पंचायत चुनावों के दौरान उत्तराखंड की आम आवाम ने राजनीति के जिस नए चेहरे और मोहरे को देखा है वह भले ही अत्यंत खौफनाक और डरावना हो लेकिन यह एक ऐसा सच है कि इसे कोई नजर अंदाज नहीं कर सकता है अब आने वाले समय में उत्तराखंड के लोगों को ऐसी घटनाओं और तस्वीरों को देखने के लिए तैयार रहना चाहिए। इस घटनाक्रम की शुरुआत से लेकर अब तक जितने भी ऑडियो और वीडियो हमने सोशल मीडिया पर देखे हैं तथा हाईकोर्ट में की गई उन तमाम टिप्पणियों तथा नेताओं की क्रिया प्रतिक्रियाओं पर गौर करें तो हमें इस दौर की राजनीति और हालात को समझने के लिए किसी साक्ष्य की जरूरत नहीं है। नैनीताल में 14 अगस्त को हुए पंाच पंचायत सदस्यों के तथाकथित वीडियो को जिसमें असलहाधारी बरसाती पहने बदमाश उन्हें जबरन घसीट कर अपनी कारों में लादकर ले जा रहे हैं प्रदेश के सभी लोगों ने देखा जिसे लेकर शासन—प्रशासन से लेकर पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया। नेता विपक्ष यशपाल आर्य का वह वीडियो जिसमें वह इस अपहरण और अपने तथा अन्य नेताओं के साथ की गई मारपीट तथा कांग्रेस की महिला प्रत्याशी को भी थप्पड़ मारने की बात कही जा रही है उसे भी सभी ने देखा और इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया भी दी जिसकी हाईकोर्ट तक में शिकायत की गई। लोगों को उससे भी अधिक हैरान करने वाला एक और वीडियो दो दिन बाद आया जब अपहरत सभी पंाच पंचायत सदस्यों को एक वीडियो में यह कहते देखा गया कि वह सभी अपने अपहरण की घटना को झूठ बताकर अपनी मर्जी से अपने घूमने आने की बात करते दिखे। इन सभी तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट द्वारा पुलिस और प्रशासन से जो सवाल किए गए और उन्हें जिस तरह से फटकार लगाई गई यहां तक आते—आते इस घटनाक्रम से बहुत हद तक पर्दा उठ चुका था। सब कुछ किसी फिल्मी कहानी के स्क्रिप्ट जैसा ही था जिसे आम आदमी तक ने समझ लिया कि सत्ता में बैठे लोगों के इशारे पर पुलिस की मिली भगत के बिना यह संभव नहीं हुआ था। इससे पूर्व एक ऑडियो जिसमें प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भटृ गोलियां चलने की सूचना देने वाले से यह कह रहे हैं कि कोई बात नहीं चुनाव में ऐसे गोलियां चलती ही रहती हैं भले ही इस ऑडियो को उन्होंने ऑडिट बता दिया हो लेकिन इसकी कोई जांच नहीं हुई है। हद तो तब हो गई जब कुछ युवाओं का एक और वीडियो वायरल हुआ जिसमें शराब पार्टी चल रही है और नेता विपक्ष आर्य को पेलने की बात कही जा रही है। राजनीति के इस पूरे घटनाक्रम के कारण ही अब हमें विधानसभा सत्र में वह सब देखने को भी मिला जो पहले कभी नहीं देखा गया था भले ही सीएम धामी अभी भी विपक्ष के इस रवैये को कांग्रेस नेताओं की हार की निराशा का नतीजा बता रहे हो लेकिन वह भी इस जीत और हार के सच तथा कांग्रेस के विरोध के सच की उस कहानी को अच्छी तरह जानते हैं तथा यह भी इसके लिए सरकार तथा शासन—प्रशासन ही जिम्मेदार है जिसका बचाव वह सदन से लेकर हाईकोर्ट तक करने में जुटे हैं। लेकिन सूबे की राजनीति में बोय जाने वाले इन बबुलों के पेड़ों का परिणाम क्या होगा यह अब प्रदेश के लोगों को सोचना है।




