सर्दी के मौसम के साथ ही कोरोना का कहर तेज होता जा रहा है। रोजाना पांच—छह सौ के बीच संक्रमितों के आंकड़े सामने आ रहे हैं तो वहीं कोरोना संक्रमण से बीते रोज तीन मौतें भी हो चुकी हैं। उत्तराखण्ड में अब तक संक्रमितों की संख्या 1425 तक पहुंच गई है। जो एक चितांजनक हालात को दर्शा रहे है। कुछ दिनों की शांति के बाद सरकारी कार्यालयों में भी फिर से कोरोना का खौफ दिखाई देने लगा है। कोविड जांच के चलते अब लोग छोटे—मोटे जुकाम और बुखार को छुपा रहे हैं या फिर हल्के में ले रहे हैं। हालांकि राज्य में संक्रमितों कें ठीक होने वालों की संख्या भी लगभग ठीक ही कही जा सकती है। बाजारों के खुलने व चुनावी मौसम में लोगों की लापरवाही ने संक्रमण को बढ़ा दिया है। यदि लोग सतर्क रहें और कोविड गाइडलाइन का पूर्ण रूप से पालन करें तो संक्रमण को काफी हद तक काबू में किया जा सकता है। एक व्यक्ति के कारण कई लोग संक्रमित हो जाते हैं और जब तक एक का पता चलता है तब तक उनसे कई लोग मिल चुके होते हैं और संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं। इन दिनों बाजार में भी जबरदस्त भीड़ उमड़ रही है। साथ ही चुनावी बेला में नेता जनसभाओं में जुट रहे है यह कोरोना को बढ़ाने में सहायक बन रहा है। हालांकि कोरोना की चेन को तोड़ने के लिए दून में रात्रि कर्फ्यू लगाया जा चुका है, लेकिन कोरोना की रफ्तार नहीं थम रही है। जिन क्षेत्रों में कोरोना संक्रमित मिल रहे हैं उन क्षेत्रों को कंटेजनमेंट जोन बना कर वहां सख्ती तो की जा रही है लेकिन अन्य क्षेत्रों में तो लापरवाही ही सामने आ रही है। पुलिस और प्रशासन की तमाम सख्ती के बाद भी लोग इतने लापरवाह हो चुके हैं कि वे कोरोना के बढ़ते कहर को समझने के लिए तैयार ही नहीं हैं कि यह संक्रमण उन लोगों को भी चपेट में ले सकता है। यदि लोग स्वयं ही सतर्क और जागरूक रहेंगे तो कोरोना संक्रमण को रोकने में मदद मिल सकती है और लोगों की जिंदगियां भी बचाई जा सकती है। इसके लिए पुलिस प्रशासन के भरोसे रहने की बजाय लोगों को स्वयं ही ध्यान देना होगा।

