August 13, 2026महिला सशक्तिकरण की दिशा में देवभूमि ने रचा नया इतिहास देहरादून। सरकार के भगीरथ प्रयासों से प्रदेश में लखपति दीदियों की संख्या 03 लाख 03 हजार के आंकड़े को पार कर चुकी है।आज यहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में नया इतिहास रचा है। सरकार के भगीरथ प्रयासों से प्रदेश में लखपति दीदियों की संख्या 03 लाख 03 हजार के आंकड़े को पार कर चुकी है। अब वित्तीय वर्ष 2026—27 में एक लाख 12 हजार महिलाओं को लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य को निर्धारित अवधि से पहले ही हासिल करने के लिए जिम्मेदार विभाग जुट गए हैं। धामी सरकार द्वारा उत्तराखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत नारी सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गई हैं। इसी के तहत नवंबर 2022 से लखपति दीदी योजना शुरू की गई है। धामी सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और मजबूत इरादों से यह योजना साल दर साल नया रिकॉर्ड कायम कर रही है। जो भी सालाना लक्ष्य रखा गया, निर्धारित अवधि से पहले ही हासिल कर लिया गया। वित्तीय वर्ष 2025—26 तक 03 लाख 03 हजार 696 महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। इन महिलाओं ने अपनी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक पहुंचाकर आत्मनिर्भरता की शानदार मिसाल पेश की है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं प्रदेश सरकार की अनुदानित एवं ऋण योजनाओं के माध्यम से विभिन्न व्यवसायों के माध्यम से अपनी आर्थिकी को मजबूती दे रही हैं। खास तौर पर जैविक खेती, फूड प्रोसेसिंग, मसाला निर्माण, हस्तशिल्प, डेरी—पशुपालन, मौन पालन, मशरूम उत्पादन, होमस्टे संचालन जैसे व्यवसायों को महिलाओं ने अपनाया है। मिलेट से तैयार बेकरी उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए महिलाएं यह उत्पाद भी तैयार कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की प्रोसेसिंग, बिक्री और बाजारों तक आसान पहुंच के लिए प्रदेश सरकार ने विशेष व्यवस्था बनाई है। इसके लिए 24 ग्रोथ सेंटर, 33 नैनो पैकेजिंग यूनिट और 17 सरस सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। बड़े बाजारों से जोड़ने के लिए जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर सरस मेलों का आयोजन किया जा रहा है। धामी सरकार की पहल पर ट्टहाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड ने महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी है। स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और गुणवत्ता में सुधार होने से महानगरों और प्रमुख शहरों में इन उत्पादों की मांग बढ़ी है। उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत समूहों की महिलाओं को सशक्त बनाने का कार्य लगातार जारी है। प्रदेश के सभी 13 जनपदों के 95 ब्लाकों में कुल 5,19,943 महिलाओं को संगठित कर 70,767 समूह, 8179 ग्राम संगठन और 615 कलस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) तैयार किए गए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा महिला सशक्तिकरण और स्वावलंबन की दिशा में उठाए गए कदम मिसाल बने हैं। महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्ष्ौतिज आरक्षण और सहकारी समितियों में 33 फीसदी आरक्षण इस दिशा में सरकार के ऐतिहासिक फैसले हैं। इसके अलावा विभिन्न योजनाएं भी सरकार ने शुरू की हैं। इनमें मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना, ड्रोन दीदी योजना, सोलर सखी योजना, मुख्यमंत्री सतत आजीविका मिशन, मुख्यमंत्री नारी सशक्तिकरण योजना, मुख्यमंत्री उघमशाला योजना आदि उल्लेखनीय हैं। मातृशक्ति उत्तराखण्ड की आर्थिक और सामाजिक क्रांति की सबसे बड़ी संवाहक है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि राज्य के विकास में भी अग्रणीय भूमिका निभा रही हैं। इन समूहों को विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है, ताकि उनकी आय के नए स्रोत विकसित हो सकें। हमारी सरकार हर स्तर पर मातृशक्ति के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध हैं।
