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गुलदार और भालू के बाद ‘नई आफत’

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  • पहाड़ों में खूंखार आवारा कुत्तों का कहर, गांवों और रास्तों पर बना दहशत का माहौल
  • चमोली के नारायणबगड़ में हिंसक कुत्तों के डर से 10 स्कूलों में 4 दिन का अवकाश घोषित
  • स्कूल बंद होने के चलते अब घर बैठे आनलाइन माध्यम से पढ़ाई करने को मजबूर छात्र
  • मीलों पैदल सफर तय कर स्कूल जाने वाले नौनिहालों व अभिभावकों की उड़ी रातों की नींद

देहरादून। पहाड़ में वन्यजीवों के बाद अब आवारा और हिंसक कुत्तों का आतंक भी लोगों के लिए चिंता का सबब बनता जा रहा है। चमोली जिले के नारायणबगड़ क्षेत्र में आवारा और हिंसक कुत्तों के बढ़ते आतंक को देखते हुए प्रशासन ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर बड़ा फैसला लिया है। क्षेत्र के दस विद्यालयों में 20 अगस्त से 23 अगस्त तक छात्र-छात्राओं के लिए अवकाश घोषित कर दिया गया है। इस दौरान विद्यालयों में ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
पहाड़ के दूरदराज इलाकों में बच्चों का स्कूल तक पहुंचना पहले ही किसी चुनौती से कम नहीं है। कई बच्चे पैदल रास्तों से होकर विद्यालय पहुंचते हैं। ऐसे में रास्तों में हिंसक कुत्तों के झुंड का खतरा बच्चों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा रहा है। प्रशासन को बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल बंद करने जैसा कदम उठाना पड़ा, यह स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कभी बाघ और गुलदार की दस्तक, कभी भालू का आतंक और अब आवारा कुत्तों के झुंड ग्रामीण आबादी के सामने नई चुनौती बनते जा रहे हैं। सवाल यह है कि जिन पहाड़ी क्षेत्रों में बच्चों को रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचना पड़ता है, वहां उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
नारायणबगड़ क्षेत्र में आवारा और हिंसक कुत्तों के आतंक को लेकर जिलाधिकारी चमोली की ओर से दिए गए निर्देशों के बाद मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने विद्यालयों के लिए आदेश जारी किया। आदेश में संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारी और उप शिक्षा अधिकारी को इसका अनुपालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही अवकाश की अवधि में संबंधित विद्यालयों के शिक्षकों को आनलाइन माध्यम से शिक्षण कार्य संचालित करने को कहा गया है, ताकि बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित न हो।इस संबंध में मुख्य शिक्षा अधिकारी, चमोली की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि नारायणबगड़ क्षेत्र में आवारा और हिंसक कुत्तों के अत्यधिक आतंक को देखते हुए जिलाधिकारी चमोली के निर्देशों के अनुपालन में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के दृष्टिगत यह निर्णय लिया गया है।
आदेश के मुताबिक नारायणबगड़ क्षेत्र के राजकीय इंटर कालेज नारायणबगड़, राजकीय बालिका इंटर कालेज नारायणबगड़, सरस्वती शिशु मंदिर नारायणबगड़, उत्तरांचल विद्या निकेतन नारायणबगड़, राजकीय प्राथमिक विद्यालय नारायणबगड़, श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल पैंती, राजकीय प्राथमिक विद्यालय नलंगाव, राजकीय इंटर कालेज नलंगाव, माडर्न चिल्ड्रन एकेडमी नारायणबगड़ और उत्तराखंड विद्या निकेतन नारायणबगड़ में यह आदेश लागू रहेगा।

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वन्यजीवों के बाद आवारा कुत्तों का संकट
उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष लंबे समय से गंभीर समस्या बना हुआ है। पहाड़ के गांवों में बाघ, गुलदार और भालू की आवाजाही से ग्रामीणों में भय बना रहता है। अब कई क्षेत्रों में आवारा और हिंसक कुत्तों के झुंड भी लोगों की सुरक्षा के लिए चुनौती बन रहे हैं। नारायणबगड़ का ताजा मामला इस बात का संकेत है कि पहाड़ी क्षेत्रों में मानव सुरक्षा का संकट केवल जंगल से आने वाले वन्यजीवों तक सीमित नहीं रह गया है। सड़कों, बाजारों और आबादी के आसपास घूमने वाले आवारा कुत्ते भी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बन चुके हैं। चार दिन के लिए स्कूल बंद करने का फैसला बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से तत्काल राहत जरूर है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि 23 अगस्त के बाद क्या होगा? यदि कुत्तों के आतंक पर स्थायी नियंत्रण नहीं हुआ तो बच्चों की पढ़ाई, अभिभावकों की चिंता और ग्रामीणों की सुरक्षा का सवाल फिर सामने खड़ा होगा। अब निगाह प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है कि वह केवल स्कूल बंद करने तक सीमित रहता है या आवारा और हिंसक कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम भी उठाता है।

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