घर में घुसकर परिवार पर हमले का प्रकरण : पाषर्दो व नगर निगम कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज

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  • शासन—प्रशासन से नहीं कोई उम्मीद, कोर्ट ही न्याय करेगीः भारद्वाज

देहरादून। प्रवीण भारद्वाज ने बताया कि निगम कर्मियों ने पार्षद के दबाव में शिकायतकर्ता का ही मकान ध्वस्त कर दिया। न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज हुआ। उनको शासन—प्रशासन से कोई उम्मीद नहीं अब कोर्ट ही इंसाफ करेगी।
आज यहां परेड ग्राउंड स्थित एक क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए जाखन निवासी प्रवीण भारद्वाज ने बताया कि 22 फरवरी को बीजेपी के पार्षदों संजय नौटियाल, चुन्नीलाल, भूपेंन्द्र कठैत, कमल थापा, योगेश घाघट, सत्येंन्द्र नाथ व उनके साथ भाजपा पूर्व मंडल अध्यक्ष पूनम नौटियाल, चमन, एसबी भटट, किरण पासवान, मीना नौटियाल, सिंकदर ने नगर निगम के अधिकारियों के साथ मिलकर तकरीबन 70—80 लोगों की भीड को साथ लेकर एक साजिश के तहत उनके परिवार पर जानलेवा हमला किया था। जिसमें पार्षद संजय नौटियाल द्वारा उनपर चाकू से हमला किया एवं उसको व उसके परिवार को पेट्रोल से जिंदा जलाकर मारने की कोशिश भी की गयी थी। जो सीसीटीवी फुटेज में सभी ने देखा उसके बाद उल्टा उसके ऊपर ही 307 का मुकदमा दर्ज कर दिया गया था जो बाद में हाईकोर्ट ने हटा दिया था। उन्होंने बताया कि 10 महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अभी तक ना ही किसी को गिरफ्तार किया और न ही अभी तक चार्जशीट दायर कर पायी। जिसमें पुलिस की संलिप्ता भी इस वारदात को अंजाम देने में साफ नजर आती है। प्रवीण भारद्वाज ने बताया कि उसके द्वारा जब इस पूरे संदर्भ में आरटीआई लगाई गयी तब उसको पता चला कि संजय नौटियाल ने सोसाइटी की जमीन पर कब्जे की उसकी शिकायत पर नगर निगम की टीम पहुंची थी उसकी शिकायत पर उसका ही घर तोड दिया गया। जबकि उसका मकान तोडने का कोई आदेश नगर निगम आरटीआई में नहीं दे पाई। उन्होंने कहा कि अब मामला कोर्ट के संज्ञान में आया है जिसमें निगम के कर्मचारी ऋषिपाल सिंह, कुलदीप सरदार, ताराचंद, स्वंयवर दत्त भटट, कार्तिक आदि पर आठ धाराआें में व्रिQमिनल केस दर्ज हो गया है। अभी तक उसके द्वारा एसआईटी, डीएम, एडीएम में शिकायत दर्ज की जा चुकी है और सोसाइटी की जो जमीन पार्षद व उनके साथियों द्वारा कब्जाई गई थी उस पर एमडीडीए द्वारा ध्वस्त करने के आदेश जारी हो चुके हैं। लेकिन धरातल पर अभी तक कोई ध्वस्तीकरण नहीं हुआ है। एमडीडीए द्वारा ध्वस्तीकरण के लिए पुलिस फोर्स मांगी गयी लेकिन पुलिस की तरफ से कोई भी फोर्स नहीं दी गयी। उन्होंने बताया कि कब्जे धारी के विरूद्ध आवाज उठाने पर अभी तक उसके व उसके परिवार द्वारा बहुत बडी कीमत चुकानी पडी है। वह अभी तक उसे मानसिक प्रताडना से गुजर रहे हैं। पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों का उनको कोई सपोर्ट नहीं मिला अब उनको कोर्ट से उम्मीद है कि जल्द उनको इंसाफ मिल पाएगा।

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