August 13, 2026हरिद्वार। ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्र में आज सुबह स्पेयर पार्ट्स की एक दुकान में अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। दुकान से धुआं और आग की लपटें उठती देख आसपास के लोगों ने तत्काल फायर ब्रिगेड को सूचना दी। सूचना मिलते ही दमकल की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का अभियान शुरू किया।आग तेजी से दुकान के अंदर रखे सामान तक फैल गई। देखते ही देखते बड़ी मात्रा में स्पेयर पार्ट्स और अन्य सामान आग की चपेट में आ गया। दुकान में खड़ी तीन पुरानी बाइक भी जलकर राख हो गईं। आग से लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। फायर कर्मियों ने करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। समय रहते आग बुझा दिए जाने से आसपास स्थित दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों को आग की चपेट में आने से बचा लिया गया। एफएसओ बीरबल सिंह ने बताया कि सुबह दुकान में आग लगने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और करीब एक घंटे में आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। हालांकि, आग के वास्तविक कारण और नुकसान का आकलन जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
August 13, 2026डेढ़ लाख के बजट ने तोड़ दिया उत्तराखंड की बेटी का इंटरनेशनल सपना रोमानिया में होने वाली अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो स्पर्धा के लिए हुआ था चयन युवा संवाद में छात्रा सयारा के आंसुओं ने सरकारी वादों की पोल खोल दी तिरंगा लहराने का सपना देखने वाली बेटी को अफसरों ने मोहताज बनाया देहरादून। उत्तराखंड में खेल प्रतिभाओं और सरकारी व्यवस्था को लेकर एक छात्रा की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने कही गई बात ने सियासी बहस छेड़ दी है। मुख्यमंत्री से युवा संवाद कार्यक्रम के दौरान देहरादून की छात्रा सयारा ने भावुक होकर बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर खेलने के बाद उसका चयन रोमानिया में होने वाली अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता के लिए हुआ था, लेकिन करीब डेढ़ लाख रुपये की व्यवस्था नहीं हो पाने के कारण वह प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकी। छात्रा ने मुख्यमंत्री के सामने कहा कि उससे करीब 1.50 लाख रुपये मांगे गए थे और वह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में नहीं खेल पाई। छात्रा के भावुक होने पर मुख्यमंत्री ने उसे शांत कराया और अधिकारियों से मामले की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए। इस पूरे घटनाक्रम ने सवाल खड़ा किया है कि यदि किसी सरकारी या खेल व्यवस्था में एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के बाद केवल आर्थिक संसाधनों के अभाव में रुक जाती है, तो खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की सरकारी नीतियां आखिर किस हद तक जमीन पर पहुंच रही हैं?रिपोर्टों के मुताबिक, रोमानिया की प्रतियोगिता में जाने के लिए यात्रा सहित कुल खर्च करीब 3.70 लाख रुपये बताया गया था। इसमें लगभग 1.70 लाख रुपये की सहायता काउंसिल की ओर से होने की बात थी, जबकि करीब 1.50 लाख रुपये छात्रा को स्वयं जुटाने थे। आर्थिक व्यवस्था नहीं होने के कारण वह प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकी। यानी इस मामले में डेढ़ लाख एक रकम भर नहीं है। यह उस सवाल का प्रतीक बन गया है कि प्रतिभा और आर्थिक क्षमता के बीच सरकार कितनी मजबूत पुल बना पाती है। छात्रा की बात सामने आने के बाद विपक्ष ने इसे सरकार की खेल व्यवस्था पर हमला करने के लिए मुद्दा बना लिया। कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के सामने ही एक बेटी ने व्यवस्था में भ्रष्टाचार की शिकायत रखी। लेकिन इसी मामले में एक महत्वपूर्ण सावधानी भी सामने आई है। बाद की रिपोर्टों