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पलायन बड़ी समस्या

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राज्य से हो रहे लगातार पलायन को रोक पाने में सरकार असफल साबित हो रही है। जबकि राज्य सरकार द्वारा इसको रोकने के लिए पलायन आयोग का भी गठन कर रखा है लेकिन फिर भी राज्य से पलायन थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य से होने वाले पलायन के कारण गांव के गांव खाली हो चुके है जबकि सीमावर्ती प्रदेश होने के कारण सुरक्षा के दृष्टीकोण से यह एक गम्भीर विषय है। बात अगर राज्य से पलायन होने की की जाये तो इसके पीछे कई अहम कारण छिपे हुए है। जिन पर आज तक की सरकारों द्वारा जानते समझते हुए भी कोई गौर नहीं किया जाता रहा है। राज्य के पहाड़ी जनपदों में शिक्षाए स्वास्थ्यए रोजगार का तो अभाव है ही साथ ही हर साल आने वाली आपदा का कहर भी इसके प्रमुख कारणों में से एक है जिसके कारण लोगों को जान माल का बहुतायत नुकसान झेलना पड़ता है। इन सबसे जूझ कर भी जब इन जिलों में लोग फिर भी सकून से रहना चाहते है तो उन पर जगंली जानवरों का कहर टूट पड़ता है जिस पर सरकार गौर करने करने को तैयार नहीं है। पिछले कुछ माह से सर्द मौसम होने के कारण तकरीबन हर जिलोें में वन्य जीव और मानव संघर्ष बढ़ने लगा है। जिसने आम जन की दुश्वारियंा बढ़ा दी है। पौड़ी जिले के पोखड़ा की पणिया ग्राम सभा के तोक गांव बस्ताग में एक ग्रामीण को पलायन इसलिए करना पड़ा क्योंकि एक सप्ताह के अंतराल में भालू ने उसके छह मवेशियों की जान ले ली। बताया तो यहंा तक जा रहा है कि अब भालू उनके आंगन में ही चहल कदमी कर रहा है। जिसके कारण सुरक्षा के दृष्टिगत उस परिवार को गांव से पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा है। ऐसे एक नहीं कई मामले सामने आये है जब स्थानीय लोगों को शिक्षाए स्वास्थ्यए रोजगारए आपदा व वन्य जीवों के हमलों के कारण राज्य से पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा है। सरकार को अगर राज्य से पलायन रोकना है तो उसे राज्य के लोगों की इन सभी समस्याओं पर गौर करने की जरूरत है अन्यथा उस पलायन आयोग के गठन का कोई औचित्य नही है जिसे पलायन को रोकने की जिम्मेदारी दी गयी है।

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