Home News Posts उत्तराखंड अवैध कब्जों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी

अवैध कब्जों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी

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सरकारी जमीनों को कराया जाएगा मुक्त
धार्मिक स्थलों की आड़ में किए गए कब्जे

देहरादून। धार्मिक स्थलों की आड़ में सरकारी और जंगलात की जमीनों पर किए जा रहे अवैध अतिक्रमण पर अब शीघ्र बुलडोजर चलाया जा सकता है। इसके संकेत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा दिए जा चुके हैं उनका कहना है कि सरकारी जमीनों पर किया गया किसी भी तरह का अतिक्रमण हटाया जाएगा।
जानकारी के अनुसार नैनीताल और देहरादून में ऐसे अनेक स्थानों को चिन्हित किया गया है जहंा सरकारी जमीन पर मजार और मंदिर तथा अन्य धार्मिक स्थल बनाए गए हैं और उनकी आड़ में कच्चे पक्के निर्माण कराए जा चुके हैं। इन सभी के खिलाफ अब एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार दून और नैनीताल में सैकड़ों ऐसे स्थान है जहां एक समुदाय विशेष के लोग अपना अड्डा जमाए बैठे हैं तथा उन्होंने इन धार्मिक चिन्हों और स्थलों की आड़ में पूरी की पूरी कालोनियां बसा दी गई है।
मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि हमने अभी हाईकोर्ट के आदेश पर ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले, जिससे लोगों को परेशानी होती थी ऐसे 600 से अधिक लाउडस्पीकर विभिन्न धार्मिक स्थलों से उतरवाए गए हैं उन्होंने कहा कि राज्य में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और किसी भी गैर कानूनी अतिक्रमण को हटाए जाने में कोई दिक्कत या परेशानी नहीं होनी चाहिए। सरकारी व वन भूमि की जमीनों पर जहां भी अवैध अतिक्रमण हुआ है उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सीएम धामी का कहना है कि अभी हमने गैर कानूनी रूप से राज्य में रह रहे लोगों का सत्यापन अभियान चलाया था जिसमें बड़ी संख्या में ऐसे लोगों के बारे में डाटा तैयार किया गया है। राज्य के कई हिस्से ऐसे हैं जहां लोगों के द्वारा गैरकानूनी ढंग से जमीनों पर कब्जे किए गए हैं और अब दुकानें खोलकर चलाई जा रही हैं। उनका कहना है कि उनकी सरकार हिमाचल की तर्ज पर उत्तराखंड में भी एक सख्त भू—कानून लाएगी वही जिस यूनिफॉर्म सिविल कोड की घोषणा उनके द्वारा की गई है उन सभी मुद्दों पर सरकार काम कर रही है तथा उन्होंने जनता से जो वादे किए हैं उन्हें पूरा किया जाएगा। उनका साफ कहना है कि देवभूमि की संस्कृति और सभ्यता को अक्षुण बनाए रखने के लिए यह जरूरी है।
प्रदेश में हालांकि इस पर बहुत पहले काम शुरू हो चुका है बीते दिनों टिहरी बांध के निकट बनी एक मस्जिद को हटाया गया था जो टिहरी बांध के निर्माण के समय मजदूरों ने नमाज पढ़ने के लिए अस्थाई मस्जिद के रूप में विकसित किया था।

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