में छात्रा की बात को रिश्वत के रूप में प्रचारित किए जाने पर सवाल उठे हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, मामला प्रतियोगिता में जाने के लिए आवश्यक वित्तीय व्यवस्था का था और छात्रा ने बाद में स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के सामने वह अपनी पूरी बात नहीं रख पाई थी। इसलिए फिलहाल इसे सीधे रिश्वतखोरी साबित मानना उचित नहीं होगा। असली सवाल यह है कि डेढ़ लाख रुपये की आवश्यकता क्यों पड़ी, किस संस्था की क्या जिम्मेदारी थी और खिलाड़ी को उपलब्ध सरकारी अथवा खेल सहायता समय पर क्यों नहीं मिल सकी।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को छात्रा के स्कूल और उसके ताइक्वांडो प्रशिक्षण से जुड़ी जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं। अब गेंद सरकार के पाले में है। यदि जांच में यह सामने आता है कि खिलाड़ी को नियमानुसार मिलने वाली सहायता नहीं मिली, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। यदि रकम वास्तव में प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए खिलाड़ी की अपनी हिस्सेदारी थी, तो फिर यह भी देखना होगा कि आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभाओं के लिए ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं है कि चयन के बाद पैसे के अभाव में उनका अंतरराष्ट्रीय अवसर न छूटे। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रदेश की राजनीति में युवा, रोजगार और प्रतिभाओं का पलायन पहले से बड़े मुद्दे हैं। सरकार खेलों में सुविधाओं और प्रतिभाओं को अवसर देने की बात करती रही है। दूसरी ओर विपक्ष को ऐसे मामलों के जरिए यह सवाल उठाने का मौका मिल रहा है कि घोषणाओं और जमीन पर मौजूद व्यवस्था के बीच कितना अंतर है।इस पूरे विवाद में सबसे जरूरी बात राजनीति से आगे की है।एक बच्ची राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचती है। फिर अंतरराष्ट्रीय मंच का दरवाजा उसके सामने खुलता है। लेकिन दरवाजे के बाहर खड़ा सवाल सिर्फ 1.50 लाख रुपये का रह जाता है। अगर प्रतिभा के सामने सबसे बड़ी बाधा पैसा बन जाए, तो फिर सवाल केवल खिलाड़ी का नहीं रहता पूरे खेल तंत्र की क्षमता का हो जाता है। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री के सामने उठी इस आवाज का जवाब सिर्फ जांच के आदेश तक सीमित रहता है या उत्तराखंड की खेल व्यवस्था में ऐसा रास्ता बनता है, जिसमें किसी खिलाड़ी का अंतरराष्ट्रीय सपना आर्थिक मजबूरी के कारण अधूरा न रह जाए।
August 13, 2026देहरादून। जिला अधिकारी डा. आशीष चौहान ने कहा कि बाल लिंगानुपात में सुधार एवं बेटियों के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने के उद्देश्य से जनपद के समस्त श्ौक्षणिक संस्थानों में 15 अगस्त 2026 को ‘कन्या भू्रण संरक्षण प्रतिज्ञा ’ दिलाई जाएगी।आज यहां बाल लिंगानुपात में सुधार एवं बेटियों के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने के उद्देश्य से जनपद के समस्त श्ौक्षणिक संस्थानों में 15 अगस्त 2026 को ‘कन्या भू्रण संरक्षण प्रतिज्ञा ’ दिलाई जाएगी। जिला समुचित प्राधिकारी, पीसीपीएनडीटी/जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने इस संबंध में मुख्य शिक्षा अधिकारी को आवश्यक दिशा—निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के क्रम में जनपद के समस्त डिग्री कॉलेजों, विघालयों एवं अन्य श्ौक्षणिक संस्थानों में 15 अगस्त को अपने—अपने स्तर पर कन्या भ्रूण संरक्षण प्रतिज्ञा दिलाया जाना सुनिश्चित किया जाएगा। प्रतिज्ञा के माध्यम से विघार्थियों एवं शिक्षकों को लिंग भेद, कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाने, बेटियों को बेटों के समान प्यार, पोषण, सुरक्षा एवं आगे बढ़ने के समान अवसर प्रदान करने तथा बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वावलंबन के लिए सदैव प्रयासरत रहने का संकल्प दिलाया जाएगा। प्रतिज्ञा में यह भी संकल्प लिया जाएगा कि घर, समाज एवं आसपास ऐसा वातावरण तैयार किया जाए, जहां प्रत्येक बेटी स्वयं को सुरक्षित महसूस करे तथा गरिमा और सम्मान के साथ जीवन जी सके। जिला प्रशासन ने सभी श्ौक्षणिक संस्थानों से अपील की है कि वे इस अभियान में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करते हुए अधिक से अधिक विघार्थियों, शिक्षकों एवं कार्मिकों को कन्या भ्रूण संरक्षण के प्रति जागरूक करें।
