घर बैठ कर अपना वोट डाल सकेगा। मतदेय स्थल तक तो उसे जाना ही पड़ेगा लेकिन मतदेय स्थल पर मौजूद रिमोट वाली वोटिंग मशीन के जरिए वह अपने गृह क्षेत्र में अपनी पसंद वाले प्रत्याशी और पार्टी उम्मीदवार को वोट दे सकेगा। इसे डाक मतपत्र का एक विकल्प भी आप मान सकते हैं। जिसके व्यवहारिक प्रयोग में कई तरह की दिक्कतें थी और इसकी प्रक्रिया भी बहुत लंबी थी। एक समय था जब मतदान वैलेट पेपर के जरिए होता है था लेकिन अब इसकी जगह ईवीएम ने ले ली है। जब ईवीएम का प्रयोग शुरू हुआ तो इस पर भी कई तरह के सवाल उठे और अभी भी उठते रहते हैं लेकिन ईवीएम से मतदान बैलेट पेपर की तुलना में न सिर्फ सुविधाजनक है बल्कि कम खर्चीला और ज्यादा सुरक्षित है। चुनाव आयोग द्वारा अब राजनीतिक दलों से इस नए रिमोट ईवीएम के प्रयोग पर सुझाव मांगे गए हैं। देखना होगा कि यह प्रयोग कितना सफल रहता है और मतदान प्रतिशत बढ़ाने में इसकी भूमिका क्या रहती है? जहां तक सुधार की बात है तो यह एक सतत प्रक्रिया है जो सदियों से जारी है। लेकिन एक मजबूत लोकतंत्र के लिए चुनाव प्रक्रिया जितनी पारदर्शी और आसान होगी तथा मतदान का प्रतिशत जितना अधिक होगा उतना ही अधिक बेहतर है।

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