नई दिल्ली। हरियाणा की फरीदाबाद जिला जेल में एक बड़ी सुरक्षा चूक के बीच हाई सिक्योरिटी बैरक में बंद संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान की हत्या कर दी गई है। अयोध्या में आतंकी साजिश रचने के आरोप में बंद 19 वर्षीय रहमान पर उसी जेल में बंद कैदी अरुण चौधरी ने जानलेवा हमला किया। बताया जा रहा है कि सिर पर जोरदार प्रहार कर इस वारदात को अंजाम दिया गया। जेल के भीतर हुई इस हत्या ने प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है।
अब्दुल रहमान को 2 मार्च को गुजरात एटीएस और फरीदाबाद पुलिस ने एक संयुक्त ऑपरेशन के दौरान पाली गांव से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के वक्त उसके पास से दो जिंदा बम बरामद हुए थे, जिससे सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई थीं। जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ था कि रहमान अयोध्या में किसी बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने की फिराक में था। उसकी उम्र महज 19 साल थी और उसे बेहद खतरनाक मानते हुए हाई सिक्योरिटी सेल में रखा गया था। रहमान की हत्या का आरोपी अरुण चौधरी पहले जम्मू-कश्मीर की जेल में बंद था, जहां से उसे हाल ही में फरीदाबाद शिफ्ट किया गया था। वह भी हाई सिक्योरिटी बैरक का हिस्सा था। अब सबसे बड़ा सवाल जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर खड़ा हो रहा है कि कड़े पहरे के बावजूद यह खूनी संघर्ष कैसे हुआ? पुलिस अब अरुण चौधरी से पूछताछ कर रही है ताकि हत्या के पीछे की असली वजह और किसी अन्य की संलिप्तता का पता लगाया जा सके। अब्दुल रहमान की गिरफ्तारी महज एक सामान्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि एक बड़े आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने का परिणाम थी। गुजरात एटीएस ने फरीदाबाद पुलिस के साथ मिलकर जब उसे दबोचा, तो उसके पास से बरामद दो जिंदा बमों ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी थी। सुरक्षा एजेंसियों के पास पुख्ता इनपुट थे कि वह अयोध्या जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल को निशाना बनाकर देश में सांप्रदायिक तनाव और दहशत फैलाने की फिराक में था। 19 साल की उम्र में इतनी बड़ी और खौफनाक साजिश रचने वाले रहमान को इसीलिए हाई-सिक्योरिटी जेल के ‘अति सुरक्षित’ बैरक में रखा गया था। हालांकि, जेल की सलाखें उसे कानूनी सजा मिलने से पहले ही मौत के साये से नहीं बचा सकीं। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या उसकी हत्या के पीछे अयोध्या साजिश से जुड़ी कोई रंजिश थी या फिर यह दो कैदियों के बीच अचानक उपजा विवाद था।




