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अंकिता हत्याकांड से दहला उत्तराखंड

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अंकिता हत्याकांड ने उत्तराखंड वासियों के जहन को झकझोर कर रख दिया है। अंकिता जैसी हजारों लड़कियां हैं जो अपने गरीब मां—बाप की मदद के लिए घर से बाहर काम करने जाती हैं। इस घटना ने न सिर्फ उन सभी को चिंता में डाल दिया बल्कि उस देव भूमि की संस्कृति को भी कलंकित कर दिया जिसमें नारी सम्मान और सुरक्षा की बात कही जाती है। इस घटना का सबसे दुखद पहलू यह है कि इसमें पुलिस प्रशासन की भूमिका अत्यंत ही निंदनीय ही। क्योंकि आरोपी पक्ष सत्ताधारी पार्टी भाजपा के नेता से जुड़ा है इसलिए 18 सितंबर को हुई इस घटना पर 22 सितंबर (4 दिन) तक कोई संज्ञान नहीं लिया गया और पीड़ित पक्ष की बात को पुलिस प्रशासन द्वारा नहीं सुना गया इस मामले ने जब सोशल मीडिया पर तूल पकड़ा और बात शासन तक पहुंची तब कहीं पुलिस महकमे की नींद टूटी। इस मामले में बीते कल से जो चुस्ती फुर्ती शासन—प्रशासन ने दिखाई है काश वह 5 दिन पहले दिखाई गई होती। भाजपा नेता के पुत्र सहित तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है वहीं चीला नहर से अंकिता का शव भी बरामद कर लिया गया है। कहा जा रहा है कि आरोपियों ने हत्या की बात भी कबूल कर ली है। अंकिता के साथ क्या—क्या हुआ क्यों हुआ इसका सच अब उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आरोपियों से पूछताछ में सब सामने आ ही जाएगा, लेकिन भाजपा नेता का आरोपी बेटा पुलकित आर्य और सह आरोपी उसके रिजार्ट की दो मैनेजरों द्वारा अंकिता पर गेस्टों को खुश करने के लिए शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालने और इसे लेकर की गई हत्या की बात पूरा सच नहीं है। देखना होगा कि राजस्व पुलिस से शुरू हुआ यह मामला अब जब एसआईटी जांच तक जा पहुंचा है तो पुलिस और एसआईटी इसकी सच्चाई तक कितना पहुंच पाती है लेकिन सीधे—सीधे यह भाजपा के बिगड़ैल बेटे की चंगुल में फंसी एक गरीब लड़की के शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न की है जिसकी कीमत अंकिता को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। निश्चित ही कुछ न कुछ गलतियां अंकिता से भी हुई होंगी अगर उसे इस बात का पता चल गया था कि वह किसी गलत जगह फंस गई तो उसे यह नौकरी बहुत पहले छोड़ देनी चाहिए थी। क्योंकि एक दिन में और एकाएक बात इतनी आगे नहीं जा सकती है। सीएम धामी के आदेश पर आरोपी के रिजार्ट पर बुलडोजर चलवा दिया गया है। काश सीएम धामी ने राज्य गठन के बाद बने तमाम अवैध रिजार्ट की जांच और उन पर बुलडोजर चलाने की कार्यवाही करने का काम पहले कर दिया होता। राज्य में ऐसे तमाम रिजार्ट है जो अनैतिक गतिविधियों के अड्डे बने हुए हैं। लेकिन दुर्भाग्य की बात है शासन—प्रशासन की किसी ऐसी जगह पर नजर उससे पहले नहीं जाती जब तक वहां इतना बड़ा कुछ नहीं हो जाता जैसा वंनतरा रिजार्ट में हुआ ह

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