हम जिस देश, धर्म व समाज में रहते हैं, उसके उत्कृष्ट के लिए अपनी सम्पूर्ण कार्य क्षमता बौद्धिक कौशल और वैचारिकता के साथ अपना कर्म करते हैं। इस कुरुक्षेत्र में हर व्यक्ति को अपना कर्मक्षेत्र चुनने का जन्मसिद्ध और संवैधानिक अधिकार है। जब 1991 में पत्रकारिता के कुरुक्षेत्र में ‘सांध्य दैनिक, दून वैली मेल’ ने जन्म लिया था तब यह कल्पना भी नहीं की थी कि यह सफर इतनी गम्भीर चुनौतियों के बीच पूरा हो सकेगा, वह भी इतनी सफलतापूर्ण और लोकप्रियता के साथ। पत्रकारिता यूं तो हर देशकाल में गम्भीर चुनौतियों भरा रहा है क्योंकि समाज को पत्रकारिता से हमेशा ही हर बुराई से लड़ने और उसे परास्त करने की अपेक्षाएं रही हैं। लेकिन जब हमारा सामाजिक और राष्ट्रीय परिवेश तेजी से बदल रहा है और मान्यताएं ढह रही हैं, रिश्ते सिसक रहे हैं, परिवार दरक रहे हैं, नैतिकता व मानवीय संवेदनाओं का स्तर न्यूनता की ओर बढ़ रहा है, पत्रकारिता की जिम्मेदारियां और भी अधिक बढ़ गयी हैं। आज के दौर में न तो अखबार निकालना आसान चुनौती है और न अखबार को दीर्घकाल तक चलाते रहना। पत्रकारिता के परिपेक्ष्य में हम जिन मानक और मूल्यों की बात करते हैं उन्हें खुद अपने यर्थाथ जीवन में उतार कर ही हम दूसरों को नसीहत दे सकते हैं।
आज जब देश और समाज के हर क्षेत्र में भय—भ्रष्टाचार व बेईमानी का बोलबाला है। सच कहना और सच स्वीकार करना दोनों अत्यन्त जोखिम भरे काम हो गये हैं। पत्रकारिता के समक्ष भी अपने मूल्यों को बचाने की चुनौती भी उतनी ही गम्भीर हो गयी है। शासन सत्ता और प्रशासन की चटुकारिता न करने वालों को दंडित करने की बढ़ती प्रवृत्ति ने पत्रकारिता के मूल्यों को भारी नुकसान पहुंचाया है। लेकिन तमाम तरह के दबाव और चुनौतियों के बीच ‘सांध्य दैनिक, दून वैली मेल, को 33 सालों के अपने स्वर्णिम सफर पर गर्व है। हम इन 33 सालों में न झुके, न रुके, न दबे, न चुनौतियों के सामने हमने कभी घुटने टेके। समय की जरूरत और मांग के मद्देनजर ‘दून वैली मेल’ अब एक कदम और बढ़ाते हुए फेसबुक पेज ‘दून वैली मेल’ के द्वारा अपने सुधि पाठकों को उत्तराखण्ड, देश—विदेश की पल—पल की खबरों से अवगत करा रहा है। सांध्य दैनिक ‘दून वैली मेल’ अपने उन सभी पाठकों का आभारी है जिनके सहयोग ने हमें चलते रहने का हौंसला दिया। हम उन्हें आश्वास्त करते हैं कि उनके सहयोग तक हमारा यह सफर जारी रहेगा।
हमें यह बताते हुए इस बात का गर्व अनुभव हो रहा है कि देहरादन से प्रकाशित होने वाला हिन्दी सांध्य दैनिक ‘दून वैली मेल’ अपने सतत संघर्ष के 33 साल का सफर आज पूरा कर चुका है। ‘दून वैली मेल’ की 34वीं साल गिरह पर हम अपने सभी सुधी पाठकों, विज्ञापन दाताओं और शुभचिन्तकों का विनम्र आभार व्यक्त करते है जो इतने सालों के सफर में हमारे सहयोगी रहे और रहेगें। जिनके साथ और सहयोग ने हमारे इस सफर को आसान बनाया। भले ही हमें यह लगता हो कि यह 33 साल कब और किन परिस्थितियों में गुजर गये लेकिन वास्तव में यह सफर उतना भी आसान नहीं था जितना दिखायी पड़ता है। अनेकों उतार चढ़ाव इस दौर में देखे गये। मीडिया जिसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है उस स्तंभ का सबसे अधिक सशक्त और मजबूत बने रहना जरूरी है। क्योंकि अभिव्यक्ति की आजादी के बिना कोई भी व्यवस्था आम नागरिक के अधिकारों की सुरक्षा नहीं कर सकती है। मीडिया जब तक अपने उत्तरादायित्व को ईमानदारी से निभाता रहेगा। देश का समाज, लोकतंत्र व शासन—प्रशासन उतना ही मजबूती से खड़ा रहेगा। सांध्य दैनिक ‘दून वैली मेल’ आपको एक बार फिर भरोसा दिलाता है हमारा सफर अविराम जारी रहेगा। बस आपके अपेक्षित सहयोग का साथ हमें मिलता रहे।
— संपादक




