सीएम का चुनाव हाईकमान के हवाले

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सीएम पद की दौड़ में आधा दर्जन से अधिक
किसी भी पूर्व सीएम को नहीं मिलेगी जिम्मेवारी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चुनाव हारने के बाद सूबे की राजनीति में अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि अगला मुख्यमंत्री कौन? एक बार फिर बंपर बहुमत के साथ सत्ता में लौटी भाजपा के अंदर भी इन दिनों इसी सवाल पर चिंतन—मंथन चल रहा है।
चुनाव जीत कर आए विधायकों की महत्वकांक्षाएं हिलोरे मार रही है। संवैधानिकता के दायरे में सर्वाेच्च प्राथमिकता के आधार पर विधायक दल का नेता चुने जाने का पहला अधिकार विधायकों को ही होता है। लेकिन राजनीतिक दलों द्वारा इस परंपरा को ताक पर ही रख दिया गया है अब नेता या उपनेता का चुनाव सब हाईकमान के हवाले हैं। इसलिए दिल्ली दरबार से जिसका भी नाम तय किया जाएगा उसके ही सर ताज रखा जाना तय है। विधायकों को तो सिर्फ उस नाम के पक्ष में हाथ उठाने भर हैं।
खास बात यह है कि इस बार नेता का चुनाव थोड़ा जटिल इसलिए भी है क्योंकि यह चुनाव 2024 के आम चुनाव को ध्यान में रखकर किया जाना है। भले ही भाजपा को जीत कर आए विधायकों से अलग हट कर ही क्यों न मुख्यमंत्री का चुनाव करना पड़े। जीत कर आए 47 विधायकों में से अगर किसी को इस योग्य नहीं समझा जाता है जो ठीक—ठाक ढंग से सरकार चला सके और लोकसभा चुनाव में पार्टी को 2019 जैसी जीत दिला सके तो भाजपा किसी अन्य को भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा सकती है। विधायकों के लिए तो यही काफी होगा कि उनमें से ही कोई एक नाम सीएम पद के लिए तय किया जा सके।
भाजपा जो अपने फैसलों से अब तक सभी को चौंकाती रही है इस बार भी नए सीएम का फैसला चौंकाने वाला हो सकता है। पिछली सरकार के तीनों मुख्यमंत्री ऐसे बने जिन्हें खुद भी पता नहीं था कि उन्हें सीएम भी बनाया जा सकता है और गए भी वैसे ही जब उन्हें इसका भान तक नहीं था फिलहाल वर्तमान विधायकों से लेकर सांसदों तक भावी सीएम की कतार लगी हुई है। दर्जन भर से अधिक नाम चर्चा में है। जिसका कारण है सभी के द्वारा अपने—अपने लिए बैटिंग किया जाना। इससे भी आगे की बात यह है कि यह सभी दावेदार पीएम मोदी और अमित शाह तथा जेपी नड्डा के महिमामंडन में लगे हुए हैं। उन्हें ऐसा लग रहा है कि इसका फायदा उन्हें हो सकता है जबकि ऐसा है नहीं।
भाजपा का इतिहास रहा है कि वह दूसरा मौका किसी को भी नहीं देती। बीसी खंडूरी तक को नहीं दिया गया था। इसलिए इतना तो तय है कि जिस नाम के सामने पूर्व मुख्यमंत्री लिखा जा चुका है उनमें से किसी को भी सीएम की कुर्सी मिलने नहीं जा रही है। वह भले ही पुष्कर सिंह धामी भी क्यों न हो? जिनके युवा नेतृत्व के नाम पर भाजपा ने चुनाव लड़ा।

भाजपा मुख्यालय में विधायकों का जमावड़ा
देहरादून। भाजपा मुख्यालय में आज भाजपा के नवनिर्वाचित तमाम विधायकों का जमावड़ा रहा। विधायकों के कुछ समर्थकों ने अपने नेता को सीएम बनाए जाने के पक्ष में नारेबाजी भी की। अधिकांश विधायकों ने स्वयं को भाजपा का कार्यकर्ता बताते हुए पीएम मोदी और अमित शाह को जीत का श्रेय देते हुए यही कहा कि मेरी कोई सीएम पद के लिए दावेदारी नहीं है लेकिन पार्टी जो भी जिम्मेवारी देगी पूरी मेहनत, निष्ठा और ईमानदारी से उसका पालन करूंगा।

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