खतरा अभी भी बरकरार

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भले ही हम यह माने बैठे हो कि कोरोना खत्म हो चुका है और विशेषज्ञ डॉक्टर भी कोरोना की चौथी लहर की संभावनाओं से इंकार कर रहे हो लेकिन कोरोना केसों की संख्या में हो रही अप्रत्याशित वृद्धि न सिर्फ खतरे की घंटी है बल्कि इस बात का संकेत है कि हमारी लापरवाही फिर हम पर भारी पड़ सकती है। बीते दो दिनों में कोरोना के नए मामलों की संख्या एक दिन में 1150 से बढ़कर 22 सौ के करीब हो जाना यह बताता है कि स्थिति फिर विस्फोटक हो सकती है। देश के उत्तर प्रदेश, दिल्ली और केरल तथा हरियाणा सहित 16 राज्यों में संक्रमण की दर तेजी से बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लखनऊ और नोएडा सहित सात जिलों में एक बार फिर कोविड गाइडलाइन जारी करते हुए मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। दिल्ली जो हमेशा ही कोरोना संक्रमण का केंद्र रही है, में कोविड—19 के मामलों में भारी उछाल आया है नोएडा और गाजियाबाद के कुछ स्कूलों में बड़ी संख्या में छात्र—छात्राओं में कोविड—19 पुष्टि होने से हड़कंप मचा हुआ है। एक माह बाद फिर से कोरोना संक्रमण के गति पकड़ने के पीछे लोगों की लापरवाहियों को ही अहम माना जा रहा है। अभी जब पांच राज्यों के चुनाव चल रहे थे और कोरोना के कारण लगाई गई सभी पाबंदियों को हटा दिया गया था। लोगों ने मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग को भुला दिया था। चुनावी कार्यक्रमों में भारी भीड़ देखी गई थी। दो साल बाद मिली पाबंदियों से मुक्ति के बाद लोग इस कदर लापरवाह हो गए थे कि उन्हें भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने पर भी कोई डर भय नहीं रह गया था सार्वजनिक स्थानों व समारोह में भारी भीड़ जुट रही थी जिसका नतीजा अब सामने आने लगा है। भले ही यह कहा जा रहा है कि अब कोरोना कमजोर पड़ चुका है। या लोगों को अब कोरोना के साथ जीने की आदत पड़ चुकी है लेकिन देश वासियों ने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जो दुख दर्द सहा है उसकी यादें इतनी डरावनी है कि कोई भी नहीं चाहेगा कि एक बार फिर वैसी स्थिति से देश को दो—चार होना पड़े लेकिन सच को झुठलाया भी नहीं जा सकता है। देश ही नहीं विश्व के कई राष्ट्रों में कोरोना के कारण अभी लोग पाबंदियों की मार झेल रहे हैं। चीन के शंघाई शहर में अभी भी कर्फ्यू लगा हुआ है। कोरोना से बचाव के लिए जो वैक्सीनेशन ड्राइव चलाया गया है उसकी रफ्तार भी अब धीमी पड़ती जा रही है। लोगों को यह समझ नहीं आ रहा है कि हर ६ महीने में वैक्सीन लगवाने का क्या तुक है? सच यही है कि यह वैक्सीन सिर्फ एक इम्यूनिटी बूस्टर डोज है जो शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाता है इससे कोरोना का रोका नहीं जा सकता है। कोरोना से बचाव का सबसे बेहतर तरीका या दवा सतर्कता ही है। इसलिए मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग की व्यवस्था को बनाए रखना जरूरी है। तभी संभावी खतरे से निपटा जा सकता है।

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