तमाम सख्त कानून, सामाजिक जागरूकता और प्रशासनिक सर्तकता के बावजूद देश व प्रदेश में अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे है। बात अगर उत्तराखण्ड की करें तो यहंा भी पहले की तुलना में अपराधों की स्थिति चितंाजनक बनी हुई है। ताजा मामला विगत शनिवार को नैनीताल में सामने आया है। जहंा काशीपुर के किसान द्वारा खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली गयी। आत्महत्या से पूर्व उसका सोशल मीडिया में वीडियों प्रसारित हुआ था कि उसके साथ कुछ लोगों द्वारा 4 करोड़ का जमीनी फर्जीवाड़ा किया गया है। जारी वीडियों में यह भी कहा गया है कि जब उसने मामले में पुलिस से शिकायत की तो उसे पुलिस द्वारा प्रताड़ित किया गया। जिसके कारण उसे आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा। इस मामले में केवल ठगी का शिकार बनाने वाले ही नहीं पुलिस भी बराबर की दोष है। ख्ौर अब मामले की जांच कुंमाऊ आयुक्त कर रहे हैै। ऐसे मामले को देखकर क्या हम इस समाज को जिसमें हम रह रहे है उसे एक जिंदा व संजीदा समाज कह सकते है? वास्तव में यह एक मृत समाज नहीं है तो और क्या है? ऐसा नहीं है कि देश व राज्य में इस तरह की यह कोई पहली घटना है। अभी कुछ वर्ष पूर्व राज्य में घटित हुए अंकिता भण्डारी हत्याकांड ने पूरे देश में सनसनी फैला दी थी। अब एक बार फिर यह हत्यकांड सुर्खियों मं है क्योंकि इसमें अभी भी कई सवाल छिपे हुए है। जैसे अंकिता व पुलकित आर्य का फोन बरामद न होना। वहीं वनंत्रा रिजार्ट पर घटना के बाद त्वरित बुल्डोजर कार्यवाही होना तथा अभी तक उस तथाकथित वीआईपी का गिरफ्तार न किया जाना, कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान उठाता है। हां इन घटनाआें पर राजनीति होते हुए जरूर देखी गयी। दिल्ली के निर्भया कांड से लेकर निठारी कांड तक न जाने कितनी अनगिनत घटनाएं है जिनके बारे में सोच कर किसी का भी दिल फट जाये। लेकिन अपराधों का सिलसिला देश भर में अविराम जारी है। देश में घटित अनेक घटनाए व अपराध इसका एक साक्षात प्रमाण है और इसके लिए हमारा मृत समाज और सड़ा गला सिस्टम ही जिम्मेदार है।



