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क्रिसमस पर तांडव

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कल क्रिसमस त्योहार पर महाराष्ट्र से लेकर मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश से लेकर देश की राजधानी दिल्ली और उत्तराखंड पूरे देश में भाजपा शासित राज्यों में जिस तरह भाजपा के अनुशंसिक संगठनों और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं या यू कहे कि हुडदंगियों ने जिस तरह तांडव मचाया उसकी गूंज अर्तराष्ट्रीय मीडिया तक सुनाई दी एक तरफ पीएम नरेंद्र मोदी सुबह से ईसाई समुदाय के लोगों को क्रिसमस की शुभकामनाएं देते हैं तथा चर्च जाकर प्रार्थना सभा में शामिल होते हैं वही दूसरी तरफ भााजपा शासित तमाम राज्यों में तथाकथित हिंदू वादी संगठनों के लोगों द्वारा क्रिसमस का त्यौहार मनाने वालों को धमकाने और उनके कार्यक्रमों में हिंसा मारपीट व आगजनीं करने की घटनाओं का सिलसिला दिन भर जारी रहता है तथा सोशल मीडिया पर यह खबरें सुर्खियां बटोरती रहती है। नये भारत की इस तस्वीर को देखकर यह आसानी से समझ आ सकता है कि इस देश और समाज में यह क्या हो रहा है कि गुंडागर्दी को रोकने का प्रयास करने पर किसी भी सरकार या पुलिस व प्रशासन द्वारा क्यों नहीं किया जा रहा है। केंद्र सरकार की इन तमाम घटनाओं पर चुप्पी साधे रहना यह बताने के लिए काफी है कि देश में जो कुछ भी हो रहा है उसकी मौन स्वीकृति केंद्र सरकार की है। ऐसा नहीं हो सकता है कि मोदी सरकार चाहे तो इस तांडव को रोक नहीं सकती है लेकिन उसके द्वारा ऐसा कुछ किया नहीं जा रहा है। हिन्दू—मुस्लिम की राजनीति करते—करते अब यह देश वहां तक पहुंच चुका है कि किसी भी अन्य जाति या धर्म के लोगों को अपने त्यौहार मनाने की आजादी नहीं रह गई है। देश की सत्ता के शीर्ष पर बैठे नेताओं को न तो यह समझ आ रहा है कि उनके हिंदू राष्ट्र और सनातन की सर्वोच्चता के दूरगामी परिणाम क्या होंगे और न वह देख पा रहे हैं कि विश्व के जिन अन्य राष्ट्रों में भारतीय हिंदू रहते हैं उनके सामने क्या समस्याएं आ सकती है। अपने देश में हिंदू वादियो की यह तथा कथित जमात को इस जात से लेना देना ही क्या है कि विदेश में रहने वाले हिंदुओं को इस तरह की घटनाओं के बाद किस तरह की दिक्कतें झेलनी पड़ती है। इन नेताओं को इस बात पर भी गौर करने की जरूरत है कि विश्व में कितने हिंदू राष्ट्र हैं कितने ईसाई और मुस्लिम राष्ट्र है। अगर यह सब राष्ट्र भारतीय हिंदुओं को अपने यहां होली और दिवाली न मानने देने या मनाने पर उनके साथ वैसा ही व्यवहार जैसा भारत में उनके साथ किया जा रहा है तब क्या यह हिंदू वादियो की फौज उन राष्ट्रों में जाकर भी अपनी हिंदुत्व कि इस लड़ाई को लड़ सकते हैं। इस तरह की वारदातों को अंजाम देने वाले सिर्फ यही तालियां पीट सकते हैं और नारों को लगा सकते हैं। अभी अमेरिका ने कितने भारतियों को जंजीरों से जकड़ कर भारत की धरती पर लाकर पटक दिया तब यह राष्ट्र वादी और हिंदूवादी कहां सो रहे थे। धार्मिक उन्माद से जिन युवाओं को जहां तक सत्ता ने हैक कर लिया है उनसे आप इस बात की उम्मीद भी नहीं कर सकते हैं कि वह जो कुछ कर रहे हैं वैसा करके वह अपने ही देश तथा समाज को कितना बड़ा नुकसान पहुंचा रहे हैं अपने देश की संवैधानिक व्यवस्था और गंगा जमुनी संस्कृति पर वह कितना बड़ा कुठाराघात कर रहे हैं यह एक चिंतनीय सवाल है। तथा राष्ट्रीय एकता को सबसे गंभीर खतरा भी है।

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