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जमीन पर सर्जिकल स्ट्राइक !

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  • दून की जमीन पर ‘पाक दावा खत्म – सरकार का ताबड़तोड़ एक्शन!

देहरादून। तहसील कालसी के जनजातीय क्षेत्र जौनसार—बावर में भूमि विवाद के एक मामले में सोशल मीडिया पर एक सनसनीखेज वीडियो सामने आया था। जिसमें पाकिस्तान/पीओके निवासी एक व्यक्ति द्वारा अपना दावा पेश किया गया था। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए विवादित जमीन को राज्य सरकार के नाम चढ़ा दिया है। साथ ही जमीन पर दर्ज आठ लोगों के नाम काट दिये गये है।
बता दें कि विगत समय मेंं सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें पाकिस्तान (पीओके) निवासी एक व्यक्ति द्वारा देहरादून के कालसी क्षेत्र में अपनी जमीन होने का दावा किया गया था। मामले के सामने आने पर प्रशासन ने जांच कालसी के उपजिलाधिकारी प्रेमलाल को सौंपी। जिन्होने जांच के बाद हरिपुर व्यास स्थित विवादित जमीन पर दर्ज रजब अली, मो. शफी, मो. अली, मो. शौकत अली, तेवर अली, असगर अली, सफदर अली और विल्किस बानो के नाम रद्द कर दिए। इसके साथ ही 0.7688 हेक्टेयर भूमि को राजस्व अभिलेखों में राज्य सरकार के नाम दर्ज कर दिया गया। पूरी रिपोर्ट जिलाधिकारी देहरादून को भेज दी गई है।
विवाद की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई, जब जम्मू—कश्मीर निवासी गुलाम हैदर ने हरिपुर कालसी में भूमि खरीद ली। हैदर जम्मू पुलिस में कार्यरत था और आतंकियों को मदद पहुँचाने के आरोप में निलंबित भी हो चुका है। जांच में सामने आया कि उसने सबसे पहले फर्जी दस्तावेज तैयार किए। उसने परिवार रजिस्टर में अपना नाम दर्ज कराने के साथ ही स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनवाया जिसके बाद उसने और फिर जनजातीय क्षेत्र में जमीन खरीद डाली। जनजातीय इलाकों में बाहरी लोगों द्वारा भूमि खरीद पर सख्त रोक होने के बावजूद यह सौदा कैसे हुआ, यह अपने आप में बड़ा सवाल बन गया है।
मामले में प्रशासन की नजर तब गई, जब पाकिस्तान/पीओके से एक वीडियो सामने आया। वीडियो में खुद को अब्दुल्ला बताने वाला व्यक्ति दावा करता दिखा कि यह जमीन उसके दादा मोटा अली की थी। दादा ने जमीन इमामबाड़ा मस्जिद को दान दी थी और अब जमीन पर गलत तरीके से कब्जा कर बेचा जा रहा है। वीडियो वायरल होते ही प्रशासन ने तत्काल जांच शुरू की और पाया कि हैदर ने जमीन को आगे कई व्यक्तियों को बेच दिया था, जिसके चलते कई अलग—अलग पक्ष जमीन पर अपना दावा करने लगे थे।जांच रिपोर्ट में साफ पाया गया कि जमीन की खरीद नियमों के खिलाफ थी, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सौदा किया गया था।

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