August 1, 2026देहरादून। पुलिस ने आंध्र प्रदेश के अंतर्राज्यीय चोर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 50 लाख रूपये के जेवरात व अन्य दस्तावेज बरामद कर लिये। पुलिस ने उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसको न्यायालय में पेश किया जहां से उसको न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।आज यहां इसकी जानकारी देते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोबाल ने बताया कि एम्स आवासीय परिसर निवासी रविन्द्र तिवारी द्वारा कोतवाली ऋषिकेश पर लिखित तहरीर देकर अवगत कराया गया कि किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा उनके आवास का ताला तोड़कर घर में रखे सोने—चाँदी के आभूषण एवं 60 हजार रूपये नकद चोरी कर लिए गए हैं। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी। घटना की गंभीरता को घटना के शीघ्र खुलासे एवं गिरफ्तारी हेतु आवश्यक दिशा—निर्देश देते हुये प्रभारी निरीक्षक ऋषिकेश के नेतृत्व में पुलिस टीम का गठन किया गया। गठित टीम द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण करते हुए, घटनास्थल के आसपास आने जाने वाले मार्गाे पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को चैक किया गया। पुलिस द्वारा किये जा रहे लगातार प्रयासो से मिली सूचना पर काली माता मंदिर, सात मोड़, देहरादून रोड ऋषिकेश के पास से मंडलपु शिवा अंजनेयुलू पुत्र मंडलपु कोटेश्वर राव, निवासी मेन रोड, ओप्पो रामालयम, एडलापाडु, जनपद गुंटूर, आंध्र प्रदेशर्, को गिरफ्तार किया गया। जिसके कब्जे से एक काले रंग का पिट्ठू बैग से भारी मात्रा में सोने—चाँदी के आभूषण, तीन आधार कार्ड, चोरी में प्रयुक्त पेचकस एवं अन्य सामान बरामद हुआ। बरामद ज्वैलरी के सम्बन्ध में पूछताछ में उसके द्वारा उक्त ज्वैलरी को ऋषिकेश एम्स तथा राजकोट गुजरात में की गयी 02 अलग—अलग घटनाओं में चोरी करना बताया गया। पूछताछ में उसके द्वारा बताया गया कि वह गंगा स्नान के लिये हरिद्वार तथा ऋषिकेश आया था तथा े एम्स ऋषिकेश स्थित आवासीय परिसर में रेकी के उपरान्त उसके द्वारा एक बन्द घर का ताला अपने पास रखे पेचकस से तोड़कर चोरी की घटना को अंजाम दिया गया था। जिसके बाद उसके द्वारा 27 जुलाई को उसने गुजरात के राजकोट स्थित सिविल अस्पताल परिसर में भी इसी प्रकार चोरी की घटना कारित की थी। उसके द्वारा बताई गई सूचना का गुजरात पुलिस से सत्यापन कराया गया, जिसमें उक्त घटना के सम्बन्ध में राजकोट के थाना प्रघुम्ननगर में मुकदमा दर्ज होना ज्ञात हुआ। गिरफ्तार आरोपी बेहद शातिर किस्म का अपराधी है जो बीमारी के बहाने अस्पताल परिसरों में घूमकर बन्द घरों की रैकी कर चोरी की घटनाओं को अंजाम देता है। पुलिस से बचने कि लिये उसके द्वारा अपने अलग—अलग नाम एवं विवरण वाले आधार कार्ड बनाये गये थे जिनका उपयोग वह चोरी से पूर्व होटलों, धर्मशालाओं आदि में ठहरने के लिए करता था। पूछताछ में उसका पूर्व में भी आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा एवं गुंटूर में चोरी के मामलों में जेल जाना प्रकाश में आया है। अन्य राज्यों से भी उसके आपराधिक इतिहास की जानकारी की जा रही है। पुलिस ने उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसको न्यायालय में पेश किया जहां से उसको न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
August 1, 2026हरिद्वार। भ्ौंस खरीदने गये एक व्यक्ति से तमंचे की नोक पर करीब एक लाख रूपये की नगदी लूटने के मामले मेेंं पुलिस ने कार्यवाही करते हुए चार लुटेरो को गिरफ्तार कर लिया है। जिनके पास से 80 हजार की नगदी व तमंचा कारतूस बरामद हुआ है। मामले में शामिल एक महिला आरोपी को पुलिस पूर्व में ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।