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अराजकता की फसल बोई किसने?

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देवभूमि उत्तराखंड के शासन—प्रशासन को अब अराजकता कि जिस समस्या से दो—चार होना पड़ रहा है उसके लिए कौन जिम्मेदार है? अराजकता की यह फसल किसने बोई है इस सवाल का जवाब अब हर आम उत्तराखंड वासी के जहन को मथ रहा है। अभी तीन—चार दिन पूर्व कर्णप्रयाग में कुछ निहंग सिखों के साथ स्थानीय लोगों का जो विवाद हुआ था उसमें हम सभी ने इन सरदारों को तलवारे भांजते हुए देखा। लेकिन इस तरह की स्थिति पैदा क्यों हुई? किसकी गलती थी इसको कोई नहीं जानता। ट्रक में ड्राइवर की सीट पर बैठे एक सिख पर स्थानीय युवकों द्वारा लाठी डंडे चलाए जा रहे हैं थोड़ी देर बाद यह सिख युवक नंगी तलवार हाथ में लेकर ट्रक से नीचे कूदता है यूवको को ललकारता है और हम लाचारी में जान बचाकर भागते दिखते हैं। अब खबर आ रही है कि कुछ निहंगों ने जिनकी संख्या 8—10 बताई जा रही है, कर्णप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारे को हाईजैक कर लिया गया है। आइटीबीपी व स्थानीय पुलिस तथा अधिकारी उन्हें समझाने में विफल हो चुके हैं सेना की मदद लेने के साथ—साथ अब पुलिस के बड़े अधिकारी भी यहां पहुंच चुके हैं। लग रहा है कि बिना किसी बड़े ऑपरेशन के अब गुरुद्वारे को इनसे मुक्त नहीं कराया जा सकता है। बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर आई कुछ खबरों को लेकर पंजाब के सिख समुदाय में भारी आक्रोश है वह इस बात को लेकर नाराज हैं क्योंकि गुरुद्वारों के प्रबंध समितियोंं ने उन निहंग सिखों का साथ नहीं दिया जिन्हें तलवारबाजी के मामले में पुलिस ने जेल भेजा है। खैर कुल मिलाकर कर्णप्रयाग की इस घटना के बाद हालत अत्यंत ही तनावपूर्ण बने हुए हैं जिसका प्रभाव चारधाम यात्रा तथा हेमकुंड साहिब यात्रा पर ही नहीं पड़ रहा है अपितु उत्तराखंड से लेकर पंजाब तक दिखाई दे रहा है। अब तक जो अलगाव की आग हिंदू—मुसलमानों और उनके धार्मिक प्रतीक चिन्हो व स्थलों को लेकर देखी जा रही थी वह अब गुरुद्वारों को भी अपनी जद में ले चुकी है। अराजकता और अलगाव वाद की यह आग सामाजिक परिवेश में जिस तरह का जहर घोल रही है उसका अंतिम नुकसान आम आदमी को ही हो रहा है। नफरत के इस जहर का किसी भी राजनीतिक दल और नेता को फायदा या नुकसान हो लेकिन समाज का भाईचारा और सौहार्द समाप्त हो रहा है। अभी बीते दिनों घटित हुई कुछ घटनाओं ने उत्तराखंड और हरियाणा के बीच गहरी खाई को दी थी अब उत्तराखंड और पंजाब के साथ भी कुछ वैसे ही हालात बनते दिखाई दे रहे हैं। भले ही गुरुद्वारे पर कब्जा करने वालो से शासन—प्रशासन किसी भी तरह निपट ले लेकिन पहाड़ की फिजाओं में जो नफरत और सांप्रदायिकता का जहर घुलता जा रहा है वह देवभूमि की देव संस्कृति के लिए अत्यंत ही नुकसानदेह है। दरअसल उत्तराखंड की वर्तमान सरकार जो उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के पद चिन्हों पर चलने और उनके अनुसरण पर चल रही है यूपी की तर्ज पर यहां भी बुलडोजर की संस्कृति को ही प्राथमिकता दी जा रही है। भाजपा नेताओं की यह मजबूरी जैसा बनकर रह गया है कि सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को हाई कमान के अनुरूप ही काम करना है तभी वह कुर्सी पर बने रह सकते हैं। लेकिन यह भी समझने की जरूरत है कि हर राज्य की स्थितियां और परिस्थितियों अलग—अलग होती हैं। उत्तराखंड राज्य की आर्थिकी की रीड पर्यटन है अलगाव वाद में उसकी अर्थव्यवस्था का प्रभावित होना स्वाभाविक है।

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