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ऐसे मौसम का मजा लीजिए

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जी हां! ऐसे मौसम का मजा लीजिए। यह हम नहीं बल्कि इस देश के यशस्वी प्रधानमंत्री का मशवरा है जो उन्होंने दिल्ली वासियों को दिल्ली की खराब आबो हवा पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में दिया गया। भले ही पीएम मोदी ने यह बात दिल्ली के बढ़ते वायु प्रदूषण पर कही गई हो लेकिन शीतकालीन सत्र के प्रारंभ के समय जब वह बिहार की चुनावी हार के लिए संसद में विपक्ष से सदन में हंगामा कर निकाले जाने की बात कह रहे थे। तब उन्हें शायद इस बात का एहसास नहीं था कि यह मसखरी ही इस सत्र का सच बनने जा रही है। बात चाहे वंदे मातरम और चुनाव सुधार पर चर्चा की हो या फिर उस एस आई आर की जो वोट चोरी का मुद्दा बन कर जन—जन की जुबान पर चढ़ चुकी है। संसद के शीतकालीन सत्र में अब तक हुई चर्चाओं ने भाजपा संघ और केंद्र की वर्तमान सरकार की तमाम काली करतूतों को ही सार्वजनिक नहीं कर दिया है बल्कि भाजपा के नेताओं को इतना असहज कर डाला है कि उन्हें यह समझ ही नहीं आ रहा है कि वह इस हमलावर विपक्ष का जवाब क्या दें। पीएम मोदी अब आपदा को अवसर बदलने की कला का सामर्थ्य खो चुके हैं तथा उनके दरबार के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह अब अपना आपा इस कदर खो चुके हैं कि सदन में गाली गलौज तक कर बैठते हैं। भाजपा सरकार के इन नेताओं की यह हालत देखकर विपक्ष नेता तो इसका पूरा मजा ले ही रहे हैं। सोशल मीडिया ने इसको हवा देखकर वहां तक पहुंचा दिया है कि पूरे देश की जनता भी इस हालात का बस मजा ले रही है। हद तो यह हो चुकी है कि भाजपा के अधिकृत ट्विटर हैंडल से नेता विपक्ष को उनकी विदेश यात्राओं के जरिए से जोड़कर अय्याश तक कह दिया गया। पीएम मोदी और अमित शाह से जुड़े उनके चित्र और चरित्र पर सवाल उठाने की आंधी आ गई। जिस पर अब सोशल मीडिया पर खूब बहस हो रही है। एक दूसरे को निर्वस्त्र करने के इस मामले में राजनीतिक नेताओं को शर्म आनी चाहिए लेकिन तमाशा जारी है। इसके साथ ही मीडिया के डिबेट पर क्योंकि जनता भी मजा ले रही है इसलिए भाजपा को चुनकर सत्ता सीट पर बैठाने का काम करने वाली जनता को भी लोगों द्वारा खूब भर—भर कर सुनाया जा रहा है कि वह भी अब इस हालत का मजा ले और भाजपा को चुनने की खामियां जो उसे इसलिए भगतनी पड़ रही है कि उन्होंने ऐसे लोगों को चुना है जिनको न हिंदी आती है न अंग्रेजी। न ही राजनीति और न समाजशास्त्र का ककहरा। अब अगर उनके द्वारा देश और उसके समाज को अपनी गलत नीतियों के जरिए चौतरफा बर्बादी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया गया है तो इसका खामियाजा उन्हें भुगतना ही पड़ेगा। बिहार चुनाव पर हुए नए खुलासे के अनुसार चुनाव के दौरान सवा करोड़ महिलाओं को जो 10—10 हजार दिया गया था उसने हर बिहारी के सर पर 2 लाख का कर्ज लाद दिया है। बड़ी साफ बात है मजा मुफ्त में नहीं मिलता है। बिहार के लोगों ने मजा लिया मुफ्त की रेवड़ियों का तो अब उसका हर्जाना भी उन्हें ही भुगतना पड़ेगा। देखना ही है कि केंद्र में बैठी भाजपा सरकार जिसने देश के लोगों के लिए मजा लेने के लिए यह हालात पैदा किए हैं वह केंद्रीय सत्ता पर बैठे रहकर कब तक इसका मजा ले सकेगी।

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