August 13, 2026घायल बदमाश गौकशी की घटना में 2 वर्षों से चल रहा था फरार देहरादून। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शातिर बदमाश को पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया है। बदमाश के दोनो पैरो में गोलियंा लगी है जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायल बदमाश गौकशी के मामले मे पिछले दो वर्षो से फरार चल रहा था।जानकारी के अनुसार बीती देर रात थाना प्रेमनगर पुलिस द्वारा दरू चौक के पास चेकिंग के दौरान गोरखपुर चौक की तरफ से आती हुई बिना नंबर की एक काले रंग की मोटरसाइकिल में सवार 2 व्यक्तियों को संदिग्धता के आधार पर रुकने का इशारा किया गया तो मोटरसाइकिल सवार व्यक्ति अपने वाहन को तेजी से चलाते हुये मौके से चाय बागान की ओर फरार हो गये, मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों द्वारा उनका पीछा किया गया, पुलिस टीम को पीछा करता देख संदिग्ध बाइक सवार बदमाश पितांबरपुर बनियावाला मार्ग पर मोटरसाइकिल को सड़क किनारे छोड़कर चाय बागान की ओर भाग गये, पुलिस टीम द्वारा पीछा करने पर उक्त व्यक्तियों द्वारा पुलिस टीम पर फायरिंग की गई, जिसमें पुलिस का सरकारी वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। पुलिस द्वारा अपने बचाव में किये गये जबाबी फायर में एक बदमाश के दोनों पैरों पर गोली लग गई, जिसे पुलिस द्वारा तत्काल उपचार हेतु अस्पताल ले जाया गया, जबकी उसका साथी अंधेरे का फायदा उठाते हुए मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश की जा रही है।मुठभेड़ में घायल बदमाश की पहचान रईस पुत्र नसीम निवासी मोहल्ला खाताखेड़ी, थाना मंडी, जिला सहारनपुर, हाल निवासी आजाद कॉलोनी, अलावलपुर रोड, कस्बा छुटमलपुर, थाना फतेहपुर, जिला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश तथा फरार बदमाश की पहचान नवाब निवासी सहारनपुर के रूप में हुई। मौके से पुलिस टीम को आरोपी के कब्जे से एक तमंचा, 2 खोखा कारतूस तथा सड़क किनारे छोड़ी गई बिना नंबर की स्प्लेंडर मोटरसाइकिल से गौकशी हेतु लायी गई 1 कुल्हाड़ी, 1 चापड़, 2 छुरी व 1 नाइलोन की रस्सी बरामद हुई।पुलिस के अनुसार मुठभेड़ में घायल बदमाश सहारनपुर का गैंगस्टर है, जो विगत 2 वर्षों से प्रेम नगर क्षेत्र में हुई गोकशी की घटना में फरार चल रहा था। पुलिस द्वारा आरोपी के साथ घटना में शामिल उसके 4 साथियों को पूर्व में ही गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ गौकशी, चोरी तथा अन्य आपराधिक घटनाओं के उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड में लगभग डेढ़ दर्जन मुकदमें दर्ज है।
August 13, 2026जंतर-मंतर फिर चर्चा में है। काकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर सीजन-2 जल्द शुरू करने का एलान किया है। यह घोषणा उस आंदोलन के कुछ ही सप्ताह बाद हुई है, जिसने दिल्ली के इस धरना स्थल को छात्रों, युवाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों का बड़ा मंच बना दिया था। सवाल यह नहीं है कि जंतर-मंतर का दूसरा सीजन आएगा या नहीं। असली सवाल यह है कि क्या दूसरा सीजन पहले से उठाए गए सवालों के जवाब तलाशेगा या सिर्फ विरोध की राजनीति का अगला एपिसोड बनेगा? पहले चरण में परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, युवाओं के भविष्य और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे जैसे मुद्दे आंदोलन के केंद्र में रहे। सोनम वांगचुक के अनशन से लेकर छात्रों की बड़ी मौजूदगी तक, आंदोलन ने यह दिखाया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की अनिश्चितता और रोजगार की चिंता केवल राजनीतिक भाषणों के विषय