काठ की हाड़ी

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काठ की हाड़ी बार—बार नहीं चढ़ सकती, यह कहावत बहुत आम है। जो आज के दौर की राजनीति में सच साबित हो रही है। भाजपा के उन दिग्गज नेताओं का सच जो 2014 के लोकसभा चुनाव में देश की जनता को अच्छे दिन लाने और देश के हर गरीब आदमी को गरीबी से मुक्ति दिलाने का विश्वास दिलाकर सत्ता में आई थी अब उनकी कथनी और करनी का सच ही आम जनता के सामने नहीं आ चुका है अपितु वह सत्ता में बने रहने के लिए किस—किस तरह के हथकंडे इस्तेमाल करते हैं इसकी कलई भी खुल चुकी है। धर्म और जातीय आधार पर समाज में मतभेद और वैमनस्य की भावना भरकर वोटो के धु्रवीकरण कैसे किया जाता है? अपने झूठ को भी सच साबित करना और विपक्ष के सच को भी झूठ बता देना और इवेंट मैनेजमेंट तथा मीडिया मैनेजमेंट के द्वारा अपनी छवि को कैसे गढ़ा जाता है और दूसरों की छवि को कैसे खराब किया जा सकता है इसका कोई दूसरा उदाहरण इससे पहले देश की राजनीति में कभी ढूंढने से भी नहीं मिल सकता है। इन्हीं तमाम जरियों के भरोसे महामानव की परिकल्पना तक पहुंच चुके प्रधानमंत्री मोदी इन दिनों चर्चाओं के केंद्र में है। उनके एक इवेंट मैनेजमेंट की असफलता ने भाजपा और उनके सामने बिहार चुनाव में अपनी हार की एक ऐसी पटकथा लिखी जा चुकी है जिसका कोई उपाय अब उन्हें नहीं मिल पा रहा है। चुनाव आयोग के जरिए छठ पूजा महोत्सव के समय चुनाव कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कराने से लेकर प्रधानमंत्री मोदी का जो छठ पूजा कार्यक्रम तय किया गया उसके लिए कैसे दिल्ली में यमुना के किनारे उनके लिए नकली यमुना और अलग घाट का निर्माण किया जाना और उसमें फिल्टर गंगा जल पहुंचाने की व्यवस्था किए जाने का जो भंडाफोड़ हुआ उसे देखकर आम आदमी ही नहीं वह लोग भी हैरान रह गए जो इस पर्व को पूरी श्रद्धा और शिद्दत के साथ मनाते हैं। विपक्ष ने इस मुद्दे को बिहार चुनाव में जनता के सामने रखकर जब पीएम की छठ पूजा के नाटक का मजाक बनाया और कहा गया कि मोदी वोट के लिए मंच पर आकर भरतनाट्यम नाच भी आपको दिखा सकते हैं तो भाजपा की मुश्किलें बढ़ना स्वाभाविक ही था। खास बात यह है कि 2019 के चुनाव में जब राहुल ने चौकीदार चोर का नारा दिया था तब पीएम मोदी ने पूरे देश की जनता को यह कहते हुए कि राहुल गांधी मुझे नहीं आप सभी को चोर कह रहे हैं उनके खिलाफ खड़ा कर दिया था ठीक वैसा ही वह छठ पूजा के इस पूरे प्रकरण में करने की कोशिश कर रहे हैं। वह राहुल गांधी पर ही छठ मैया और वृती महिलाओं का अपमान करने का आरोप लगाते हुए उनसे राहुल गांधी व तेजस्वी को सबक सिखाने की अपील कर रहे हैं। लेकिन शायद उन्हें यह नहीं पता है कि 2019 से लेकर अब तक यमुना व गंगा में बहुत पानी बह चुका है। जनता उनके ऑपरेशन सिंदूर के बाद घर—घर सिंदूर पहुचाने की योजना से लेकर अन्य तमाम इवेंट मैनेजमेंट का सच जान चुकी है। वह बेटियों को जबरन उठा ले जाने की बात बिहार चुनाव में कर रहे हैं जबकि लंबे समय से बिहार में वह खुद सत्ता में साझेदार हैं तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है? यह भी उन्हें बताना चाहिए। मुद्दा विहीन भाजपा के पास बिहार चुनाव में कोई एक भी मुद्दा नहीं बचा है और उसके नेताओं को यह पता चल चुका है कि अब उनकी काठ की हांड़ी नहीं चढ़ सकती है। उनकी पेशानी पर उनकी परेशानी अब साफ—साफ जनता को भी दिखने लगी है।

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