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अल्मोड़ा से विरोध की ‘गूंज’

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  • अल्मोड़ा में मुख्यमंत्री धामी को काले झंडे, गो बैक के नारों से गरमाई सूबे की सियासत
  • युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान किया विरोध प्रदर्शन, कई हिरासत में
  • कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकार बताया, भाजपा ने कहाकृविकास विरोधी राजनीति


देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अल्मोड़ा दौरे के दौरान उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया, जब युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उन्हें काले झंडे दिखाते हुए गो बैक के नारे लगाए। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने बैरिकेडिंग पर ही रोक दिया। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बाद में छोड़ दिया गया।
मुख्यमंत्री धामी अल्मोड़ा में विभिन्न विकास योजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के साथ-साथ जनसभा को संबोधित करने पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही, लेकिन युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए बेरोजगारी, पेपर लीक, बढ़ती महंगाई और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया। युवा कांग्रेस नेताओं का कहना था कि प्रदेश का युवा रोजगार, पारदर्शी भर्ती और बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार इन मुद्दों पर गंभीर नहीं दिख रही। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बार-बार भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों पर सरकार जवाबदेही से बच रही है। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री के समक्ष लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का प्रयास किया गया।
दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को राजनीतिक नौटंकी करार दिया। भाजपा नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री धामी प्रदेश में रिकॉर्ड विकास कार्यों को गति दे रहे हैं और कांग्रेस जनता के बीच अपनी घटती राजनीतिक जमीन को बचाने के लिए केवल विरोध की राजनीति कर रही है। भाजपा का दावा है कि प्रदेश में निवेश, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में लगातार काम हो रहा है, जिससे कांग्रेस असहज है।
पुलिस प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम के दौरान स्थिति को नियंत्रण में रखा। अधिकारियों के अनुसार प्रदर्शन की सूचना पहले से थी, इसलिए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए प्रदर्शनकारियों को कार्यक्रम स्थल से पहले ही रोक दिया गया। प्रशासन ने कहा कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह सामान्य रही और मुख्यमंत्री के सभी निर्धारित कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुए।
अल्मोड़ा की घटना ऐसे समय हुई है जब उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज होने लगी हैं। विपक्ष लगातार बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं, महंगाई और युवाओं के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। वहीं भाजपा विकास कार्यों और मजबूत नेतृत्व को चुनावी मुद्दा बनाने में जुटी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले मुख्यमंत्री के हर दौरे पर विपक्ष इस तरह के प्रतीकात्मक विरोध के जरिए सरकार को घेरने का प्रयास करेगा। दूसरी ओर भाजपा ऐसे प्रदर्शनों को विकास विरोधी बताकर जनता के बीच अपना पक्ष मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
अल्मोड़ा के स्थानीय लोगों का कहना है कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध शांतिपूर्ण होना चाहिए। आम लोगों की अपेक्षा है कि राजनीतिक दल आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर रोजगार, पलायन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे जमीनी मुद्दों पर ठोस समाधान प्रस्तुत करें।

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