देश की आधी आबादी को अपने पक्ष में रखने के लिए जारी राजनीतिक रस्साकशी में पक्ष—विपक्ष के नेताओं ने अपना क्या खूब तमाशा बनाया हुआ है? इसे देश की मातृशक्ति तो देख ही रही है साथ—साथ लोग भी इसका भरपूर लुत्फ ले रहे हैं। सत्तारूढ़ भाजपा जिसने 3 साल पूर्व नारी वंदन बिल लाकर इस
आधी आबादी के वोट बैंक को अपने पाले में खींच लिया था उसकी एक गलती से अब जीती हुई बाजी हारती दिख रही है। भाजपा सरकार इस आरक्षण बिल को एक दशक तक लंबित रखने की गलती न की होती तो उसे न तो बिहार में लाखों महिलाओं के खातों में 10 हजार नगद डालने की जरूरत पड़ती न प्रधानमंत्री को आरक्षण संशोधन बिल व परिसीमन बिल गिरने पर घड़ियाली आंसू बहाने और न राष्ट्रीय संबोधन की जरूरत पड़ती जिसे लेकर अब उनकी चारों तरफ निंदा हो रही है। लोकसभा में बिल पारित न होने के बाद 18 अप्रैल को प्रधानमंत्री ने जो राष्ट्र के नाम संबोधन किया उसने तो उनका सारा ही खेल खराब कर दिया। इस राष्ट्रीय संबोधन में पीएम मोदी ने राष्ट्रहित की कोई एक बात भी न कहते हुए सिर्फ विपक्षी दलों पर महिलाओं का विरोधी होने, पाप करने तथा महिलाओं का अपमान करने का आरोप लगाते हुए यही कहा गया कि महिलाएं अपना अपमान कभी नहीं भूलती हैं और वह अब इन दलों व नेताओं को करारा सबक सिखाएगी। उनका यह राष्ट्रीय संबोधन सिर्फ चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन ही नहीं था सरकारी टीवी और रेडियो पर प्रसारित होने वाले संबोधन को लेकर जहां देश के 700 लोगों ने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है वहीं कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा अध्यक्ष को खत लिखकर सांसदों के विशेषाधिकार हनन का मामला बताते हुए पीएम मोदी के खिलाफ कार्यवाही करने की बात कही गई है। सांसदों के विशेषाधिकार का दोषी पाए जाने पर उनकी संसद की सदस्यता निलंबित किए जाने से लेकर जेल की सजा तक का प्रावधान है लेकिन हम सभी को यह पता है कि लोकसभा अध्यक्ष और मुख्य चुनाव आयुक्त उन पर कोई कार्रवाई करने वाले नहीं है। लेकिन समूचे विपक्ष ने देश भर में इस बात का प्रचार प्रसार करने के लिए महिलाओं को आरक्षण के नाम पर भाजपा सरकार और पीएम मोदी द्वारा जो संसद से लेकर अपने राष्ट्रीय संबोधन तक नौटंकी कर रहे हैं इसका उद्देश्य महिलाओं को क्या आरक्षण दिलाना था। इसके पीछे उनकी मंशा महिलाओं का हक हड़पने और उनके वोट पर एकाधिकार के जरिए हमेशा सत्ता में बने रहने का एजेंडा ही छिपा था जिसे विपक्ष द्वारा नाकाम कर दिया गया है। इन बिलों के गिरने के बाद भाजपा ने पार्टी की महिलाओं को विरोध प्रदर्शन के लिए उतारा जरूर गया है लेकिन देश की महिलाएं जो उनके मंसूओं को जान समझ चुकी थी उन्होंने भाजपा के इस शो को भी फ्लाप कर दिया है। अब इसे लेकर आम महिलाएं तमाम उन महिला अपराधों को सामने रखकर जिनमें भाजपा नेताओं की संलिप्तता चर्चाओं में रही हैं उनसे ही पूछ रही हैं क्या यही है भाजपा का महिलाओं को दिए जाने वाला सम्मान। कुल मिलाकर भाजपा का यह दांव अब भाजपा पर ही भारी पड़ चुका है। मीडिया खास तौर पर सोशल मीडिया पर इस पूरे प्रकरण को लेकर मोदी और भाजपा पर जबरदस्त हमले किए जा रहे हैं। राजनीति के ज्ञाता तो यहां तक कह रहे हैं कि भाजपा और मोदी ने कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों को फिर से जिंदा होने का अवसर दे दिया है बात सिर्फ यहीं खत्म नहीं हो जाती है अब इसे लेकर भाजपा के नेताओं के बीच भी भारी मतभेद उभर कर सामने आ रहे हैं। महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण भले ही मिलना तय हो गया हो लेकिन भाजपा को भविष्य में इसका कोई राजनीतिक लाभ होगा इसकी संभावनाएं तो समाप्त हो ही गई है बल्कि इसका उल्टा नुकसान ही होने वाला है।




