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कानून व्यवस्था पर सवाल?

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राज्य की कानून व्यवस्था इन दिनों सवालों के घेरे में आ चुकी है। राज्य में भू माफिया, खनन माफिया व नशा माफिया चांदी काटने में जुटे हुए है। जबकि मित्र पुलिस छोटे—छोटे अपराधों का खुलासा कर अपनी पीठ थपथपा रही है। बीते रोज काशीपुर क्षेत्र के एक किसान ने भूमाफियाओं के द्वारा की गयी धोखधड़ी के चलते नैनीताल में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली गयी थी। जिसका कहना था कि उसने इस मामले की शिकायत थाने—चौकी से लेकर एसएसपी कार्यालय तक की लेकिन उसे न्याय नहीं मिल सका। इस मामले में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का कहना है कि प्रदेश की कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गयी है। उन्होेने कहा है कि उत्तराखण्ड पुलिस अब कानून की रखवाली छोड़कर जमीन के धंधो और सत्ता संरक्षित लेन—देन में उलझ चुकी है। जिसका उदाहरण काशीपुर का यह ताजा मामला है। जहंा किसान ने न्याय न मिलने की पीड़ा में वीडियो जारी कर अपनी जान दे दी है। यह वारदात राज्य में व्याप्त भ्रष्ट कानून व्यवस्था का सबूत है। प्रदेश की कानून व्यवस्था पर उठा यह पहला सवाल नहीं है इससे पूर्व राज्य में घटित बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्या कांड में भी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठे थे। क्योंकि पुलिस अब तक न तो उस वीआईपी को ढूंढ पायी न अंकिता व पुलकित आर्य के फोन को ढूंढ सकी। राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों की बात छोड़िये राज्य की राजधानी देहरादून की बात करें जहंा पुलिस के आलाधिकारियों सहित खुद मुख्यमंत्री व मंत्री निवासरत है वहंा बीते दिनों रायपुर के थानो क्षेत्र में बदमाशाें द्वारा एक भजन गायक सहित दो लोगों की कार में हमला कर उन्हे लूटने का प्रयास किया गया था। जिनकी जान किसी तरह बच सकी थी। हालांकि बाद में पुलिस ने इस मामले का खुलासा तो कर दिया लेकिन सवाल अब भी कानून व्यवस्था से जुड़ा हुआ है कि जब राजधानी में ही बदमाशों के हौसंले इतने बुलंद है तो फिर प्रदेश के दुरस्थ जनपदों की स्थिति क्या होगी यह कानून व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल है?

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