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आपदा में अवसर की तलाश

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भाजपा आज अगर देश ही नहीं विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन सकी है तो इसके लिए पार्टी के वह नेता बधाई के पात्र हैं जिन्होंने पार्टी की नीतियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के न सिर्फ नित नये प्रभावी नारे गढ़ने का काम किया बल्कि भाषणों की भाषा श्ौली को इतना धारदार बनाने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी कि जो मतदाताओं को रिझाने में शत प्रतिशत सफलता की गारंटी बन गई। अपने बीते समय में ट्टयह मोदी की गारंटी है, और ट्टमोदी है तो मुमकिन है, जैसे तमाम नारे बीते समय में सुने होंगे। प्रधानमंत्री मोदी के पास सफलता के अनगिनत मंत्र हैं वह पिछली सर्दियों में जब उत्तराखंड आए थे सूबे के पर्यटन को बारहमासी बनाने के लिए घाम तापो का मंत्र देकर गए थे। उनका लोकल फार वोकल के मंत्र को भी लोगों ने खूब सराहा था। उन्होंने देश के लोगों को आपदा को अवसर में बदलने का मंत्र भी दिया गया था। खास उपलब्धि यह है कि उनके इन मंत्रो से आम आदमी ने भले ही कुछ सबक नहीं लिया हो लेकिन उनकी पार्टी के नेताओं ने न सिर्फ उनके मन की बात को हमेशा गौर से सुना है बल्कि उसे अपने कार्य व्यवहार में भी उतनी ही बखूबी से उतारा भी है। आपदा में अवसर कैसे तलाश किए जाते हैं इसकी एक मिसाल इस मानसूनी आपदा काल में उत्तराखंड में भी देखने को मिली। इसमें कोई संदेह नहीं है कि सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस आपदा काल में ग्राउंड जीरो पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने और प्रभावितों की हर संभव मदद में कोई कमी नहीं रखी गई जिसके लिए मीडिया ने भी उनकी खूब सराहना की लेकिन इतना कुछ उनकी संतुष्टि के लिए काफी नहीं थी। यही कारण रहा होगा कि जिसके कारण उन्हें इसके लिए नताशा शाह जैसे कुछ इन्फ्यूएसर्स से स्वयं के कामों की सराहना कराने का सहारा लेना पड़ा। उन्होंने शायद सोचा भी नहीं होगा कि आपदा में अवसर तलाशने का यह तरीका उनकी ऐसी भद्द भी पिटवा सकता है। लेकिन अब जो हो गया सो हो गया। अगर उनके द्वारा अब इन वीडियो को डिलीट भी कर दिया गया हो लेकिन यह खबर और वीडियो आम तो हो ही गए। इस मामले में पहली बार तो गलती यही हुई कि सभी वीडियो की स्क्रिप्ट एक जैसी रखी गई वहीं इसके विजुअल भी एक रखे गए जो इस प्रचार की पूरी पटकथा की सच्चाई बताने के लिए काफी हैं। रही सही कसर नताशा शाह के उस वीडियो से पूरी हो गई जिसमें वह 2 घंटे में वीडियो बना कर देने और सभ्य कपड़ों में शूट करने की बात के साथ पेमेंट की बात भी कर रही है। इस मामले के खुलासे से यह साफ हो गया है कि जिन इन्फ्यूएसर्स ने यह वीडियो शूट किया क्यों किया? जिसमें वह सीएम धामी की तारीफों के पुल बांधते हुए हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा केंद्र से मिली 206 करोड़ की राहत का उपयोग ठीक से न करने व प्रचार में व्यस्त रहने की बात कर रहे हैं। इन दिनों ंकेंद्रीय टीम आपदा में हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए उत्तराखंड आई हुई है। वही वाडिया इंस्टीट्यूट और आईआईटी रुड़की के भूविज्ञानियों की शोध रिपोर्ट ने लोगों को इस कदर डरा रखा है कि भविष्य के खतरे से लोग सहमें हुए हैं। वही सीएम धामी इस आपदा में भी अवसर तलाश रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ उनके कुछ विधायक और मंत्री तथा पूर्व मंत्री खनन जैसे मुद्दों पर अपनी सरकार पर निशाना साधे हुए हैं। राज्य में इस मानसूनी आपदा का कारण सिर्फ अनिंयोजित विकास ही नहीं है जिसने राज्य को किसी संभावित बड़ी आपदा के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। अवैध खनन भी राज्य की इन आपदाओं के लिए एक अहम कारण है। भले ही यह अवैध खनन सरकार का खजाना भरने या नेता व अधिकारियों के घर भरने का जरिया रहा हो लेकिन राज्य के लोगों के लिए यह सिर्फ तबाही का सबब ही बना हुआ है।

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