जानकारी के अनुसार बीती 20 जुलाई को इमरान पुत्र अल्लादिया निवासी ग्राम सिहचंदी थाना भगवानपुर हरिद्वार द्वारा कोतवाली लक्सर में तहरीर देकर बताया गया था कि 14 जुलाई को उनके साथ अज्ञात 4 व्यक्तियों द्वारा मारपीट, गाली गलौच, व जान से मारने की धमकी देकर एक लाख रुपयें लूट लिए गये है। मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लुटेरों की तलाश शुरू कर दी गयी। लूट का खुलासा करने में जुटी पुलिस टीम द्वारा कडी से कड़ी जोड़कर घटना की एक महिला आरोपी को लूटी गयी धनराशि के साथ बीती 28 मार्च को गिरफ्तार कर लिया गया था। जबकि घटना में फरार चल रहे अन्य आरोपी लगातार अपने—अपने घरों से फरार रहकर गिरफ्तारी से बचने के लिये लगातार ठिकाने बदलकर रह रहे थे जो लूटी गयी धनराशी को आपस में बांटकर कही जाने के फिराक में थे। जिन्हे पुलिस ने देर रात मय लूटी गयी धनराशि के साथ लक्सर से हिरासत में लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों के नाम सुधांशु उर्फ काका पुत्र अवदेश उर्फ बाबूराम निवासी ग्राम अकौढा खुर्द थाना कोतवाली लक्सर जनपद हरिद्वार, वंश पुत्र देवेन्द्र निवासी ग्राम कंकरखाता कोतवाली लक्सर जनपद हरिद्वार, अनुज पुत्र मामचंद निवासी ग्राम अकौढा खुर्द थाना कोतवाली लक्सर जनपद हरिद्वार व आकाश पुत्र मेनपाल निवासी ग्राम अकौढा खुर्द थाना कोतवाली लक्सर जनपद हरिद्वार बताये जा रहे है।
August 1, 2026खटीमा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनसमस्याएं सुनकर अधिकारियों को त्वरित समाधान करने के निर्देश दिये।आज यहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोहियाहेड हेलीपैड स्थित कैंप कार्यालय में जनता एवं जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं और सुझावों को गंभीरता से सुना। इस अवसर पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को प्राप्त शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि जनसेवा ही सरकार का मूल उद्देश्य है और आमजन की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक शिकायत का संवेदनशीलता के साथ परीक्षण कर उसका प्रभावी समाधान किया जाए, ताकि लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश में सरलीकरण, समाधान और संतुष्टि के मंत्र के साथ कार्य कर रही है। शासन और प्रशासन की जवाबदेही तभी सार्थक होगी, जब आम नागरिक को उसकी समस्या का शीघ्र एवं संतोषजनक समाधान मिले। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से जनहित से जुड़े मामलों में पूर्ण गंभीरता, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने को कहा। मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों से भी क्षेत्र की विकास संबंधी आवश्यकताओं एवं जनहित के मुद्दों पर चर्चा की तथा आश्वस्त किया कि जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप विकास कार्यों को गति देने और नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है। इसके उपरान्त मुख्यमंत्री द्वारा खटीमा कैंप कार्यालय में 27 दिव्यांगजनों को 77 सहायक उपकरण और 22 वरिष्ठ नागरिकों को 113 सहायक उपकरण, 11 बैटरी रिक्शा, 14 व्हील चेयर, 18 कमोड चेयर, 06 ट्राई साइकिल, 24 हियरिंग मशीन, 40 नी ब्रेस,13 बैशाखी के अतिरिक्त वॉकर, वॉकिंग स्टिक, सिलिकॉन कुशन , सी पी चेयर का वितरण किये गए साथ ही ग्रामोत्थान रीप योजनांतर्गत नारी शक्ति ग्राम संगठन गदरपुर व सत्यमेव जयते सी एल एफ बाजपुर को बोलेरो वाहन तथा एकता सी एल एफ गदरपुर को फूड वैन की चाबी सौंपी। इस अवसर पर दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू,किशन सिंह किन्ना,गंभीर सिंह धामी, रणजीत सिंह नामधारी,मोहिनी पोखरिया, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, वीसी जय किशन, मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शासनी, अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्रा, जिला समाज कल्याण अधिकारी अमन अनिरुद्ध सहित अनेक जनप्रतिनिधि अधिकारी मौजूद थे।
August 1, 2026हजारों नागरिकों के वोट पर मंडराया संकट या सिर्फ जुबानी जंग मतदाता सूची की खामियों को मुद्दा बनाकर कांग्रेस का हल्ला बोल उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव के रण से पहले बढ़ी राजनीतिक तपिश देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया अब राजनीतिक विवाद का नया केंद्र बन गई है। कांग्रेस ने इस पूरी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और खामियों का आरोप लगाते हुए राज्यभर में मोर्चा खोल दिया है। पार्टी का दावा है कि यदि समय रहते कमियां दूर नहीं की गईं तो हजारों वास्तविक मतदाता मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं। वहीं सत्तारूढ़ भाजपा इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कह रही है कि चुनाव आयोग पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित कर रहा है। चुनावी वर्ष से पहले मतदाता सूची का पुनरीक्षण हमेशा महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन इस बार यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रह गई है। यह राजनीतिक संघर्ष का नया अखाड़ा बनती दिखाई दे रही है।