जोशीमठ में क्षतिग्रस्त भवनों को गिराने का काम शुरू

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होटल मलारी इन व माउंट व्यू से कार्रवाई शुरू
सभी लाल निशान वाले घर भी गिराए जाएंगे
प्रभावित क्षेत्र को खाली कराने का काम भी जारी

जोशीमठ। जोशीमठ आपदा के प्रबंधन का काम तेज करते हुए शासन के निर्देशन पर आज क्षतिग्रस्त इमारतों को गिराने का काम शुरू कर दिया गया है। इस कार्रवाई को आज शहर के 2 बड़े होटलों जिसमें मलारी इन और माउंट व्यू शामिल है, से यह कार्रवाई शुरू की गई है। इसके साथ ही अब तक जर्जर हालत में पहुंचे उन मकानों को भी गिराया जा रहा है जिन्हें खाली करा लिया गया है।
आज सुबह सीबीआरआई की टीमें प्रभावित क्षेत्र में पहुंची और दोनों होटलों का निरीक्षण कर कार्रवाई शुरू की गई। इस मौके पर पीडब्ल्यूडी की टीम तथा एसडीआरएफ की टीमों के अलावा पुलिस और प्रशासन के बड़े अधिकारी भी मौजूद रहे। प्रभावित क्षेत्र में कार्रवाई की शुरुआत बिजली की लाइनों व तारों को हटाने से की गई। कार्यवाही क्षेत्र में आम लोगों की आवाजाही को रोक दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि आसपास के घर मकानों को भी सुरक्षा के लिहाज से खाली करा लिया गया है जिससे जानमाल का कोई नुकसान न हो। यही नहीं उनका कहना है कि भवनों को गिराने में बड़ी मशीनरी या आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है इसलिए इसमें कई दिन का समय लग सकता है।


इस बीच होटल मलारी इन और माउंट व्यू के मालिकों ने इस बात को लेकर आपत्ति भी जताई है कि प्रशासन द्वारा उनके होटलों पर लाल निशान तो लगाए गए लेकिन उन्हें ध्वस्तीकरण का कोई पूर्व नोटिस नहीं दिया गया है और न ही उनकी परिसंपत्तियों के आर्थिक नुकसान का कोई आंकलन किया गया है। उनका साफ कहना है कि जनहित में अगर उनके होटलों को तोड़ा जा रहा है तो इसमें उन्हें आपत्ति नहीं है लेकिन जो कुछ हो रहा है वह नियम कानून के अनुसार ही किया जाए उनका कहना है कि वह उनकी संपत्ति का हर्जाना उन्हें दे वह अभी वहां से चले जाएंगे।
यहां यह उल्लेखनीय है कि आपदा प्रभावित क्षेत्र का दायरा हर रोज लगातार बढ़ता जा रहा है। क्षतिग्रस्त भवनों की संख्या अब 678 हो चुकी है वही अभी सिर्फ 81 भवनों को प्रशासन द्वारा खाली करा जा सका है। शिफ्ट किए गए परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है जबकि अभी भी बहुत सारे क्षतिग्रस्त घरों को लोगों ने नहीं छोड़ा है। जिन लोगों के घर इस आपदा की जद में आ चुके हैं उन सभी को शिफ्ट करना तथा उनके रहने खाने व अन्य तमाम व्यवस्थाओं को पूरा करना भी शासन—प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। जिनके घर बार इस आपदा के कारण उजड़ रहे हैं वह अपने और परिवार की सुरक्षा तथा भविष्य को लेकर चिंतित और परेशान हैं।

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