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उत्तराखंड की पालिटिक्स में ‘नया क्लेश’

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  • भाजपा विधायक दिलीप रावत की वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर टिप्पणी से आया राजनीति में भूचाल
  • पब्लिक नाराज, विपक्ष भी आगबबूला, बीजेपी विधायक के लिए भारी पड़ा पब्लिक अपीयरेंस
  • चुनावी साल में भाजपा के लिए नया सिरदर्द, विधायक दिलीप रावत आए विपक्ष के निशाने पर

देहरादून। लैंसडाउन से भाजपा विधायक दिलीप रावत के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दिए गए विवादित बयान ने उत्तराखंड की राजनीति में नया बवंडर खड़ा कर दिया है। पेशावर कांड के नायक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर चंद्र सिंह गढ़वाली को लेकर की गई टिप्पणी के बाद विपक्ष ने भाजपा पर जोरदार हमला बोल दिया है। कांग्रेस और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इसे उत्तराखंड की अस्मिता और स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का अपमान बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
बता दें कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने 23 अप्रैल 1930 को पेशावर में निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के ब्रिटिश आदेश को मानने से इनकार कर दिया था। उनके इस ऐतिहासिक निर्णय ने उन्हें भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अमर नायकों की श्रेणी में खड़ा कर दिया। विधानसभा चुनाव की आहट के बीच सामने आया यह विवाद भाजपा के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। पार्टी जहां विकास और सुशासन के मुद्दों पर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है, वहीं विधायक के बयान ने विपक्ष को नया राजनीतिक हथियार दे दिया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा के नेता लगातार उन महापुरुषों के सम्मान को ठेस पहुंचा रहे हैं, जिन पर उत्तराखंड को गर्व है। पार्टी नेताओं ने कहा कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली किसी एक दल या विचारधारा के नहीं, बल्कि पूरे देश की धरोहर हैं।
गढ़वाल क्षेत्र के कई सामाजिक संगठनों और बु(िजीवियों ने भी बयान पर नाराजगी जताई है। सोशल मीडिया पर भी मामला तेजी से तूल पकड़ रहा है। लोगों का कहना है कि जिस व्यक्ति ने अंग्रेजी हुकूमत के आदेश को ठुकराकर मानवता और देशभक्ति की मिसाल पेश की, उसके योगदान पर सवाल खड़े करना या उसके प्रति असम्मानजनक टिप्पणी करना जनभावनाओं को आहत करने वाला है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तराखंड में स्वतंत्रता सेनानियों और राज्य के गौरव पुरुषों को लेकर जनता बेहद संवेदनशील रही है। ऐसे में यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन सकता है। भाजपा के सामने अब दोहरी चुनौती हैकृएक ओर विपक्ष के हमलों का जवाब देना और दूसरी ओर जनता के बीच पैदा हुई नाराजगी को शांत करना।
उत्तराखंड की राजनीति में इतिहास और क्षेत्रीय गौरव से जुड़े मुद्दे हमेशा भावनात्मक रहे हैं। ऐसे में दिलीप रावत के विवादित बयान ने चुनावी मौसम में नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है और भाजपा-कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप की लड़ाई को और धार दे सकता है।

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