नहीं हैं। वह लाखों परिवारों की रोजमर्रा की बेचौनी हैं। लेकिन किसी भी आंदोलन की असली परीक्षा भीड़ से नहीं, उसके बाद की दिशा से होती है। जंतर-मंतर पर भीड़ जुटाना अपेक्षाकृत आसान है। कैमरे जुट जाते हैं, नारे गूंजते हैं, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते हैं। कठिन काम उसके बाद शुरू होता हैकृसरकार से सवाल पूछना, जवाब मांगना, दस्तावेज सामने रखना और यह बताना कि व्यवस्था में बदलाव आखिर किस तरह होगा। यही वह कसौटी है जिस पर सीजन-2 को खरा उतरना होगा। अगर दूसरा चरण फिर केवल इस्तीफे की मांग तक सीमित रहा, तो आंदोलन का दायरा छोटा हो जाएगा। शिक्षा व्यवस्था की समस्या किसी एक मंत्री के चेहरे से बड़ी है। एनटीए की कार्यप्रणाली, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, पेपर की सुरक्षा, पारदर्शिता, परिणामों की विश्वसनीयता और विद्यार्थियों की शिकायतों के निवारण की व्यवस्थाकृइन सभी पर ठोस सवाल हैं। युवा केवल यह नहीं पूछ रहा कि कौन जिम्मेदार है? वह यह भी पूछ रहा है कि अब व्यवस्था बदलेगी कैसे? यही फर्क आंदोलन को राजनीतिक प्रदर्शन से जनआंदोलन बनाता है। सीजेपी की पहली मुहिम ने एक और सवाल खड़ा किया था क्या आज के युवाओं के पास पारंपरिक राजनीतिक दलों से अलग अपनी राजनीतिक भाषा बनाने की जगह है? काकरोच जनता पार्टी जैसा नाम अपने आप में स्थापित राजनीतिक शब्दावली का व्यंग्य है। लेकिन व्यंग्य तभी राजनीतिक ताकत बनता है, जब उसके पीछे स्पष्ट विचार और ठोस कार्यक्रम हो। वरना आंदोलन भी सोशल मीडिया के कंटेंट में बदल सकता है। जंतर-मंतर का पहला दौर लंबा चला। अलग-अलग समूहों, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी ने इसे व्यापक बनाया। लेकिन ऐसे आंदोलनों में नेतृत्व, उद्देश्य और रणनीति की स्पष्टता हमेशा जरूरी होती है। विरोध जितना बड़ा हो, जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होती है। इसलिए सीजन-2 के सामने सबसे बड़ी चुनौती सरकार नहीं, विश्वसनीयता है। दीपके ने घोषणा की है, लेकिन घोषणा के साथ यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि दूसरे चरण का एजेंडा क्या होगा। कौन-कौन से सवाल उठाए जाएंगे? सरकार से क्या समयबद्ध मांग की जाएगी? छात्रों के लिए क्या वैकल्पिक प्रस्ताव है? परीक्षा सुधार को लेकर सीजेपी की ठोस रूपरेखा क्या है? लोकतंत्र में आंदोलन का अधिकार उतना ही महत्वपूर्ण है जितना सत्ता का जवाब देना। लेकिन आंदोलनकारियों की भी जिम्मेदारी है कि वह तथ्य और तर्क के साथ जनता के सामने जाएं। जंतर-मंतर किसी एक संगठन की निजी जमीन नहीं है। यह लोकतांत्रिक असहमति का प्रतीक है। यहां सरकार के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार है तो आंदोलन के तरीके पर सवाल पूछने का अधिकार भी जनता के पास है। इसलिए सीजन-2 को केवल सीजन-1 का दोहराव नहीं होना चाहिए। पहले चरण ने सवाल खड़े किए। अब दूसरे चरण को जवाबों की मांग करनी होगी। पहले चरण में गुस्सा था। दूसरे चरण में नीति होनी चाहिए। पहले चरण में नारे थे। दूसरे चरण में दस्तावेज होने चाहिए। पहले चरण में भीड़ थी। दूसरे चरण में रोडमैप होना चाहिए और सबसे जरूरी पहले चरण में जिन युवाओं ने अपना समय और भरोसा दिया, दूसरे चरण में उनकी आवाज नेतृत्व के केंद्र में होनी चाहिए। भारत का युवा सिर्फ राजनीति का दर्शक नहीं रहना चाहता। वह अपने भविष्य का हिस्सेदार बनना चाहता है। परीक्षा की तारीख, परिणाम, नौकरी, शिक्षा की फीस और पारदर्शी व्यवस्था उसके लिए टीवी की बहस नहीं, जिंदगी का सवाल है। इसलिए जंतर-मंतर का सीजन-2 यदि सचमुच आता है, तो उसे यह तय करना होगा कि वह सिर्फ सरकार के खिलाफ आंदोलन है या व्यवस्था को बेहतर बनाने का आंदोलन। क्योंकि आंदोलन की सफलता भीड़ की संख्या से नहीं मापी जाती। वह इस बात से मापी जाती है कि आंदोलन खत्म होने के बाद कितने सवाल अनुत्तरित रह गए और कितने बदलाव जमीन पर दिखाई दिए। जंतर-मंतर पर फिर आवाज गूंजेगी। अब देखना यह है कि उस आवाज में सिर्फ विरोध होगा या भविष्य की कोई स्पष्ट तस्वीर भी।