शाह का संदेश

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अपनी जनसभा और टोली बैठक के जरिए गृहमंत्री सूबे के भाजपा नेताओं को यह स्पष्ट कर गए हैं कि तीसरी बार सत्ता में बने रहना है तो क्या करना है? भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के लिए यह बात कोई मायने नहीं रखती है कि मंत्रिमंडल के 4 साल से खाली पड़े पद भरे जाएंगे या मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह अपने पद पर कब तक बने रहेंगे? तथा उत्तरदायित्वों का बटवारा कब होगा। हरिद्वार की जनसभा में दिया गया उनका भाषण पूरी तरह चुनावी भाषण था। जिस तरह भाजपा ने अपने चुनावी भाषण में चिर परिचित अंदाज में जनता से कहा था कि अरे भाई आपकी आवाज को क्या हो गया? यह उत्तराखंड के लोगों की आवाज तो नहीं है जरा जोर से मुट्ठी भीच करने के साथ यह नारा लगाइए। तीसरी बार फिर भाजपा सरकार। जय श्री राम यह अलग बात है कि भीड़ ने फिर भी वैसा नहीं दिखाया जैसा कि वह देखना चाहते थे। उन्होंने अपने संबोधन में सिर्फ सीएम धामी के 4 साल के काम की बात नहीं रखी बल्कि भाजपा के 9 साल के शासन और पूर्व सीएम त्रिवेंद्र को भी कम तवज्जो न देकर भाजपा नेताओं को साफ संकेत दिए कि पार्टी में बीते कुछ समय से जो गुटबाजी हो रही है उसे बंद किया जाना चाहिए। यह अलग बात है कि भाजपा नेता अभी भी इसके कई मायने निकाल रहे हैं तथा सूबे में चुनाव पूर्व बड़ा फेर बदल के रूप में देख रहे हैं। अमित शाह इस बात को अच्छे से जानते हैं कि इन 9 सालों में बहुत कुछ ऐसा हुआ है जो भाजपा के लिए ठीक नहीं रहा है वह फिर भी अपनी सरकार पर एक भी भ्रष्टाचार का आरोप न होने और प्रदेश के युवाओं को पारदर्शी तरीके से नौकरियां दिए जाने के दावे जरूर कर रहे थे लेकिन भर्तियों में धांधली और पेपर लीक के मुद्दों पर हुई किरकिरी तथा सीबीआई जांच तक पहुंची इस कहानी का सच क्या है तथा भ्रष्टाचार और खनन माफियाओं का राज किस कदर हावी है यह उनसे भी छिपा हुआ नहीं है। रही सही कमी को अंकिता भंडारी हत्याकांड ने पूरी कर दी है जिसमें अब हरिद्वार की धरती से ऐसे—ऐसे सनसनीखेज खुलासे हुए हैं जिसमें केंद्रीय नेता तक के नाम जुड़ते जा रहे हैं तथा इसे लोग उत्तराखंड की एक स्टीन फाइल तक के नाम से प्रचारित कर रहे हैं। प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम से लेकर तमाम संगठन से जुड़े बड़े नेताओं के दामन तक इसकी आंच पहुंच चुकी है। तमाम समस्याओं से जूझ रही भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को इस बात का एहसास बखूबी हो चुका है कि तीसरी बार फिर भाजपा सरकार का सपना साकार करना बहुत मुश्किल है। यही कारण है कि अमित शाह ने हरिद्वार की धरती से भाजपा नेताओं को संदेश दिया है कि इन तमाम मुद्दों में न उलझे। अब सिर्फ चुनावी रणनीति पर विचार करें तो चुनावी चर्चाओं में जुटे। भले ही अभी चुनाव में एक साल का समय शेष सही लेकिन शाह राज्य में चुनावी प्रचार का शंखनाद कर गए हैं। उन्होंने सूबे के शीर्ष नेताओं जिन्हें भाजपा की टोली बैठक का नाम दिया गया है उन्हें भी अपनी मंशा को समझा दिया गया है। देखना यह है कि अब वह शाह की बातों या दिशा निर्देशों पर कितना गौर करते हैं?

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