जागरूकता से रुकेगा धर्मांतरण

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नैनीताल जनपद के रामनगर में एक मुस्लिम युवक द्वारा अपना नाम बदलकर एक हिंदू लड़की को अपने प्रेम जाल में फंसाने और उसके साथ दुष्कर्म करने तथा शादी के लिए धर्म परिवर्तन कराने का जो मामला प्रकाश में आया है उसे पुलिस अधिकारियों द्वारा कुमाऊं मंडल का पहला ऐसा मामला बताया जा रहा है जो उत्तराखंड धार्मिक अधिनियम 2018 के तहत दर्ज किया गया है। अभी बीते दिनों उत्तराखंड की सरकार द्वारा नए धर्मांतरण कानून पर कवायद की जा रही थी तब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा एक बयान दिया गया जिसमें उन्होंने प्रदेश में बड़ी बहुतायत में तरह—तरह से धर्मांतरण की बात कही थी। जिसे लेकर कई लोगों ने सवाल उठाए थे और कहा था कि हमें तो ऐसा कुछ नहीं दिखता है। लेकिन यह एक सच है कि जब तक हम किसी चीज को देखना ही नहीं चाहते तो वह हमें दिख भी नहीं सकती है। इसका उदाहरण यह रामनगर की घटना है, ऐसा नहीं है कि कुमाऊं मंडल की यह पहली घटना हो हां यह हो सकता है कि इससे पूर्व इस तरह की किसी घटना को गंभीरता से लिया ही न गया हो। अभी दो दिन पूर्व राजधानी दून में एक हिंदू ब्राह्मण के घर दरगाह का जो मामला आया है वह क्या है? इस तरह की घटनाओं के पीछे उनके उद्देश्यों का पता लगवाना आसान काम नहीं होता है। बीते कुछ दिनों पूर्व राज्य के एक पूर्व राज्यसभा सांसद द्वारा उत्तराखंड की सरकारी और वन भूमि पर बड़ी संख्या में दरगाह के बनाए जाने का मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया गया था। पता चला कि देहरादून और उसके आसपास के क्षेत्रों में ही बड़ी संख्या में दरगाह बनाई जा चुकी हैं। धार्मिक स्थलों का मामला संवेदनशील माना जाता है इसलिए इसके साथ छेड़छाड़ भी आसान काम नहीं होता है। सरकार ने अभी जो धर्मांतरण कानून बनाया है उसमें भले ही 10 साल की सजा का प्रावधान कर पुराने कानून में और भी कई परिवर्तन किए गए हैं। लेकिन अभी भी इसमें और भी संसोधन किए जाने चाहिए जिन पर विचार विमर्श जारी है। रामनगर में अभी जो घटना प्रकाश में आई है उस मामले में पुलिस द्वारा पुराने कानून के हिसाब से ही केस दर्ज किया गया है क्योंकि नया कानून अभी भी प्रभावी नहीं है। राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद ही यह प्रस्ताव कानून का रूप ले सकेगा। खैर कुल मिलाकर इस तरह से इनकार नहीं किया जा सकता है कि जबरन धर्मांतरण और लव जिहाद की जिन घटनाओं की चर्चा आजकल देशभर में हो रही है उससे उत्तराखंड भी अछूता नहीं है। जिस साकिब सैफी नाम के युवक ने शिव ठाकुर नाम बदलकर उससे दोस्ती की और उसका शारीरिक शोषण किया उसका उद्देश्य किसी भी सूरत में सही नहीं हो सकता है। धोखा देकर या दबाव और लालच देकर अगर कोई किसी का धर्मांतरण करने का प्रयास करता है तो वह अपराध ही है। एक अन्य सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या हिंदुओं के बच्चों को इसे लेकर सतर्क होने की जरूरत नहीं है। जो अपनी स्मार्टनेस आधुनिक सोच के आगे अपनी सामाजिक व्यवस्था व परिवार और रीति—रिवाज, धर्म और संस्कृति पर कुछ सोचने को ही तैयार नहीं होते। इस समस्या का समाधान सिर्फ सख्त कानून नहीं, सामाजिक जागरूकता के बिना संभव नहीं है।

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