प्रदेश कांग्रेस का आरोप है कि एसआईआर के दौरान कई स्थानों पर मतदाताओं के नाम बिना पर्याप्त सूचना के हटाए जा रहे हैं, नए मतदाताओं के पंजीकरण में अनावश्यक देरी हो रही है और बूथ स्तर पर पर्याप्त सत्यापन नहीं किया जा रहा। पार्टी नेताओं का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग रोजगार के कारण अस्थायी रूप से बाहर रहते हैं। ऐसे परिवारों के नाम हटने का खतरा बढ़ गया है। कांग्रेस का कहना है कि यदि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से बाहर हो गया तो लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत मताधिकार कमजोर होगी। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी जिला मुख्यालयों से लेकर राज्य स्तर तक ज्ञापन, धरना और विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रही है।भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को चुनाव से पहले भ्रम फैलाने की रणनीति बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण पूरी तरह चुनाव आयोग की संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसमें राजनीतिक दलों के बूथ एजेंटों को भी आपत्तियां और सुझाव देने का अवसर मिलता है। भाजपा का तर्क है कि यदि किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया है तो उसके लिए निर्धारित अपील और दावा-आपत्ति की व्यवस्था पहले से मौजूद है। ऐसे में कांग्रेस का विरोध केवल राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश है।इस पूरे विवाद के केंद्र में चुनाव आयोग है। आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और अद्यतन बनाना है ताकि मृत, स्थानांतरित या दोहरे नामों को हटाया जा सके और नए पात्र मतदाताओं को जोड़ा जा सके। हालांकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में केवल सूची की शुद्धता ही नहीं, बल्कि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। यही कारण है कि आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सभी दलों की निगाहें टिकी हुई हैं।उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में एसआईआर की प्रक्रिया मैदानी राज्यों से कहीं अधिक जटिल है। बड़ी संख्या में लोग रोजगार, शिक्षा और व्यवसाय के लिए दिल्ली, चंडीगढ़, मुंबई या अन्य शहरों में रहते हैं, जबकि उनका स्थायी निवास गांवों में है। कई गांवों में पलायन के कारण परिवार वर्ष के अधिकांश समय बाहर रहते हैं। यदि ऐसे मामलों में पर्याप्त सत्यापन के बिना नाम हटाए जाते हैं तो विवाद स्वाभाविक रूप से बढ़ सकता है। यही मुद्दा कांग्रेस जोर-शोर से उठा रही है।इस बार पहली बार मतदान करने वाले युवाओं का पंजीकरण भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। कांग्रेस का आरोप है कि कई कालेजों और दूरदराज क्षेत्रों में जागरूकता अभियान पर्याप्त नहीं है। वहीं भाजपा दावा कर रही है कि युवा मतदाताओं को जोड़ने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एसआईआर का विवाद केवल मतदाता सूची तक सीमित नहीं है। इसके पीछे आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति भी जुड़ी हुई है। कांग्रेस इसे लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा का मुद्दा बनाकर जनता के बीच ले जाना चाहती है, जबकि भाजपा चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए विपक्ष के आरोपों को चुनावी राजनीति का हिस्सा बता रही है। यदि यह मुद्दा लगातार गर्माता है तो आने वाले महीनों में यह बेरोजगारी, महंगाई और पलायन जैसे मुद्दों के साथ चुनावी विमर्श का प्रमुख हिस्सा बन सकता है।अब निगाहें इस बात पर हैं कि चुनाव आयोग कांग्रेस द्वारा उठाए गए मुद्दों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान प्राप्त दावों एवं आपत्तियों का किस प्रकार निस्तारण करता है। यदि प्रक्रिया पारदर्शी, समयबद्ध और तथ्यपरक रही तो विवाद स्वतः शांत हो सकता है। लेकिन यदि किसी भी स्तर पर बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम छूटने या हटने की शिकायतें सामने आती हैं, तो यह मामला राजनीतिक से आगे बढ़कर संवैधानिक बहस का विषय भी बन सकता है।मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद है। इसलिए उस पर उठने वाला हर सवाल स्वाभाविक रूप से गंभीर होता है। विपक्ष का अधिकार है कि वह संभावित खामियों की ओर ध्यान दिलाए, वहीं चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच कर प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखे। फिलहाल उत्तराखंड में एसआईआर केवल एक प्रशासनिक कवायद नहीं, बल्कि चुनावी राजनीति का नया रणक्षेत्र बन चुका है।
