Home संपादकीय छात्रों के भविष्य से खिलवाड़

छात्रों के भविष्य से खिलवाड़

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देश में बडे पैमाने पर खुलेआम फर्जी विश्वविघालयों का संचालित होना न केवल आश्चर्यजनक है बल्कि चिंताजनक भी है। यूजीसी के इतने सख्त नियमों और मानदंडों के बावजूद इन संस्थानों का बदस्तूर संचालित होते रहना दर्शाता है कि ऐसा करने वालों के मन में कानून का कोई खौफ नहीं है और इन संस्थाओं के संचालक न केवल विघार्थियों के भविष्य से साथ बल्कि कानून के साथ भी खिलवाड करने से पीछे नहीं हट रहे हैंं। फर्जी डिग्रीधारी अपनी नकली डिग्री का इस्तेमाल नौकरी पाने, पात्रता परीक्षा में सम्मिलित होने और शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने में करके पात्र अभ्यार्थियों के हक में सेंध लगा रहे हैं। सबसे बडी विडंबना यह है कि सबकुछ जानते हुए भी फर्जीवाडे का यह खेल जारी है। फर्जी संस्थाओं के संचालन करने वालों का दुस्साहस का पता इस तथ्य से लग जाता है कि देश की राजधानी दिल्ली में 10 फर्जी विश्वविघालय है जबकि पूरे देश में 20 फर्जी विश्वविघालय है। जहां स्वंय केन्द्र सरकार, यूजीसी और उच्चतम न्यायालय है। क्या कानून, नियम और कायदे केवल नाममात्र के रह गये हैं। क्या यूजीसी न्यायालय, केन्द्र सरकार, राज्य सरकारें इतनी असहाय हो गयी हैं कि इन फर्जी संस्थानों पर ताला भी नहीं लगा सकती। इस बात की कल्पना भी नहीं की जा सकती कि इन संस्थानों से फर्जी डिग्री लेकन निकले व्यक्ति देश का हित करेंगे क्या। देश की शिक्षा व्यवस्था को खोखला बना रही है इस अवैध संमानांतर शिक्षा व्यवस्था के लिए जितने जिम्मेदार इनके संचालक है उतने जिम्मेदार वा लोग भी हैं जो इनका विरोध नहीं करते, इनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं करते यह इन्हें बंद करने का प्रयास कोताही बरतते हैं। जबकि सरकारों को इनके खिलाफ ठोस कानून बनाने चाहिए और केन्द्र सरकार को इनके खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए राज्य सरकारों को निर्देश देने चाहिए तभी जाकर इनपर लगाम लगायी जा सकती है।

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