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सत्य और असत्य की राजनीति

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नेता विपक्ष राहुल गांधी शीतकालीन सत्र के बीच जर्मनी की यात्रा पर चले गए बीते 10 सालों से राहुल गांधी को राजनीति का पप्पू बनाने वालों को फिर उनके बारे में कुछ कहने का मौका मिल गया हालांकि इसी दौरान पीएम मोदी भी विदेश दौरे पर रहे लेकिन उनके विदेश दौरोें का उद्देश्य विदेश में भारत का डंका बजाने वालों के लिए कभी कोई मुद्दा नहीं होता है। पीएम ने अपने विदेश दौरे में क्या किया इसका जिक्र हम भी यहां नहीं करेंगे जर्मनी में राहुल गांधी भी कई कार्यक्रमों का हिस्सा बने उसका भी जिक्र हम नहीं करना चाहते लेकिन स्वदेश लौटने से पहले उन्होंने अपने संबोधन में जो कुछ कहा उसका जिक्र बिना किए हमारी बात पूरी नहीं हो सकती है। क्योंकि उनका यह संबोधन न सिर्फ उनकी पप्पू से नेता विपक्ष बनने की एक संपूर्ण कहानी का पूरा सच उजागर करता है अपितु उनके पप्पू से गांधी बनने और उनकी राजनीति का उद्देश्य तथा विजन को भी स्पष्ट करने वाला है। उनके इस भाषण को हर एक भारतीय को सुनना चाहिए। इसलिए नहीं कि यह देश के नेता विपक्ष या फिर नेहरू खानदान के वारिस का संबोधन है इसलिए इसको सुनना और समझना जरूरी है कि जब देश में नफरत की राजनीति अपने चरम पर है और देश का संविधान और लोकतंत्र दोराहे पर आ कर खड़ा हो चुका है तथा गृह युद्ध जैसे हालात या अघोषित आपातकाल जैसी स्थितियां देश के सामने मुंह बाए खड़ी है। यहां यह कहना भी अनुचित नहीं होगा कि इस दौर में देश में सत्य और असत्य की राजनीति का महाभारत जैसा युद्ध चल रहा है। क्योंकि नेता विपक्ष राहुल गांधी कांग्रेस जैसी राजनीतिक पार्टी की अग्रिम पंक्ति के सेनानियों में से एक है इसलिए उनका यह भाषण बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है। 2014 में तमाम वायदो और कायदों के साथ देश की सत्ता पर काबिज होने वाली भाजपा और सरकार इसका दूसरा पक्ष है जिसके शासन काल के 10 सालों में देश के लोग उसके कथनी और करनी से भी बखूबी वाकिफ हो चुके हैं। राहुल गांधी कहते हैं कि अपनी पहले भारत जोड़ो यात्रा के समय यह समझ में आया कि मोहब्बत के कॉन्सेप्ट के बिना कोई भी लड़ाई नहीं जीती जा सकती है इसलिए उन्होंने नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान खोली। कभी किसी से आई लव यू न कहने वाले राहुल को अब इस बात पर गर्व है कि देश से विदेश तक अब उन्हें आई लव यू राहुल कहने वाले करोड़ों लोग हैं। वह कहते हैं कि सत्य के मार्ग पर डटे रहना और सत्ता पाने के लिए राजनीति न करना बल्कि देश के उन 90 फीसदी लोगों को सामानता व बराबरी का हक दिलवाने के लिए राजनीति को सत्ता के औजार की तरह इस्तेमाल करना ही उनका उद्देश्य है। राहुल गांधी आगे कहते हैं कि मुझे किसी भी स्थिति से कोई फर्क नहीं पड़ता है मैं 10—20 साल जेल में रहूं तब भी वही करूंगा जो मुझे करना है क्योंकि मेरा उद्देश्य साफ है उन 90 फीसदी लोगों को अधिकार व समानता का हक दिलाना जिसे सामाजिक न्याय का नाम हम देते हैं, मै वह उन्हें दिला कर ही रहूंगा। वह विश्वास के साथ कहते हैं 10 लोग 90 लोगों को नहीं हरा सकते हैं। सत्य के साथ खड़ा रहना और किसी से न डरना उन्होंने सीख लिया है। वह कहते हैं कि मेरे दादा 13 साल जेल में रहे मैंने अपने दादा और पिता के शव देखें है। मुझे कुछ फर्क नहीं पड़ेगा 10 साल काल कोठरी में रह सकता हूं लेकिन अब मेरी यह लड़ाई लक्ष्य हासिल होने से पहले खत्म नहीं होगी। राहुल गांधी का यह युद्ध शंखनाद भाजपा के नेताओं को भी जरूर सुनना चाहिए जो सत्ता के लिए कुछ भी करने से नहीं डरते हैं।

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