August 1, 2026देहरादून। मसूरी के लक्ष्मण पुरी में मुस्लिम समुदाय की पुरानी संरचना पर प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ मुस्लिम समुदाय ने आव्रQोश जताते हुए जाम लगाकर कार्यवाही का विरोध किया। समाचार लिखे जाने तक विरोध प्रदर्शन जारी था।आज यहां जिला प्रशासन की टीम मसूरी स्थित लक्ष्मण पुरी में स्थित एक मुस्लिम समुदाय की संरचना को ध्वस्त करने के लिए पहुंची। जिला प्रशासन की टीम के पहुंचते ही वहां काफी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग एकत्रित हो गये और प्रशासन की कार्यवाही का विरोध करने लगे।उन्होंने जिला प्रशासन को उक्त स्थान के दस्तावेज व अंग्रेजों के समय 1914 का नक्शा दिखाया। रजिस्ट्री के कागजात भी जिला प्रशासन की टीम को दिखाये। उनका कहना था प्रशासन यहां पर भारी संख्या में पुलिस फोर्स लेकर आये हैं जिससे यहां का माहौल खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना था कि यह प्रशासन व सरकार का तानाशाही रवैया है। पहले प्रशासन ने कहा कि मस्जिद की मीनार हटा दो तो उनके द्वारा स्वंय मीनार तोड दी गयी। उनका कहना था कि यह कब्रिस्तान 1914 से है तथा यहां पर उनके बुजुर्ग लोगों की कब्र है। उनका कहना था कि यह 200 साल पुराना कब्रिस्तान है जिसमें उनके द्वारा बारिश से बचने के लिए एक कमरे का निर्माण किया गया है। प्रशासन के रवैये को देखते हुए लोगों ने वहां जाम लगा दिया। समाचार लिखे जाने तक बवाल जारी था।
August 1, 2026देहरादून। कांग्रेस प्रवक्ता व अधिवक्ता पंकज सिंह क्षेत्री ने कहा कि स्पेशल विजिलेंस कोर्ट से नोटिस के बाद कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को जांच पूरी होने तक पद से हटया जाए।आज यहां परेड ग्राउण्ड स्थित एक क्लब में पत्रकारो सेे वार्ता करते हुए उनके द्वारा मुख्यमंत्री को पत्र प्रेषित कर मांग की है कि प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के विरूद्ध अपनी घोषित जीरो टॉलरेंस नीति को व्यवहार में सिद्ध करते हुए स्पेशल विजिलेंस कोर्ट द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुडे प्रकरण में नोटिस जारी होने के उपरांत कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को जांच पूर्ण होने तक मंत्री मंडल से पृथक करें। उन्होंने कहा कि विशेष न्यायाधीश सतर्कता अधिष्ठान द्वारा 25 जुलाई को पारित आदेश के तहत मंत्री गणेश जोशी को बीएनएसएस के प्रावधानों के अनुसार नोटिस जारी कर तीन सितम्बर को न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि न्यायालय की प्रव्रिQया का सम्मान करते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना सरकार की संवैधानिक एवं नैतिक जिम्मेदारी है। क्षेत्री ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध होने से पूर्व दोषी नहीं माना जा सकता है किन्तु लोकतांत्रिक व्यवस्था में नैतिक उत्तरदायित्व और जनविश्वास सर्वोपरि है। यदि सरकार वास्तव में भ्रष्टाचार के विरूद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है तो जांच पूरी होने तक संबंधित मंत्री को पद से अलग कर पूरे प्रदेश में स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि कानून और नैतिकता सत्ता से ऊपर है। पंकज क्षेत्री ने भ्रष्टाचार के विरूद्ध जनभागीदारी बढाने के उददेश्य से एक हेल्पलाइन नम्बर भी जारी किया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार से संबंधित किसी भी शिकायत की सूचना मोबाइल नंबर 9412001234 पर दी जा सकी है। प्राप्त शिकायत का परीक्षण कर अधिवक्ता पंकज सिंह क्षेत्री द्वारा पात्र मामलों में निःशुल्क विधिक सहायता एवं पैरवी की जाएगी, ताकि भ्रष्टाचार के विरूद्ध आम नागरिक निर्भीक होकर अपनी आवाज उठा सकें। इस अवसर पर प्रवक्ता श्रीमती सुजाता पॉल, आशीष नौटियाल, आशीष सैनी, हिमांशु बहुगुणा भी उपस्थित रहे।