देहरादून। पुलिस प्रशासन ने दावा किया था कि शहर के 12 स्थानों पर धरना प्रदर्शन नहीं होने देंगे जिसके कुछ ही घंटों बाद बेरोजगार संघ के बैनर तले सैकडों बेरोजगार युवा परेड ग्राउंड में एकत्रित हो गये जिसको लेकर पुलिस प्रशासन मात्र मूक दर्शक बना खडा दिखायी दिया।
जिला पुलिस प्रशासन ने जनपद में धरना— प्रदर्शन के दौरान आमजन को होने वाली समस्याओं/यातायात तथा वर्तमान में जनपद के विभिन्न स्थानों पर आई आपदा की स्थिति के दृष्टिगत शान्ति एंव सुरक्षा व्यवस्था बनाये रखने हेतु आज से निम्न स्थानों पर मजिस्ट्रेट द्वारा धारा 163 बीएनएसएस लागू की गई है। जिसके अनुसार घण्टाघर, चकराता रोड, गांधी पार्क, सचिवालय रोड, न्यू कैंट रोड, सहस्त्रधारा रोड, नेशविला रोड, राजपुर रोड, ईसी रोड, सहारनपुर रोड, परेड ग्राउड व सर्वे चौक/डीएवी कॉलेज रोड आदि स्थानों तथा उसके आस—पास 500 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार की सार्वजनिक सभा, जूलुस, प्रर्दशन या पांच से अधिक व्यक्तियों के समूह के रूप में एकत्रित होना पूर्ण रूप से प्रतिबंधित रहेगा तथा बिना लिखित अनुमति के किसी भी प्रकार के लाउड स्पीकर, डीजे या ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग प्रतिबन्धित रहेगा तथा किसी भी तरीके के हथियार, लाठी—डन्डे, औजार या अन्य आपत्तिजनक सामग्री लेकर चलना पूर्णतः वर्जित रहेगा। प्रशासन के इस दावे को आदेश के कुछ घंटों बाद ही बेरोजगार संघ के बैनर तले परेड ग्राउंड में सैकडों युवाओं ने एकत्रित होकर पुलिस को खुला चैलेंज कर दिया और पुलिस मात्र मूक दर्शन बने खडे होने के अलावा उनका कुछ नहीं बिगाड सकी। यहां यह बात साफ हो जाती है कि अगर दम नहीं हो तो बडे—बडे दावें नहीं करने चाहिए जिससे खुद ही मजाक का कारण बनना पडे। पुलिस प्रशासन ने जिस तरह से आदेश पारित किया था तो उन आदेशों का कडाई से पालन कराना भी सुनिश्चित करना चाहिए था। अब देखने वाली बात है कि पुलिस प्रशासन युवाओं को एकत्रित करने से नहीं रोक पायी तो उक्त आदेशों को पुलिस प्रशासन को पालन कराना चाहिए था और कडे कदम उठाने चाहिए थे लेकिन यहां पर मूक दर्शक बनने के अलावा पुलिस प्रशासन कुछ नहीं कर सका तो फिर अधिकारी किस दम पर ऐसे दावे कर देते हैं यह अपने आप में सोचनीय विषय है।




